Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

देश में 2 करोड़ ''बालिका वधु'', अब शारीरिक संबंध बनाना होगा अपराध

कोर्ट ने कहा कि बाल विवाह शादी नहीं, बल्कि मिराज यानी मृगतृष्णा है।

देश में 2 करोड़ बालिका वधु, अब शारीरिक संबंध बनाना होगा अपराध
X

सुप्रीम कोर्ट ने 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग की नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने को अपराध करार दिया है।

कोर्ट ने कहा ऐसे मामले में एक साल के भीतर अगर महिला शिकायत करने पर रेप का मामला दर्ज हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बलात्कार कानून मनमाना है। यह संविधान का उल्लंघन है।

बलात्कार के अपराध को परिभाषित करने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में एक अपवाद धारा है जो कहती है कि यदि पत्नी की आयु 15 वर्ष से कम नहीं है तो उसके साथ पति द्वारा यौन संबंध बनाया जाना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता।

जबकि अपनी सहमति देने की उम्र 18 वर्ष तय है। इधर, नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 से 29 साल की 46 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो गई थी। देश में इस वक्त 2.3 करोड़ 'बालिका वधु' हैं।

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि बलात्कार संबंधी कानून में अपवाद अन्य अधिनियमों के सिद्धांतों के प्रति विरोधाभासी है और यह बालिका के, अपने शरीर पर उसके खुद के संपूर्ण अधिकार और स्व निर्णय के अधिकार का उल्लंघन है।

न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने देश में बाल विवाह की परंपराओं पर भी चिंता जतायी। पीठ ने कहा कि संसद द्वारा सामाजिक न्याय का कानून जिस भावना से बनाया गया, उसे उसी रूप में लागू नहीं किया गया।

पीठ ने स्पष्ट किया कि वह वैवाहिक बलात्कार के मुद्दे का निपटारा नहीं कर रही है, क्योंकि संबंधित पक्षों में से किसी ने यह मामला उसके समक्ष नहीं उठाया है।

अलग और समवर्ती फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि सभी कानूनों में विवाह की आयु 18 वर्ष है और भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार संबंधी कानून में दी गयी छूट या अपवाद ‘एकपक्षीय, मनमाना है और बालिका के अधिकारों का उल्लंघन करता है।'

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि यह अपवाद संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है।

केंद्र और राज्य सरकारों को हिदायत

न्यायालय ने केंद्र और राज्यों की सरकारों से कहा कि बाल विवाह रोकने की दिशा में वह अग्रसक्रिय कदम उठाएं। पीठ ने अक्षय तृतीया के अवसर पर हजारों की संख्या में होने वाले बाल विवाह पर भी सवाल उठाया।

बाल विवाह मृगतृष्णा

इससे पहले बाल विवाह पर भी सुनवाई हुई थी, उसपर कोर्ट ने कहा था कि कानून में बाल विवाह अपराध है फिर भी लोग बाल विवाह करते हैं। कोर्ट ने कहा था कि बाल विवाह शादी नहीं, बल्कि मिराज यानी मृगतृष्णा है।

अब क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 375 के अपवाद को अंसवैधानिकद बताया है। अब पति 15 से 18 साल की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो रेप माना जाएगा।

कोर्ट ने कहा, ऐसे मामले में एक साल के भीतर अगर महिला शिकायत करने पर रेप का मामला दर्ज हो सकता है।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story