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नोटबंदी पर दखल देने से SC का इनकार, लेकिन मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को हालात सुधारने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं।

नोटबंदी पर दखल देने से SC का इनकार, लेकिन मांगा जवाब
नई दिल्ली. पीएम मोदी के 500 रुपए और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद करने के फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के नोटबंदी के फैसले पर दखल देने से इनकार किया है। कोर्ट ने कहा है कि आम आदमी को परेशानी न हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने सरकार को हालात सुधारने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, कोर्ट ने सरकार के नोटबंदी के फैसले को खारिज करने की मांग वाली याचिका ठुकरा दी।
कोर्ट में कपिल सिब्बल हुए पेश
सरकार के इस फैसले को वापस लिए जाने की मांग वाली याचिका दायर करने वाले की तरफ से कोर्ट में कपिल सिब्बल पेश हुए। सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने इस मांग का पुरजोर विरोध किया। कोर्ट ने सरकार के फैसले में दखल देने से तो इनकार कर दिया, लेकिन लोगों को परेशानी से बचाने के लिए किए जाने वाले उपायों के बारे में सरकार से जानकारी मांगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, 'लोगों को हो रही असुविधा के मद्देनजर आप और कौन से नए कदम उठाने के बारे में सोच रहे हैं?' सीजेआइ टीएस ठाकुर ने कहा कि केंद्र इस मामले में क्या कदम उठा रहा है, जिससे लोगों को परेशानी न हो। इस पर केंद्र सरकार कोर्ट में हलफनामा दाखिल करे। केंद्र को 25 नवंबर तक जवाब देना है। कोर्ट ने इस मुद्दे की अगली सुनवाई 25 नवंबर तक के लिए टाल दी है। कोर्ट ने साथ ही केंद्र से पूछा है कि आप विड्रॉल की लिमिट क्यों नहीं बढ़ाते। आम राय है कि इससे आम लोगों को दिक्कत हो रही है।
सीजेआइ ने कहा कि जो लोग रुपया रखे हुए हैं उन्हें जमा करना होगा, वरना ये पैसा गया। इसे सर्जिकल स्ट्राइक कहो या बमबारी, लेकिन ये कॉलेट्रल डैमेज है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि हम सरकार की इकॉनोमी पोलिसी में दखल नहीं देंगे।
केंद्र सरकार की ओर से एजी ने कहा कि कालाधन, जाली नोट, आतंकवाद और ड्रग्स मामलों के लिए यह नोटबंदी जरूरी है। 14 नवंबर तक 3.25 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। 30 दिसंबर तक का वक्त दिया है।
नोटबंदी के खिलाफ चार पिटीशंस
नरेन्द्र मोदी सरकार के आठ नवंबर के फैसले के खिलाफ कुल चार पिटिशंस दायर की गई हैं। चीफ जस्टिस ठाकुर और जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच इन पर सुनवाई कर रही है। सरकार ने आठ नवंबर की आधी रात से 500 और 1,000 रुपए के नोट को बैन कर दिया था। इनकी जगह पर 500 और 2,000 रुपए का नया नोट जारी किया गया है। सरकार के फैसले के खिलाफ दायर चार पिटिशंस में दो दिल्ली के वकील विवेक नारायण शर्मा और संगम लाल पांडे ने दायर की हैं जबकि बाकी दो एस. मुथुकुमार और आदिल अल्वी ने दायर की हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर इन याचिकाओं में कहा गया है कि सरकार के इस फैसले से नागरिकों के जीवन और बिजनसे करने के साथ ही कई दूसरे अधिकारों में बाधा पैदा हुई है।
क्या कहना है पिटिशनर्स का?
पिटिशनर्स का आरोप है कि सरकार के अचानक लिए गए इस फैसले से चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई और लोगों को काफी परेशानी हुई है। ऐसे में आर्थिक मामलों के विभाग की इस नोटिफिकेशन को या तो खारिज कर दिया जाना चाहिए या कुछ समय के लिए इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। केन्द्र सरकार की तरफ से कोर्ट में कैविएट दाखिल की गई। इसमें कहा गया है कि अगर बेंच नोट पर पाबंदी को चुनौती देने वाली किसी पिटिशन पर सुनवाई करती है या कोई ऑर्डर जारी करती हैं तो उससे पहले केन्द्र का पक्ष भी सुना जाना चाहिए।
सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक
ताजा हालात और विपक्ष के हमलावर होते रवैये के मद्देनजर केंद्र सरकार ने मंगलवार शाम एक सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसका मकसद पार्टियों को यह समझाना है कि किन परिस्थितियों में यह फैसला लिया गया? सरकार यह भी बताएगी कि आम लोगों को परेशानी से बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को राष्ट्र के नाम संदेश देते हुए 500-1000 रुपए के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी। पीएम की घोषणा के बाद एक वकील ने जनहित याचिका दायर कर मोदी सरकार के फैसले पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी।
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