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सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में 88 लौह अयस्क खान के पट्टों के नवीकरण को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में 2015 में 88 लौह अयस्क खानों के पट्टों के दूसरी बार नवीकरण को आज रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में 88 लौह अयस्क खान के पट्टों के नवीकरण को रद्द किया
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उच्चतम न्यायालय ने गोवा में 2015 में 88 लौह अयस्क खानों के पट्टों के दूसरी बार नवीकरण को आज रद्द कर दिया। न्यायालय ने कहा कि वाणिज्यिक गतिविधियों के पीछे इन कंपनियों का एकमात्र मकसद अधिकतम लाभ कमाना था और इससे कोई सामाजिक उद्देश्य नहीं जुड़ा था।

शीर्ष अदालत ने कंपनियों के पट्टों के नवीकरण को अवैध करार दिया। न्यायालय ने कहा कि यह कदम शीर्ष अदालत के पूर्व के फैसलों और आदेशों के खिलाफ था जिसमें 2014 में कहा गया था कि राज्य सरकार नया खनन पट्टा देगी और दूसरी बार पट्टे का नवीकरण नहीं करेगी।

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न्यायालय ने केंद्र और गोवा सरकार को निर्देश दिया कि वे नये सिरे से उन्हें पर्यावरण अनुमति दें और राज्य से कहा कि वह खान एवं खनिज :विकास एवं नियमन: अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के अनुसार नये सिरे से खनन पट्टा देने के लिये जरूरी कदम उठाये।

न्यायालय ने कहा कि वह खनन का पट्टा रखने वालों को 15 मार्च तक का समय दे रहा है ताकि वे अपने मामलों का प्रबंधन कर सकें। पिछले निर्देशों का उल्लंघन करते हुए इन खनन पट्टाधारकों के पट्टे का दूसरी बार नवीकरण किया गया था।

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, उन्हें निर्देश दिया जाता है कि वे 16 मार्च 2018 से खनन से संबंधित सारी गतिविधियां बंद कर दें जब तक कि नया खनन पट्टा ( नये सिरे से नवीकरण अथवा अन्य नवीकरण नहीं) नहीं दे दिया जाता और नयी पर्यावरण अनुमति नहीं दे दी जाती।'

न्यायालय ने राज्य सरकार से खनन पट्टा धारकों को जारी कारण बताओ नोटिस के मद्देनजर उनसे बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया तेज करने के लिये जरूरी कदम उठाने को कहा। साथ ही खनन कंपनियों से धन वसूल करने के लिये एसआईटी और चार्टर्ड एकाउन्टेंट की एक टीम का गठन करने का भी शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने 101 पन्नों के फैसले में कहा कि राज्य सरकार की कानून के अनुसार खनन का नया पट्टा देने की जिम्मेदारी है।

पीठ ने कहा कि राज्य ने सभी प्रासंगिक सामग्रियों पर विचार किये बिना और उपलब्ध प्रासंगिक सामग्री की अनदेखी करके ‘अनावश्यक जल्दबाजी' में खनन पट्टों का दूसरी बार नवीकरण किया और यह खनिज विकास के हित में नहीं था।

पीठ ने कहा कि यह फैसला सिर्फ राज्य के राजस्व को बढ़ाने के लिये किया गया और खान एवं खनिज :विकास एवं नियमन: अधिनियम की धारा 8 :3: के दायरे से बाहर है।

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पीठ ने कहा, ‘‘खनन पट्टों का गोवा सरकार द्वारा दूसरी बार नवीकरण निरस्त किये जाने लायक है और उसे रद्द किया जाता है।'

न्यायालय का फैसला एनजीओ गोवा फाउन्डेशन की याचिका पर आया। उसने गोवा सरकार के 88 खनन पट्टों के नवीकरण के 2015 के आदेश को चुनौती दी थी।

न्यायालय ने गोवा सरकार को खनन पट्टों के दूसरी बार नवीकरण की अनुमति देने वाले बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को भी निरस्त कर दिया।

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