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नोटबंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछे 9 सवाल

नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।

नोटबंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछे 9 सवाल
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नई दिल्ली. आज से ठीक एक महीने पहले केंद्र सरकार द्वारा 8 नवंबर को नोटबंदी का फैसला लागू करने के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। सरकार के फैसले के बाद जहां एक तरफ लोगों की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है तो वहीं दूसरी तरफ इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से कई सवाल पूछते हुए उनसे स्थिति साफ करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी पक्ष रख रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से कहा कि वह ये बताएं कि जिला सहकारी बैंक में बंद हो चुके नोटों को जमा कराने की अनुमति है...?
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पूछा क्या सरकारी अस्पतालों में बंद हो चुके नोटों को स्वीकार करने की तारीख बढ़ाने के बारे में आपने क्या प्लानिंग की है...?
आज सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से नोटबंदी के फैसले को लागू करने को लेकर सवाल करते हुए पूछा है कि क्‍या जब आप विमुद्रीकरण को लेकर पॉलिसी तैयार कर रहे थे तो क्‍या गोपनीय था?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल करते हुए कहा है कि आपने एक हफ्ते में बैंक खातें से 24000 रुपए निकालने का नियम क्‍यों बनाया, जब उस नियम को पूरा ही नहीं किया जा रहा है..?
वहीं पिछली सुनवाई में CJI टीएस ठाकुर ने कहा कि केंद्र इस मामले में क्या कदम उठा रहा है, जिससे लोगों को परेशानी न हो...?
कोर्ट ने साथ ही केंद्र से पूछा है कि आप विड्रॉल की लिमिट क्यों नहीं बढ़ाते...? आम राय है कि इससे आम लोगों को दिक्कत हो रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि नोटबंदी से संबंधित को-ऑपरेटिव बैंको को जो समस्याएं पेश आ रही हैं उन्हें कम करने के लिए क्या कदम उठाये हैं..?
आपको बता दें, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस नोटबंदी पर चल रही सुनवाई को 14 दिसंबर तक के लिए टाल दिया है। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने नोटबंदी के फैसले को लागू के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि लोगों की दिक्‍कतों को कम करने के लिए सारे जरूरी कदम उठाएं जा रहे हैं। इस पर वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के तीनों जजों को बताया कि एटीएम में पैसें नहीं हैं। एटीएम के रिकेलिब्रेशन के काम को ठीक से नहीं किया गया है। को-ऑपरेटिव बैंकों के साथ भेदभाव किया गया।
आपको बता दें कि देश भर में इस फैसले को लागू करने के बाद सारे बैंक कैश की कमी से जूझ रहे हैं। बैंकों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैं। पर लोगों को कैश नहीं मिल पा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सरकार का पूरा जोर कैशलेस इकॉनमी की तरफ है और वो लोगों को अधिक से अधिक डिजिटल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट का सहारा लेने के लिए कह रही है। सरकार ने गुरुवार को डिजिटल माध्यमों से खरीददारी करने पर कई प्रकार की रियायतों की घोषणा की। इनमें पेट्रोल-डीजल खरीदने पर 0.75 प्रतिशत की छूट मिलेगी। उन्होंने बताया कि रोजाना करीब साढ़े चार करोड़ लोग डीजल-पेट्रोल की खरीद करते हैं। पेट्रोल पंपों पर डिजिटल माध्यम से भुगतान 20 प्रतिशत से बढ़कर नोटबंदी के बाद 40 प्रतिशत हो गया है।
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