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कालाधन को सफेद करने वालों की खैर नहीं, एजेंसियों ने शुरू की जांच: शक्तिकांत दास

प्रवर्तन एजेंसियां ने आयकर विभाग के साथ समन्वय की रणनीति बनाई है।

कालाधन को सफेद करने वालों की खैर नहीं, एजेंसियों ने शुरू की जांच: शक्तिकांत दास
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार द्वारा कालेधन के खिलाफ मुहिम चलाने के लिए नोटबंदी के फैसले को अंजाम देने के बाद देशभर में कालेधन को सफेद करने के लिए बेसुमार संपत्ति रखने वाले तरह तरह के हथकंडे और धनशोधन गतिविधियों में लिप्त हैं। कालाधन रखने वाले ऐसे लोगों को केंद्र सरकार ने कड़ी चेतावनी देते हुए उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री जनधन खातों में आठ नवंबर के बाद जमा हुई बेहिसाब रकम कालेधन रखने वाले लोगों की अपने धन को सफेद करने की मंशा रही है, लेकिन ऐसे धनशोधन गतिविधियों में लिप्त धनकुबेर कानूनी शिकंजे से बच नहीं पाएंगे। ऐसे लोगों की तलाश में आयकर विभाग और प्रवर्तन एजेंसियों ने पता लगाने का काम शुरू कर दिया है और बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देने की प्रक्रिया की जांच भी तेज कर दी गई है। शुक्रवार को ही वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने साफतौर से चेतावनी दी है कि ऐसे जो भी लोग धनशोधन अथवा कालेधन को सफेद करने की गतिविधियों में लिप्त हैं उन्हें किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जाएगा। प्रवर्तन एजेंसियां इस तरह के धन के स्रोत तक पहुंच बनाने में तेजी से अभियान शुरू कर चुकी हैं, जिसमें आयकर विभाग के साथ भी समन्वय की रणनीति बनाई गई है।
जल्द आएंगे नतीजे
नोटबंदी के बाद कालेधन को सफेद करने वालों के खिलाफ शुरू की गई मुहिम के परिणाम सामने आने लगे हैं और जल्द ही ऐसे लोग बेनकाब होंगे, जिन पर कानूनी शिकंजा कसना तय है। मंत्रालय का कहना है कि लोगों को अपने कालेधन को सार्वजनिक करने के लिए सरकार ने गत 29 नवंबर को मनी बिल के रूप में लोकसभा में कराधान कानून (दूसरा संशोधन) विधेयक 2016 भी पारित किया है, जिसमें नोटबंदी के बाद बैंक खातों में जमा राशि पर कर लगाने का प्रावधान किया गया है। आयकर कानून में संशोधन में मौका दिये जाने के बावजूद देश में बहुसंख्यक लोग अपने दूसरे गैर कानूनी ढंग से अपने धन को ठिकाने लगाने में जुटे हुए हैं।
क्या है संशोधन प्रावधान
संसद के चालू शीतकालीन सत्र में नोटबंदी के बाद लगातार विपक्षी दलों के विरोध की वजह से संसद के चालू सत्र में कोई कामकाज नहीं हो पाया, लेकिन कराधान कानून (दूसरा संशोधन) विधेयक पारित होने का पहला ही विधायी कार्य हो पाया है। कराधान संशोधन कानून में नोटबंदी के बाद बैंक खातों में जमा अघोषित राशि पर 50 प्रतिशत की दर से कर, जुमार्ना और अधिभार लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ऐसा धन जिसकी जानकारी नहीं दी जाती है और आयकर तलाशी में उसे पकड़ा जाता है उस पर कर, जुमार्ना और अधिभार सहित 85 प्रतिशत तक कर वसूला जाएगा।
आयकर विभाग ने कसा शिकंजा
सूत्रों के अनुसार 8 नवम्बर से लेकर 30 नवम्बर तक देशभर में आयकर विभाग के निर्देशानुसार सभी सहकारी, कमर्शियल व सहिकारी कोआप्रेटिव बैंकों में जिन्होंने नए खाते खुलवाए हैं उन सभी की सूची व रिहायशी सबूत मांगे जा रहे हैं लिए हैं। इसके अतिरिक्त जो भी इन खातों में नोटबंदी के बाद लेन-देन हुआ है, उसकी सूचि भी मांगी जा रही है। आयकर विभाग इन खातों की जांच में यह पता लगा रहा है कि खाताधारक ने खाता जरूरत पर खुलवाया है या फिर इनमें अपना काला धन जमा किया जा रहा है अथवा नोट बदलवाने के लिए खोला है। इसलिए नए खुले जिन खातों में लेन-देन संदिग्ध होगा, तो आयकर विभाग का उस शिकंजा कसा जाना तय है।
एक्शन में आई संसदीय समिति
मोदी सरकार के नोटबंदी वाले फैसले को लेकर देशभर में गरमाई सियासत को देखते हुए संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति भी एक्शन मोड़ में नजर आ रही है। मसलन संसदीय समिति ने नोटबंदी के बाद देश के हालातों की समीक्षा के लिए आरबीआई गवर्नर और वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को तलब करने का फैसला किया है। संसद की वित्तीय मामलों की स्थायी समिति ने सरकार की नोटबंदी के बाद देश के हालात की समीक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर तथा वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी को तलब करने का फैसला किया। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली वित्त मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और वित्त मंत्रालय मं आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास को बुलाकर देश में नोटबंदी के कारण बने हालातों की समीक्षा और इससे निपटने के लिए इंतजामों की समीक्षा करने की तैयारी में है। बताया गया है कि समिति ने संबन्धित उच्च अधिकारियों को 15 दिसंबर तक समिति के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया है। समिति ने यह भी निर्णय लिया है यदि ये अधिकारी 15 दिसंबर तक नहीं आ पाए तो समिति के समक्ष उनकी उपस्थिति उनकी उपलब्धता पर निर्भर करती है। गौरतलब है कि गत आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 तथा 1,000 रुपये के नोटों को लीगल टेंडर से बाहर कर दिया था। इसके बाद पूरे देश में नकदी की भारी समस्या पैदा हो गई है।
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