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स्वतंत्रता दिवस: ये क्रांतिकारी आज भी है गुमनाम, अंग्रेजों के बड़े अधिकारी को उतार दिया था मौत के घाट

देश अपना 72 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की ओर बढ़ रहा है। लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजरता जा रहा हैं हम उन अमर जवानों को भूलते जा रहे हैं। जिनकी कुर्बानियों की बदौलत आज हम आजाद भारत में रह रहे हैं। ऐसे ही कुछ नायकों और महानायको को याद करने की जरुरत है जिन्होंने देश की आजादी में अपना सबकुछ बलिदान कर दिया।

स्वतंत्रता दिवस: ये क्रांतिकारी आज भी है गुमनाम, अंग्रेजों के बड़े अधिकारी को उतार दिया था मौत के घाट
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देश अपना 72 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की ओर बढ़ रहा है। लेकिन जैसे- जैसे वक्त गुजरता जा रहा हैं हम उन अमर जवानों को भूलते जा रहे हैं जिनकी कुर्बानियों की बदौलत आज हम आजाद भारत में रह रहे हैं। ऐसे ही कुछ नायकों और महानायको को याद करने की जरुरत है जिन्होंने देश की आजादी में अपना सबकुछ बलिदान कर दिया।

आपने आजादी के क्रान्तिकारियों में कई महानायकों के बारे में पढ़ा होगा या सुना होगा। लेकिन कुछ नायक ऐसे भी है जिनके बारें में किताबों में शायद नहीं पढ़ाया जाता। आज हम आपको ऐसे ही एक क्रांतिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं
आज हम बात कर रहे हैं शेर अली अफरीदी की जिन्होंने एक ब्रिटेन अधिकारी की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। वह कोई आम व्यक्ति नहीं बल्कि अंग्रेजी सरकार में गवर्नर जनरल था।
आपको बता दें कि अफगानिस्तान के पास जमरूद नाम का एक हैं जोकि पहले भारत में ही आता था। उसमें देश को आजाद कराने की चर्चा चल रही थी। सभी अंग्रेजों के अत्याचारों से परेशान होकर आजादी चाहते थे। उसी दौरान किसी ने किसी ने शेर अली आफरीदी को बताया कि अगर कोई वायसराय को मार दे तो अंग्रेज डरकर देश छोड़ भाग जायेंगे।
जिसके बाद 8 फरवरी के दिन 1872 में शेर अली आजाद ने अंग्रेजों के तमाम सुरक्षा बंदोबस्तो को तोड़ते हुए लॉर्ड मेयो की चाकू से गोद-गोद कर हत्या कर दी थी। लॉर्ड मेयो की हत्या अंग्रेजी हुकुमत के लिए बड़ा झटका मानी जा रही थी।
उस समय वायसराय की उपाधि राष्ट्रपति के बराबर होती थी. तो शेर अली आफरीदी ने यह उसे मारने का जिम्मा अपने कन्धों पर ले लिया था। वह पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने वायसराय पर हमला किया था। उस वक्त किसी में इतनी हिुम्मत नहीं होती थी।
सन 1872 का वह दिन जब वायसराय मायो, इन्डिया आया था ऐसा लग रहा था कि अंग्रेज तब भी देश की गरीबी देखने ही आते थे तो वायसराय भी काले पानी की सजा काट रहे लोगों का मजाक बनाने ही आया था। जिसको देखकर शेर अली ने मारने का मन बना लिया।
शेर अली पूरे दिन एक नाव में छिपकर बैठा रहा। जब वायसराय शाम को वापस लौटकर आने लगा तो शेर अली ने चाकू से उस पर वार कर दिया था। जिसके बाद में वीर शेर अली आफरीदी को इस कार्य के लिए फांसी पर लटका दिया गया था।
इस तरह अफरीदी देश के लिए कुर्बान हो गए लेकिन लोगों के दिलों में अंग्रेजों के खिलाफ क्राति की चिंगारी जला गए। आज भी उस महावीर की कुर्बानी हमारे दिल में जिंदा है।

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