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लगातार हार से कांग्रेस में फंड का टोटा, AICC ने प्रदेश कमेटी के ऑफिस का खर्चा-पानी बंद किया

फंड की कमी के कारण कांग्रेस पार्टी की बैलेंस-सीट कैसे बुरी तरह डोल गई है, पांच महीने से एआईसीसी ने किसी भी प्रदेश कमेटी को ऑफिस चलाने के लिए जरूरी खर्च नहीं भेजा है।

लगातार हार से कांग्रेस में फंड का टोटा, AICC ने प्रदेश कमेटी के ऑफिस का खर्चा-पानी बंद किया
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एक के बाद एक राज्य हारती कांग्रेस पार्टी से केवल वोटरों का मोहभंग ही नहीं हुआ है पार्टी को चंदा देने वाले कॉरपोरेट-हाउसों ने भी धीरे-धीरे पार्टी से हाथ खींचना शुरू कर दिया है।

फंड की कमी के कारण कांग्रेस पार्टी की बैलेंस-सीट कैसे बुरी तरह डोल गई है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गत पांच महीने से एआईसीसी की ओर से किसी भी प्रदेश कमेटी को ऑफिस चलाने के लिए जरूरी खर्च भेजना बंद कर नेताओं, कार्यकर्ताओं को आपसी सहयोग से पार्टी चलाने की नसीहत दी है।

पार्टी महासचिव अशोक गहलोत मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी के पास फंड की बेहद कमी है। बतौर उदाहरण उन्होंने बताया कि कर्नाटक विस चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशियों को जहां 15-20 लाख रुपए ही कांग्रेस पार्टी से आवंटित किए जा सके वहीं भाजपा के एक-एक प्रत्याशी 10 करोड़ से ऊपर खर्च कर रहे थे जाहिर है ऐसे में मुश्किल तो होती ही है।

पॉलिटकल फंडिंग कॉरपोरेट से जुड़े बड़े लक्ष्मीपुत्र तभी करते हैं जब उन्हें संबंधित पार्टी या नेताओं में कुछ भविष्य दिखता है। तमाम तरह के रिपोर्ट लगातार इस बात को कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशभर में लोकप्रियता कम नहीं हुई है। उस पर भाजपा एक के बाद राज्य से छीनती जा रही है। चुनावी गुणाभाग में भाजपा कांग्रेस पर अब तक हावी रही है।

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कॉरपोरेट फंडिंग से जुड़े एक विशेषज्ञ ने कहा कि ये सब राजनीतिक कारण ऐसे हैं जो कांग्रेस की बैलेंस-सीट को आगे भी कमजोर करेंगे। गत वर्ष की तुलना में कांग्रेस पार्टी को अभी 14 फीसदी कम फंडिंग हुई तो पार्टी को इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा की तुलना में कांग्रेस को फंडिंग कितनी हुई इस तरह की व्याख्या ही अभी के समय में बेमानी है।

एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि 2017 के वर्ष में जिस समय भाजपा को 1 हजार 34 करोड़ रुपए की फंडिंग हुई उसी समय में कांग्रेस को महज 225 करोड़ रुपए की फंड आ सकी। यानि भाजपा के एवज में कांग्रेस को मिला बस 25 फीसदी। कांग्रेस के रणनीतिकार इस बात को मान रहे हैं कि फंड की कमी चुनाव-मैनेजमेंट में कांग्रेस को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रही है।

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2016 में कांग्रेस को मिला 198 करोड़ का फंड

चुनाव आयोग में दाखिल की गई दोनों दलों की रिपोर्टस के आधार पर एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि मार्च 2016 तक चार साल में 2 हजार 987 कॉरपोरेट हाउस से भाजपा को 705 करोड़ रुपए चंदा मिला जब कि कांग्रेस को इसी दरम्यान 167 कॉरपोरेट हाउस से 198 करोड़ रुपए का फंड मिला।

जब कि 2014 के आम चुनाव में भाजपा को 588 करोड़ और कांग्रेस को 350 करोड़ रुपए चंदा मिला था। मतलब सीधा है कि 2014 के आमचुनाव के बाद कांग्रेस की हालत केवल चुनावी दंगल में ही नहीं फंडिंग के दंगल में भी पतली रही, जिसका कुप्रभाव पर अब कांग्रेस पर पड़ता हुआ दिख रहा है।

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