Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

''जलपरी'' के 570 किलोमीटर के तैराकी अभियान पर विवाद

जलपरी के अभियान में तीन दिन तक लगातार साथ रहे फिल्‍ममेकर को सच जानकर हुई निराशा

नई दिल्ली. 'जलपरी' के नाम से प्रसिद्ध कानपुर की श्रद्धा शुक्ला के बारे में चौंकाने वाली कुछ बातें सामने आई हैं, जिनसे श्रद्धा के अभियान पर ही सवालिया निशान लगने लगे हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार विनोद कापड़ी ने दावा किया है कि कानपुर से वाराणसी के बीच गंगा अभियान के दौरान श्रद्धा समय नाव पर ही बिताती है। वह गंगा में तैराकी के लिए उसी वक्त उतरती है, जब या तो कोई घाट आने वाला होता है या आसपास लोगों की भीड़ होती है। विनोद कापड़ी श्रद्धा पर जलपरी नाम से एक फिल्म डॉक्युमेंट्री बना रहे हैं।

विनोद कापड़ी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वह श्रद्धा के कानपुर से वाराणसी तक गंगा में तैरकर जाने की खबर से उत्साहित होकर डॉक्युमेंट्री फिल्म बनाने पहुंचे थे। लेकिन जब वह जलपरी के अभियान में तीन दिन तक लगातार साथ रहे तो उन्हें बहुत निराशा हुई। उन्होंने देखा कि 570 किलोमीटर तक गंगा में तैराकी का यह अभियान सिर्फ छलावा है, जिसके जरिए लोगों और देश को गुमराह किया जा रहा है।

अब डॉक्युमेंट्री में इस बात को दिखाया जाएगा कि इस अभियान के दौरान जलपरी एक दिन में 80-100 किलोमीटर नहीं, बल्कि 2 से 3 किलोमीटर ही तैराकी करती है। बाकी समय वह नाव पर बिताती है। दरअसल 80-100 किलोमीटर की जिस दूरी का दावा किया जाता है, वह नाव के चलने की दूरी होती है। विनोद कापड़ी ने अपनी डॉक्युमेंट्री में जलपरी के साथ चल रहे नौका दल के प्रमुख मान सिंह पासवान, गोताखोर पिंटू निषाद, राममिलन निषाद का इंटरव्यू रिकॉर्ड किया है। उनका दावा है कि तीनों ने ही डॉक्युमेंट्री में इस बात का खुलासा किया है कि पहले दिन से ही इस तरह लोगों को भ्रम में रखने की कोशिश चल रही है, जिसे देखकर उन्हें बहुत दुख होता था पर वह लाचार थे क्योंकि कोई भी उनसे बात नहीं करता था।

एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, विनोद कापड़ी ने कहा कि उनकी पूरी हमदर्दी बच्ची के साथ है और इसमें बच्ची की जरा भी गलती नहीं है। देश को गुमराह करने का काम सिर्फ उसके पिता ही कर रहे हैं, जिसकी जानकारी और समझ संभवत बच्ची को नहीं होगी। वह तो अपने पिता के इशारे पर ही सब कर रही है। यही नहीं, कई जगह तो जलपरी को गंगा मैया का अवतार मानकर उसकी आरती उतारी जा रही है और पूजा हो रही है। 80 साल तक के बुजुर्ग 12 साल की श्रद्धा को गंगा मैया का अवतार मानकर उसके पैर तक छू रहे हैं। विनोद ने बताया कि लाखों लोगों की आस्था और विश्वास के लगातार हो रहे इस खिलवाड़ को देखते हुए ही उन्होंने यह सच सबके सामने लाने का फैसला किया।

वहीं, श्रद्धा के पिता ललित शुक्ला ने कहा है, 'डॉक्युमेंट्री बनाने वाले लोग उनकी नाव पर चल रहे थे। इलाहाबाद में उन्हें नीचे उतार दिया गया। हो सकता है कि, इसीलिए वह ऐसे आरोप लगा रहे हों। उन्हें यदि पूरी तरह देखना था तो उन्हें अपनी नाव से हमारे साथ चलना था। उनके आरोप निराधार हैं।'
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top