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अखिलेश को निबटाने के लिए मुलायम-शिवपाल का एक और दांव

यूपी में 11 फरवरी को सात चरणों में चुनाव होंगे।

अखिलेश को निबटाने के लिए मुलायम-शिवपाल का एक और दांव
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नई दिल्ली. यूपी में चल रहे पारिवारिक सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच एक बार फिर चाचा शिवपाल यादव और पिता मुलायम सिंह यादव ने सख्त तेवर दिखने शुरू कर दिया हैं। एक तरफ जहां मुलायम सिंह ने कोंग्रेस से सपा के हुए गठबंधन पर जमकर निशाना साध रहे हैं, वहीं अखिलेश के चाचा शिवपाल ने सपा से टिकट लेने के बाद पार्टी से मुह मोड़ने के फैसला ले लिया है। सपा के टिकट पर यूपी की जसवंत नगर सीट से चुनाव लड़ने वाले शिवपाल ने ऐलान किया है कि वह 11 मार्च को यानि चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद अलग पार्टी बनाएंगे।
दरअसल सपा की कमान अखिलेश यादव के हाथों में पूरी तरह से आने के बाद मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव पार्टी में एकदम हाशिए पर पहुंच गए हैं। हालांकि अब सपा-कांग्रेस गठबंधन होने के बाद भी सियासी तस्‍वीर बदल गई है। मुलायम ने इस गठबंधन का खुलेतौर पर विरोध करते हुए कहा है कि वह इस गठबंधन के विरुद्ध प्रचार करेंगे। और अपने समर्थकों से कहा है कि वे कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ें। मुलायम खेमे का मानना है कि इससे अखिलेश का नुकसान होगा और कांग्रेस उन सीटों पर चुनाव हार सकती है। जिससे आने वाले समय में कांग्रेस और अखिलेश के बीच संबंधों में दरार पड़ जाएगी।
वहीं पर्चा दाखिल करते हुए शिवपाल ने अखिलेश यादव पर इशारों ही इशारों में ही हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने पार्टी में मेरा कद छोटा करने की कोशिश की है। शिवपाल ने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने नेताजी को अपमानित करने का काम किया है। इसके अलावा शिवपाल सिंह यादव ने यह भी कहा कि उनके विभाग ने अच्छा काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे लोगों के टिकट काटे गए। कांग्रेस की क्या हालत थी, सिर्फ चार सीटें जीतने की। किसका फायदा किया कांग्रेस का, टिकट हमारे लोगों का काटा। इसके अलावा शिवपाल ने यह भी कहा कि मेहरबानी हो गई जो टिकट दे दिया, नहीं तो निर्दलीय ही चुनाव लड़ना पड़ता। साथ ही उन्होंने कहा कि हम केवल गलत काम को रोक रहे थे, गलत काम का विरोध कर रहे थे, इसीलिए हमें निकाला गया।
उल्‍लेखनीय है कि कुछ समय पहले सपा में यादव परिवार के बीच में जबर्दस्‍त घमासान मचा था। उस दौरान पार्टी में दो फाड़ हो गया था। एक तरफ मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव थे तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव और रामगोपाल थे। उसकी परिणति सपा में तख्‍तापलट के रूप में हुई। अखिलेश यादव को पार्टी का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बना दिया गया। शिवपाल यादव को पार्टी के प्रदेश अध्‍यक्ष पद से हटा दिया गया। चुनाव निशान पर कब्‍जे की लड़ाई का मामला चुनाव आयोग के पास पहुंचा. चुनाव आयोग के अखिलेश के पक्ष में फैसला देने के बाद एक तरफ से उनको वैधानिक मान्‍यता मिल गई।
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