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उपचुनाव के नतीजों पर शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर सुब्रमण्यम स्वामी तक ने कसा तंज, ये रहे हार जीत के 5 बड़े कारण

उत्तर प्रदेश और बिहार उपचुनाव में हार के बाद सुब्रमण्यम स्वामी, शत्रुघ्न सिन्हा और रमाकांत यादव ने पार्टी पर निशाना साधा है।

उपचुनाव के नतीजों पर शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर सुब्रमण्यम स्वामी तक ने कसा तंज, ये रहे हार जीत के 5 बड़े कारण
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उत्तर प्रदेश और बिहार उपचुनाव में बीजेपी की हार के बाद खुद पार्टी के अंदर विवाद शुरू हो गया है। जहां यूपी में बीजेपी लोकसभा सीट पर बड़ा झटका लगा वहीं बिहार में भी नतीजे पार्टी के पक्ष में नहीं दिखे।

चुनाव में हार के बाद सुब्रमण्यम स्वामी, शत्रुघ्न सिन्हा और रमाकांत यादव ने पार्टी पर निशाना साधा है। बीजेपी के पूर्व सांसद रमाकांत यादव और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने योगी आदित्यानाथ पर निशाना साधा है।

जबकि हर बार बीजेपी के खिलाफ बोलेने वाले अभिनेता और बीजेपी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पीएम मोदी पर फिर से निशाना साधा है। सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने मुख्यमंत्री योगी पर हमला करते हुए कहा जो नेता अपनी सीट पर जीत नहीं दिला सकते, उन्हें बड़े पद देना लोकतंत्र में आत्महत्या करने जैसा है।

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इसके अलावा पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने कहा कि पिछड़ों और दलितों की उपेक्षा के चलते इस चुनाव में बीजेपी को झटका लगा है। उन्होंने आगे कहा कि अगर पार्टी समय रहते सचेत नहीं हुई तो 2019 में भी बीजेपी को इस तरह की हार के लिए तैयार रहना होगा।

वहीं दूसरी तरफ अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने यूपी-बिहार उपचुनाव में हार मिलने पर ट्वीट किया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि यहां वास्तव में हमें सीट बेल्ट बांधने की आवश्यकता है।

उन्होंने एक ट्वीट में आगे लिखा कि लंदन से भारत लौटते समय जेट एयरवेज में जोरदार स्वागत हुआ। कितना सुरक्षित और आरामदायक सफर था। पर यहां भारत में यूपी-बिहार उपचुनाव के नतीजों को देखते हुए लगता है कि वास्तव में यहां हमें सीट बेल्ट बांधने की आवश्यकता है।

उपचुनाव में हार जीत के ये रहे 5 बड़ी कारण

1. उपचुनाव में हार को लेकर सबसे बड़ी बात गोरखपुर में हुई मासूम बच्चों की मौत के आक्रोश को बताया जा रहा है। जबकि ये दोनों ही गढ़ सूबे के मुख्या योगी के हैं।

2. अररिया में बीजेपी अध्यक्ष नित्यानंद राय के बयान को भी हार के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। प्रचार के अंतिम दिन कहा कि अररिया आईएसआई का अड्डा बन जायेगा और बीजेपी प्रत्याशी जीता तो ये राष्ट्रवादी शक्तियों का केंद्र होगा, काम नहीं कर पाया।

3. अररिया और जहनानाबद में आरजेडी की जीत के लिए तेजस्वी यादव के द्वारा प्रचार को सबसे ज्यादा पंसद किया गया। जिसने जनता पर सबसे ज्यादा असर किया। ख़ासकर विधान सभा सत्र के बीच उन्होंने कुछ विधायकों को सदन में रहने का जिम्मा दिया गया।

4. गोरखपुर सीट और फूलपुर सीट पर समाजवाटी पार्टी की साइकिल पर जनता ने खुला समर्थन किया है। इसके पीछे दो कारण हैं एक तो खुद सीएम योगी जो अब सूबे के नहीं रहे और दूसरा कारण सपा और बसपा के एक साथ आना भी इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है।

5. नीतीश कुमार और सुशील मोदी का हेलिकॉप्टर से चुनावी दौरा असर नहीं डाल सका। नीतीश और उनके सहयोगी दलो के प्रत्याशी को शराबबंदी, बालू की समस्या का ख़ामियाज़ा उठाना पड़ा। ख़ासकर दलित समुदाय के एक बड़े तबके में बहुत शराबबंदी के दौरान उनके लोगों की गिरफ्तारी से नाराज थे।

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