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वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का दिमाग छोड़कर नहीं काम करता था शरीर का कोई भी अंग, ये थी वजह

1974 में ब्लैक हॉल्स पर असाधारण रिसर्च करके उसकी थ्योरी मोड़ देने वाले महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 76 साल की उम्र में निधन हो गया।

वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का दिमाग छोड़कर नहीं काम करता था शरीर का कोई भी अंग, ये थी वजह

1974 में ब्लैक हॉल्स पर असाधारण रिसर्च करके उसकी थ्योरी मोड़ देने वाले महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 76 साल की उम्र में निधन हो गया। हॉकिंग आधुनिक विज्ञान की दुनिया में अपने ज्ञान और शोध की वजह से एक अलग पहचान रखते थे।

हॉकिंग के जीवन से जुड़ी कुछ बातें

  • हॉकिंग अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद भी आज विश्व के सबसे बड़े वैज्ञानिक थे।

  • हॉकिंग को एमयोट्रॉफिक लैटरल सेलेरोसिस (amyotrophic lateral sclerosis) नाम की बीमारी थी। इस बीमारी के कारण व्यक्ति का नर्वस सिस्टम धीरे-धीरे खत्म हो जाता है और शरीर में मूवमेंट करने और कम्यूनिकेशन पावर खत्म हो जाती है।

  • हॉकिंग के दिमाग को छोड़कर उनके शरीर का कोई भी हिस्सा काम नहीं करता था।

  • हॉकिंग के मुताबिक, उनकी बीमारी ने ही उन्हें साइंटिस्ट बनाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की थी। बीमारी से पहले हॉकिंग बिल्कुल भी अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते थे लेकिन बीमारी के दौरान उन्हें लगने लगा कि वे अब जिंदा नहीं रहेंगे जिसके बाद उन्होंने अपना सारा ध्यान शोध कार्य पर लगा दिया।

  • वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने 1974 में ब्लैक हॉल्स पर रिसर्च किया था।

  • साल 1974 में ब्लैक हॉल्स पर असाधारण रिसर्च करके उसकी थ्योरी मोड़ देने की वजह से ही वह साइंस की दुनिया के ज्ञाता बन गए थे।

  • हॉकिंग ने अपने शोध के जरिए कहा था कि ये दुनिया ईश्वर ने नहीं रची है बल्कि यह तो भौतिक विज्ञान के नियमों का नतीजा है।

  • हॉकिंग ने अपनी किताब 'ग्रांड डिजाइन' में कहा था कि गुरुत्वाकर्षण जैसे कई नियम हैं और ब्राह्मांड कुछ नहीं से भी खुद को बना सकता है। क्योंकि ब्रह्मांड एक स्फूर्त सृजन का नतीजा है।

  • हॉकिंग ने अपने शोध के अनिसार यह अनुमान लगाया था कि ग्लोबल वार्मिंग और नए वायरसों के कारण संपूर्ण मानवता नष्ट हो सकती है।

  • गौरतलब है कि ब्रिटेन के स्टीफन हॉकिंग की पीएचडी थीसिस को लाखों बार देखा गया है।
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