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दिल्ली: पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की प्रेम कहानी उन्हीं की जुबानी, कॉलेज में प्‍यार, बस में इजहार

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अपनी किताब "सिटीजन दिल्ली माय टाइम्स, माय लाइफ” में अपनी मोहब्बत की कहानी को बयान किया है।

दिल्ली: पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की प्रेम कहानी उन्हीं की जुबानी, कॉलेज में प्‍यार, बस में इजहार
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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने शायद ही किसी को अपनी लव लाइफ के बारे में बताया हो पर उन्होंने अपनी किताब 'सिटीजन दिल्ली माय टाइम्स, माय लाइफ' में अपनी मोहब्बत की कहानी को बयान किया है। उन्होंने इसमें बताया है कि प्राचीन भारत की पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाक़ात विनोद से हुई। विनोद बाकी छात्रों से अलग थे। ऐसा नहीं था कि शीला दीक्षित को पहली ही नज़र में विनोद से मोहब्बत हो गई हो, वो दोनों दोस्तों के झगड़े सुलझाते हुए हम एक दूसरे के करीब आने लगे।

वही शीला दीक्षित ने विनोद के व्यवहार और उनकी सुंदरता के बारे में बताते हुए कहा कि वह लंबे, सुंदर और सडौल शरीर के साथ ही हंसमुख अंदाज के थे, और शीला अपने मन कि बात खुलकर नहीं कर पाती थी। एक बार अपनी दिल की बात का इज़हार करने के लिए शीला दीक्षित ने विनोद के साथ घंटे भर डीटीसी बस में सफर किया था। शीला दीक्षित ने अपनी किताब में इस बात का भी खुलासा किया कि विनोद ने उन्हें शादी का प्रस्ताव भी बस में दिया जब वो दोनों फाइनल ईयर का एग्जाम दे रहे थे।
तब चांदनी चौक के बस नम्बर 10 में विनोद ने शिला से कहा कि वह अपनी मां को बताने जा रहे हैं कि उन्होंने अपनी शादी के लिए लड़की चुन ली है, शीला ने इस बात पर विनोद से पूछा की क्या उसने उस लड़की के दिल की बात जानने कि कोशिश कि तब विनोद ने इसका जवाब दिया नहीं, मगर वो लड़की मेरे आगे वाली सीट पर बैठी है। कुछ समय बाद ही विनोद ने अपने घर में सब बता दिया। लेकिन दोनों को अपनी शादी को लेकर संदेह था क्योंकि विनोद अभी छात्र थे ऐसे में उनकी शादी कैसे चलेगी।
कुछ समय बाद शीला ने मोतीबाग में एक दोस्त की मां के नर्सरी स्कूल में 100 रुपये के वेतन पर नौकरी करने लगी और विनोद भी अपने आईएस परीक्षा की तैयारी जुट गए। इस बीच दोनों कि मुलाक़ात कम हो गई और फिर 1959 में विनोद का आईएएस के लिए चयन हो गया उन्होंने उत्तर प्रदेश का कैडर चुना था। शीला ने आगे बताया कि विनोद कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार से थे और उनके पिता उमाशंकर दीक्षित एक स्वतंत्रता सेनानी, हिन्दीभाषी और उच्च संस्कारों के व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे।
विनोद ने जब जनपथ के एक होटल में अपने पिता से उनकी मुलाक़ात कराई तो वह काफी डरी हुई थी। इसके बाद शीला ने विनोद से शादी करने के लिए 2 साल तक इंतजार करना पड़ा क्योंकि विनोद की मां को अंतर जातीय विवाह के लिए मनाने में दो साल लग गए थे। और 11 जुलाई , 1962 दोनों शादी के बंधन में बंध गए।

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