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कातिल ड्राइवरों को मिलने वाली दो साल की सजा बेहद कम

मुकुल रोहतगी का कहना है कि 304A को संशोधित करने की जरूरत है।

कातिल ड्राइवरों को मिलने वाली दो साल की सजा बेहद कम
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सड़को पर लापरवाही से गाड़ी चलाने वालों के लिए दो साल की सजा को नाकाफी माना है। कोर्ट का कहना है कि इस लापरवाही की वजह से रोजाना 400 लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में होती है। जस्टिस दीपक मिश्रा और सी नागप्पन की पीठ ने वाहन चालकों के लिए आइपीसी की धारा 304A को और कठोर बनाने को कहा।

304A को और कठोर बनाने की जरुरत
इंडिया टाइम्स की खबर के मुताबिक, बता दें कि कोर्ट ने लापरवाही से गाड़ी चलाने वालो के खिलाफ कठोर दंड की बात कही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून निर्माताओं को आइपीसी की धारा 304A को संशोधित करने की जरुरत है। कोर्ट ने यह भी माना कि वाहन चालकों में गाड़ी चलाने को लेकर एक बैपरवाह रवैया पैदा होता जा रहा है।

पिछले साल हुई 30 हजार लोगों की मौत

पिछले एक साल में लापरवाही से गाड़ी चलाने के चलते 30 हजार लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। बता दें कि धारा 304 A के तहत जो कोई भी व्यक्ति लापरवाही से गाड़ी चलाने की वजह से मरता है तो इस एक्ट को गैर इरादातन नहीं माना जाए बल्कि इस मामले में वाहन चालक को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया जाए। अटॉरनी जनरल मुकुल रोहतगी ने केंद्र के मौजूद कानून को लचीला कहते हुए इसे और कठोर बनाने की हिदायत दी है।

केंद सरकार ने नहीं लिया कोई एक्शन
मुकुल रोहतगी का कहना है कि 304A को संशोधित करने की जरुरत है। वहीं पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिन्दर सिंह से कहा है कि केंद्र को 304A पर दोबारा गौर करने की जरुरत है लेकिन सरकार ने इस ओर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। वहीं सिंह ने पीठ को विश्वास देते हुए कहा कि अगली सुनवाई में कोर्ट को इस मामले में केंद्र के विचारों से अवगत कराया जाएगा।
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