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यूपी मिशन: सपा में शुरू हुई महाभारत, टिकट वितरण पर मचा घमासान

शिवपाल यादव का कहना है कि वह 175 उम्मीदवारों के नाम तय कर चुके हैं।

यूपी मिशन: सपा में शुरू हुई महाभारत, टिकट वितरण पर मचा घमासान
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नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों का ऐलान होने का जहां सियासी जंग में उतरे राजनीतिक दलों को बेसब्री से इंतजार है, वहीं सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में परिवारिक द्वंद की फिर से सुगबुगाहट तेज होती नजर आने लगी है। मसलन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव की प्रत्याशियों की सूची को लेकर घमासान शुरू हो गया है। ऐसे में सपा की इस रार को महाभारत-2 के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सबकी निगाहें सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव पर टिकी हैं, कि उनकी इस दूसरे एपिसोड में क्या भूमिका होगी?
यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक दिन पहले विधानसभा चुनाव के लिए सभी 403 सीटों के प्रत्याशियों की सूची खुद सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को सौंपते ही सिर पर खड़ चुनावों से पहले एक बार फिर से समाजवादी पार्टी का विवाद उजागर हो गया है। सपा परिवार के पहले महाभारत को किसी तरह से मुलायम सिंह यादव की सूझबूझ के बाद विराम मिला था, लेकिन चुनावों में प्रत्याशियों को टिकट देने के मामले में सपा के प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव फिर इसलिए आमने सामने हैं, चूंकि प्रदेशाध्यक्ष की हैसियत से शिवपाल यादव पहले ही 175 प्रत्याशियों की सूची सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को सौंप चुके हैं।
यह भी तय है कि यूपी विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ही देंगे। ऐसा सपा के सूत्रों ने भी पुष्टि की है। सवाल इस बात का है कि टिकटों के वितरण पर एक बार फिर उजागर हुई चाचा-भतीजे की कलह को अन्य राजनीतिक दल सपा के घमासान को महाभारत-2 की संज्ञा देकर चुटकी लेने से भी नहीं हिचक रहे हैं। यही नहीं अन्य दल सपा की फिर से शुरू होती इस अंतर्कलह को अपने सियासी फायदे के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर नजरें हैं कि वह अपने पुत्र व मुख्यमंत्री अखिलेश या फिर भाई शिवपाल के पक्ष को तरजीह देंगे या फिर कोई बीच कारास्ता तय करके इस दूसरे एपिसोड को विराम देने का फार्मूला तलाशेंगे। बहराल फिलहाल तो सपा में चाचा-भतीजे का घमासान ही सामने नजर आ रहा है।
36 का आंकड़ा बरकरार?
सपा में सितंबर में भी सपा परिवार की रार में चाचा शिवपाल और अखिलेश के बीच गहरे विवाद रहे हैं और दोनों के बीच सरकार और पार्टी में दखलंदाजी को लेकर 36 का आंकड़ा रहा है। सपा प्रमुख मुलायम ने इस रार को परिवार की एकता की दलील देकर किसी तरह शांत कराया था। लेकिन टिकट बंटवारें पर ताजा तकरार से जाहिर है कि चाचा-भतीजे में 36 का आंकड़ा बरकरार है। भले ही वह सपा में किसी दल के विलय या प्रत्याशियों में फेरबदल अथवा अन्य किन्हीं कारणों से अंतर्कलह पनप रही हो, लेकिन सपा मुखिया मुलायम सिंह का प्रयास होगा कि चुनावी रणनीति के तहत सपा में इस महाभारत को दूसरे संस्करण के रूप में देखी जारही रार को अपने दावं से विराम देंगे।
अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं
अखिलेश यादव द्वारा सपा प्रमुख को सौंपी गई 103 प्रत्याशियों की सूची को लेकर प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल यादव का कहना है कि वह 175 उम्मीदवारों के नाम तय कर चुके हैं और वह प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते पार्टी में किसी तरह की ऐसी अनुशासनहीनता को बर्दाश्तनहीं करेंगे, जिससे पार्टी की छवि धूमिल होती हो। शिवपाल का दावा है कि सभी उम्मीदवारों को जीत की उम्मीद के अनुसार हीघोषित किया गया है। गौरतलब है कि सपा परिवार की रार के कारण में अखिलेश को प्रदेशाध्यक्ष के पद से हटाकर शिवपाल कोबनाने और अपने अधिकारों के तहत अखिलेश ने शिवपाल समेत कुछ मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को हटाना माना गया था। वहीं सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव कह चुके हैं कि इस संबंध में उनकी बात आखिरी मानी जाएगी। उनका कहना है कि टिकट पर अंतिम फैसला संसदीय बोर्ड का सदस्य सचिव करता है और वह उसी पद पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह उम्मीदवारों के चयन में चाहेंगे कि उनकी बात सुनी जाए।
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