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मूक व्यक्तियों को नौकरियों में आरक्षण की मांग वाली याचिका पर केन्द्र से जवाब मांगा गया

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केन्द्र से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें वाणी एवं भाषा संबंधी विकलांगता ग्रस्त लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने का अनुरोध किया गया। ‘वाणी एवं भाषा संबंधी विकलांगता'' इंद्रीय या तंत्रिका तंत्र संबंधी कारकों से पैदा स्थितियों वाली स्थायी विकलांगता है।

मूक व्यक्तियों को नौकरियों में आरक्षण की मांग वाली याचिका पर केन्द्र से जवाब मांगा गया

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केन्द्र से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें वाणी एवं भाषा संबंधी विकलांगता ग्रस्त लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने का अनुरोध किया गया। ‘वाणी एवं भाषा संबंधी विकलांगता' इंद्रीय या तंत्रिका तंत्र संबंधी कारकों से पैदा स्थितियों वाली स्थायी विकलांगता है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति के एम जोसफ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने रीपल कंसल द्वारा दायर जनहित याचिका पर केन्द्र को नोटिस जारी किया।
याचिका में कहा गया कि ‘वाणी एवं भाषा विकलांगता' की श्रेणी में आने वाले विकलांगों को शिक्षा में तो आरक्षण का लाभ मिल रहा है लेकिन सरकारी नौकरियों में यह व्यवस्था नहीं है।
कंसल की ओर से पेश वकील यदुनंदन बंसल ने कहा कि केन्द्र द्वारा वाणी एवं भाषा संबंधी विकलांगता से ग्रस्त लोगों को नौकरियों में आरक्षण नहीं देने को सही नहीं ठहराया जा सकता और यह भेदभावपूर्ण है।
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