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राष्ट्रपति चुनाव को जातीय रंग देना शर्मनाक: मीरा कुमार

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है।

राष्ट्रपति चुनाव को जातीय रंग देना शर्मनाक: मीरा कुमार
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कांग्रेस की अगुवाई में राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की साझा उम्मीदवार मीरा कुमार ने चुनाव को 'दलित बनाम दलित' का रंग दिए जाने को शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा, 'जब कोविंदजी और मैंने नामांकन भरा तो यह जाति का मामला बन गया।

यह शर्मनाक है कि राष्ट्रपति चुनाव दलित बनाम दलित में तब्दील हो चुका है।' मीरा कुमार ने कहा कि उन्हें 17 विपक्षी पार्टियों ने आम सहमति से राष्ट्रपति उम्मीदवार चुना। उन्होंने कहा कि विपक्ष की यह एकता वैचारिक बुनियाद पर है।

बता दें कि एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाए जाने के ऐलान के बाद कांग्रेस की अगुवाई में 17 विपक्षी पार्टियों ने पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को अपना साझा उम्मीदवार घोषित किया।

उम्मीदवारी के ऐलान के बाद कोविंद ने बिहार के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया। संयोग से दोनों नेता दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। मौजूदा राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है।

मैं फाइटर हूं, बलि का बकरा नहीं: मीरा

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार का कहना है कि वह देश के शीर्ष संवैधानिक पद के चुनाव में ‘बलि का बकरा’ नहीं हैं। वह एक विचारधारा के लिए यह चुनाव लड़ रही हैं।

इस संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में मीरा ने कहा, ‘जो भी किसी विचारधारा के लिए लड़ रहा है और अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनता है, वह बलि का बकरा नहीं है। मैं एक फाइटर हूं और मैं लड़ती रहूंगी। मुझे भरोसा है कि इस लड़ाई में कई लोग मुझसे जुड़ेंगे।’

दरअसल, केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेता रामदास अठावले ने शुक्रवार को कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए कहा था कि वह मीरा कुमार को 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में बलि के बकरे की तरह इस्तेमाल कर रही है।

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