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नेताजी जो कहेंगे वहीं करूंगा, लेकिन भतीजे को करना होगा मुंह बंद

सीएम अखिलेश ने चाचा शिवपाल को बिना कोई कारण बताए अचानक पद से हटा दिया।

नेताजी जो कहेंगे वहीं करूंगा, लेकिन भतीजे को करना होगा मुंह बंद
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सैफई. यूपी की राजनीति मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल यादव और बेटे अखिलेश यादव को लेकर काफी गरमा गई है। शिवपाल ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कहा, मेरे इस्तीफा देने का फैसला मैं नेताजी से मिलने के बाद ही करूंगा। जो नेताजी कहेंगे वो करूंगा। अपने विभाग छीने जाने और दो मंत्रियों और चीफ सेक्रेटरी को हटाए जाने के सवाल पर शिवपाल ने कहा, 'कैबिनेट में किसी को रखने या न रखने या किसको क्या जिम्मेदारी दी जाए, यह मुख्यमंत्री का अधिकार होता है।' क्या सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देंगे, इस पर शिवपाल ने कहा कि हम नेताजी से बात करेंगे। नेताजी से बात करने के बाद निर्णय लेंगे। उनसे बात हुई है। अब दिल्ली जाकर बात करेंगे। जहां परिवर्तन की जरूरत है, वहां परिवर्तन होगा।
एनबीटी की खबर के मुताबिक, कॉन्फ्रेंस में जब शिवपाल से पूछा गया क्या पत्नी, बेटे ने भी पार्टी में अपनी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दिया है, इस पर शिवपाल ने कहा कि नेताजी से बात करने के बाद ही इस पर कुछ बोलूंगा। नेताजी की बात को टालने की हैसियत किसी की नहीं है। पार्टी का काम ठीक तरीके से करूंगा। पार्टी को फिर से खड़ा करेंगे। मुझ पर अब जिम्मेदारी है। जब उनसे पूछा गया क्या चाचा-भतीजे के रिश्तों में खटास है, इस पर शिवपाल ने कहा कि सब ठीक है। जो उनका अधिकार हैं, वे कर रहे हैं। जो मेरा अधिकार है, मैं कर रहा हूं। लेकिन अब अखिलेश के साथ काम करना मुश्किल है। दरअसल, मंगलवार को सपा के यूपी चीफ की पोस्ट से हटाए जाने के दो घंटे बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल से राजस्व, सिंचाई और पीडब्ल्यूडी जैसे बड़े विभाग छीन लिए। कहा जा रहा है कि शिवपाल इससे नाराज हैं।
बिना कोई कारण बताए अचानक पद से हटा दिया
शिवपाल के इस्तीफा देने की अटकलों को मुलायम के कुनबे में मचे राजनीतिक घमासान से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे पहले मंगलवार सुबह अखिलेश ने शिवपाल के करीबी और सरकार के चीफ सेक्रेटरी दीपक सिंघल को भी बिना कोई कारण बताए अचानक पद से हटा दिया था। कहा जा रहा है कि सोमवार को जब दो मंत्रियों को करप्शन के आरोपों पर बर्खास्त किया गया तो इसमें भी शिवपाल से सलाह नहीं ली गई। इससे पहले सोमवार को अखिलेश यादव ने शिवपाल के दो वफादार मंत्रियों गायत्री प्रजापति और राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
मुलायम ने लिया था शिवपाल का पक्ष
अखिलेश के साथ टकराव की खबरों के बीच शिवपाल की नाराजगी के बाद मुलायम ने शिवपाल का पक्ष लिया था। इस घटनाक्रम के बाद मुलायम ने कुछ सार्वजनिक मौकों पर अखिलेश की आलोचना की थी। मुलायम का मानना है कि शिवपाल की पार्टी और कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ है। उधर, अखिलेश भी बुधवार सुबह गवर्नर से मिलने जाएंगे। इस बीच, चर्चा यह भी है कि अखिलेश का गुस्सा शांत करने के लिए उन्हें सपा का राष्ट्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। आपको बता दें, दोनों के बीच का सियासी तनाव जून में उस समय सतह पर आ गया था जब अखिलेश ने कौमी एकता दल और समाजवादी पार्टी के गठजोड़ की शिवपाल की कोशिशों पर पानी फेर दिया था।
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