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शिवपाल के समर्थकों ने लगाए रामगोपाल के खिलाफ नारे

हजारों समर्थकों के साथ शिवपाल ने लखनऊ में उठाई अपनी अावाज।

शिवपाल के समर्थकों ने लगाए रामगोपाल के खिलाफ नारे
लखनऊ. अखिलेश से नाराज शिवपाल यादव ने कल मंत्री और पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया है। तो वहीं शिवपाल के समर्थक लखनऊ की सड़क पर उतर आए हैं, वैसे उनके इस्तीफे नामंज़ूर किए जा चुके हैं लेकिन झगड़ा खत्म नहीं हुआ है। इस पर शिवपाल यादव ने लखनऊ में पानी शक्ति का प्रदर्शन करने का दावा किया और हजारों समर्थकों के साथ लखनऊ में अपनी आवाज ऊठाई है और शिवपाल ने मुलायम सिंह के संदेश को ही आदेश बताया है।
सूत्रों के मुताबिक शिवपाल ने कहा है कि, "मुलायम सिंह यादव का सदेश ही हमारें लिए आदेश होगा।" अटकलें यह भी हैं कि शिवपाल इस्तीफा वापस ले सकते हैं। फिलहाल शिवपाल के घर के बाहर समर्थकों का हुजूम लगा हुआ है।
गुरुवार की शाम जैसे ही शिवपाल यादव ने पार्टी और कैबिनेट से इस्तीफा दिया, शिवपाल के घर के बाहर समर्थकों का मजमा लग गया। कार्यकर्ता सहित करीब 20 विधायक भी खुलकर शिवपाल के समर्थन में घर के बाहर जमा हो गए। यादव परिवार की इस पार्टी में पहली बार परिवार के एक सदस्य को उसी के परिवार से इंसाफ दिलाने के लिए बाहर के लोग आवाज उठाते सुने गए। साथ ही कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने पर शिवपाल यादव को भी सड़क पर आना पड़ा।
शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच चल रहा संघर्ष गुरुवार की शाम अपने चरम पर पहुंच गया। शिवपाल लगातार कह रहे थे कि जो नेताजी (मुलायम सिंह) कहेंगे, वे वहीं करेंगे. ना जाने मुलायम ने क्या कह दिया कि शिवपाल ने अपने आत्मसम्मान के लिए परिवार, पार्टी और सरकार को सड़क पर ला दिया। गुरुवार शाम दिल्ली से लखनऊ पहुंचकर शिवपाल, अखिलेश से मिलने गए। बंद कमरे में हुई मुलाकात के बारे में बाहर ये ख़बरें उड़ीं कि चाचा-भतीजा गले भी मिले। अखिलेश से मिलने से बाद समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की सरकार हिल गई। शिवपाल ने पहले समाजवादी पार्टी के यूपी अध्यक्ष का पद छोड़ा, उसके बाद अखिलेश सरकार के मंत्री का पद भी छोड़ा दिया। फिलहाल वह अब समाजवादी पार्टी के साधारण कार्यकर्ता बनकर रह गए हैं।
इस मामले में सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह ने शिवपाल के दोनों इस्तीफे नामंज़ूर कर दिए। शिवपाल और अखिलेश यादव के बीच तनातनी अरसे से चल रही थी। यह बात तब सामने आई थी जब अखिलेश ने मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय होने नहीं दिया था।
गौरतलब है कि हाल में अखिलेश यादव ने सरकार में सफाई अभियान चलाते हुए शिवपाल से PWD समेत कई अहम विभाग छीन लिए थे। तब शिवपाल के सब्र का बांध टूट गया।
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