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सेनारी नरसंहार: 10 को फांसी, तीन को उम्रकैद की सजा

इस नरसंहार में 34 लोगों की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी।

सेनारी नरसंहार: 10 को फांसी, तीन को उम्रकैद की सजा
पटना. पटना के बहुचर्चित सेनारी नरसंहार केस में जहानाबाद जिला कोर्ट ने 15 दोषियों में से 10 को मौत की सजा सुनाई है और इसके साथ ही तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है। दो दोषी अभी भी फरार हैं। इससे पहले कोर्ट ने 20 दोषियों को बरी कर दिया था। 70 आरोपियों में से 4 की मौत सुनवाई के दौरान हो चुकी है। सेनारी नरसंहार के मामले में जहानाबाद के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार सिंह की कोर्ट ने बीते 27 अक्टूबर को सुनवाई करते हुए 15 आरोपियों को तथा बाद में फिर एक अन्य को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने 23 आरोपियों को रिहा कर दिया था। आज उनकी सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई।
गर्दन रेत कर गड्ढे में फेंकी लाश
कोर्ट ने 13 दोषियों को सजा सुना दी, जबकि शेष दो फरार दोषियों को फरार रहने के कारण उन्हें सजा नहीं दी जा सकी। एक अन्य दोषी को कोर्ट 18 नवंबर को सजा सुनाएगी। कोर्ट ने बच्चेष सिंह, बुद्दन यादव, बुटाई यादव, सत्येन्द्र दास, ललन पासी, द्वारिका पासवान, करीबन पासवान, गोड़ाई पासवान, उमा पासवान व गोपाल पासवान को फांसी की सजा दी। विदित हो कि 18 मार्च 1999 की रात सेनारी में 34 लोगों के हाथ-पांव बांधकर उनके गला रेत दिए गए थे। इस खौफनाक हादसे के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया था कि हमलावरों ने उसे मरा समझकर गड्ढे में फेंक दिया था। वे एक-एक कर लोगों की गर्दन रेत कर गड्ढे में लाशों को फेंकते जा रहे थे।
34 लोगों की गला रेत कर हत्या
दोषियों को सजा के एलान के बाद सेनारी गांव पर प्रतिक्रिया में फिर कोई वारदात न हो जाए, इसके लिए पुलिस पहले से सतर्क है। गांव की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। आपको बता दें, 18 मार्च, 1999 की रात जहानाबाद जिले के सेनारी गांव में एक खास अगड़ी जाति के 34 लोगों की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। उस समय इस नरसंहार में प्रतिबंधित संगठन माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) को शामिल माना गया था। घटना के बारे में बताया जाता है कि एमसीसी के सैकड़ों लोगों ने 18 मार्च 1999 की रात सेनारी गांव की घेराबंदी की थी। फिर चुन-चुन कर एक जाति विशेष के पुरुषों को घरों से निकालकर गांव के ही ठाकुरबाड़ी मंदिर के पास लाया गया. इसके बाद रात साढ़े सात से दस बजे के बीच नरसंहार को अंजाम दिया गया।
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