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CJI के खिलाफ कांग्रेस का महाभियोग नोटिस खारिज करने के मामले में हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी की अगुवाई वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच याचिका पर सुनवाई हो गई है।

CJI के खिलाफ कांग्रेस का महाभियोग नोटिस खारिज करने के मामले में हुई सुनवाई
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी की अगुवाई वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच याचिका पर सुनवाई हो गई है। कोर्ट ने कांग्रेस सांसदों की याचिका को खारिज कर दिया है।

बीते सोमवार को इस मामले को कोर्ट नंबर 2 में जस्टिस जे. चेलमेश्वर की अदालत में कपिल सिब्बल ने मामला उठाया था। जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा था कि वह मंगलवार को देखेंगे।

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हालांकि देर शाम सुप्रीम कोर्ट की लिस्ट जारी हुई और उसके मुताबिक मामले की सुनवाई जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एके गोयल की बेंच करेगी।

राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा और अमी याज्ञनिक ने चीफ जस्टिस पर महाभियोग प्रस्ताव की मंजूरी के लिए जस्टिस जे. चेलमेश्वर की अदालत में याचिका दाखिल की थी।

इनकी मांग है कि तीन सदस्यों की कमिटी गठित कर चीफ जस्टिस के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच होनी चाहिए। इस पर जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि मामला सुना जाए या नहीं, इस पर कोर्ट मंगलवार को विचार करेगा।

आपको बता दें कि चीफ जस्टिस के खिलाफ रोस्टर मामले में जस्टिस चेलमेश्वर समेत 4 सीनियर मोस्ट जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था।

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तुरंत सुनवाई चाहते थे कांग्रेसी

इस मामले में दो सांसदों प्रताप सिंह बाजवा और एक अन्य की ओर से पेश वकील सिब्बल ने जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस एसके कौल की बेंच के सामने मामला उठाया और मामले की तुरंत सुनवाई के लिए मामले को लिस्ट करने की गुहार लगाई।

तब सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक बेंच के फैसले का हवाला देकर कहा कि चीफ जस्टिस मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं, ऐसे में मामले को चीफ जस्टिस के सामने उठाएं।

सिब्बल ने रखा तर्क

इस पर सिब्बल ने कहा कि मास्टर ऑफ रोस्टर से संबंधित जो फैसला है वह उनकी जानकारी में है लेकिन महाभियोग प्रस्ताव चीफ जस्टिस के खिलाफ है ऐसे में चीफ जस्टिस के सामने मामले को नहीं उठाया जा सकता इसलिए दूसरे सबसे सीनियर जस्टिस की बेंच में मामला उठाया गया है।

सिब्बल ने कहा कि अपने ही खिलाफ मुकदमे की सुनवाई वही जज नहीं कर सकते जिनके खिलाफ आरोप हैं। सिब्बल ने कहा कि 45 साल से वकालत के पेशे में हैं। इस मामले में चीफ जस्टिस से रजिस्ट्रार निर्देश नहीं ले सकते। याचिका पर कब सुनवाई होगी इसे देखने की जरूरत है।

प्रशांत भूषण ने क्या कहा?

केस में दूसरे वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि चीफ जस्टिस खुद आदेश पारित नहीं कर सकते, ऐसे में दूसरे सबसे सीनियर जज लिस्ट करने का आदेश दे सकते हैं।

चूंकि मामला चीफ जस्टिस से जुड़ा है ऐसे में चीफ जस्टिस खुद मामले को सुन भी नहीं सकते और यहां तक कि वह रजिस्ट्रार को मामला लिस्ट करने के लिए भी नहीं कह सकते।

अभी मामले को नंबर भी नहीं मिला है ऐसे में वकील को इंतजार करना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि इस मामले में जूडिशल आदेश पारित करना चाहिए क्योंकि एडमिनिस्ट्रेटिव आदेश नहीं हो सकता।

नायडू के फैसले के खिलाफ तर्क?

23 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति ने चीफ जस्टिस के खिलाफ दाखिल महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया था इस कांग्रेसी नेताओं का तर्क था कि राज्यसभा के सभापति और लोकसभा के स्पीकर को क्वासी जूडिशल अधिकार नहीं हैं।

अनुच्छेद-124 में उन्हें ये अधिकार नहीं है कि वह प्रस्ताव को खारिज कर दें। अगर सांसदों ने दस्तखत करके महाभियोग प्रस्ताव दिया है तो फिर सभापति या स्पीकर को तीन सदस्यों की कमिटी बनाकर उसे जांच के लिए भेजना चाहिए।

जज एन्क्वॉयरी एक्ट की धारा 3 के तहत जब भी गलत व्यवहार और अक्षमता का आरोप लगता है तो जांच की व्यवस्था है, सभापति और स्पीकर ऐक्ट के तहत सिर्फ जांच कमिटी का गठन कर सकते हैं।

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