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सावित्रीबाई फुले जयंती: सावित्रीबाई फुले की जीवनी

भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) की आज 188वीं जयंती है। सावित्रीबाई फुले ने समाज महिलाओं के अधिकार के अलावा कन्या शिशु हत्याओं को रोकने के अभियान चलाया और उन्होंने नवजात कन्या शिशु के लिए आश्रम तक खोला था।

सावित्रीबाई फुले जयंती: सावित्रीबाई फुले की जीवनी

Savitribai Phule Jayanti / Savitribai Phule Biography

भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) की आज 188वीं जयंती (Savitribai Phule Jayanti) है। सावित्रीबाई फुले ने समाज महिलाओं के अधिकार के अलावा कन्या शिशु हत्याओं को रोकने के अभियान चलाया और उन्होंने नवजात कन्या शिशु के लिए आश्रम तक खोला था। इतना ही नहीं उन्होंने शिक्षा ग्रहण करके ना सिर्फ समाज की कुरीतियों को हराया, बल्कि देश की लड़कियों के लिए शिक्षा के दरवाजे खोलना भी कार्य किया था। सावित्रीबाई फुले लड़कियों को शिक्षा दिलाने के लिए समाज की परवाह न किए बगैर अपने संघर्ष में लगी रहीं और सफलता को हासिल किया। सावित्रीबाई फुले ने आज तकरीबन 150 वर्ष पहले महिलाओं को भी पुरुषों की तरह ही सामान अधिकार दिलाने की बात की थी। देश के कई जगाहों पर सावित्रीबाई फुले की 188वीं जयंती पर कार्यक्रम किए जा रहा हैं। चलिए जानते हैं उनकी जयंती के मौके पर उनके जीवन से जुड़ी बातें..

सावित्रीबाई फुले की जीवनी (Savitribai Phule Biography)

देश की पहली महिला शिक्षिका और समाजिक कार्यकर्ता सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी, 1831 महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव गांव में हुआ था। सावित्रीबाई फुले के पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था।

सावित्रीबाई फुले भारत (India) की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं। उन्होंने शिक्षा ग्रहण करके ना सिर्फ समाज की कुरीतियों को हराया, बल्कि देश की लड़कियों के लिए शिक्षा के दरवाजे खोलना भी कार्य किया था। सावित्रीबाई फुले के पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले समाजित कार्यकर्ता थे।

इन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर 19वीं सदी में लड़कियों (स्त्रियों) के अधिकारों, शिक्षा छुआछूत, सतीप्रथा, बाल-विवाह तथा विधवा-विवाह जैसी कुरीतियां और समाज में फैले अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष किया था।

सावित्रीबाई फुले देश भारत के पहले कन्या विद्यालय में पहली महिला शिक्षिका (Teacher) यानी अध्यापक थीं। सावित्रीबाई फुले ने साल 1852 में अछूत बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की भी स्थापना की थी।

सावित्रीबाई फुले की शादी (Savitribai Phule Wedding)

सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी, 1831 महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव गांव में हुआ था। सावित्रीबाई फुले का विवाह (शादी) केवल नौ साल की उम्र यानी 1840 में ज्योतिराव गोविंदराव फुले (ज्योतिबा फुले) से हो गई थी।

जिस समय सावित्रीबाई फुले का विवाह हुआ था उस समय उनकी कोई स्कूली शिक्षा नहीं हुई थी। सावित्रीबाई फुले पढ़ने की बहुत इच्छुक थी लेकिन उनके माता और पिता ने साथ नहीं दिया।

सावित्रीबाई फुले की शिक्षा (Savitribai Phule Education)

जिस समय सावित्रीबाई फुले का विवाह हुआ उस समय उनकी कोई स्कूली शिक्षा नहीं हुई थी। लेकिन शादी के बाद समय मिलने पर उनके पति ज्योतिबा फुले उन्हें पढ़ाया करते थे।

जब सावित्रीबाई फुले के पिता को यह मालूम हुआ कि सावित्रीबाई के पति उसे पढ़ाते हैं तो उन्होंने रूढ़िवादीता और समाज के डर से ज्योतिबा फुले को घर से निकाल दिया।

इसके बाबजूद उनके पति ने उन्हें पढ़ाना जारी रखा। इसके बाद ज्योतिबा फुले ने सावित्रीबाई फुले का एडमिशन एक प्रशिक्षण विद्यालय में कराया। लेकिन समाज के विराध का सामने करते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।

सावित्रीबाई फुले ने की बालिका विद्यालय की स्थापना (Savitribai Phule School)

सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा ग्रहण करने के बाद अन्य महिलाओं शिक्षित करने करने के लिए प्रयास में जुट गई। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए अपने पति के साथ मिलकर साल 1848 में पुणे में बालिका विद्यालय की स्थापना की थी। इस विद्यालय में उस समय केवल नौ लड़कियों ने एडमिशन लिया था और सावित्रीबाई फुले इस स्कूल की प्रधानाध्यापिका बनीं थी।

सावित्रीबाई फुले पर प्रकाशित साहित्य (Savitribai Phule Literature)

* क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले (लेखिका : शैलजा मोलक)

* क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले (लेखक : नागेश सुरवसे)

* 'व्हय मी सावित्रीबाई फुले' हे नाटक (एकपात्री प्रयोगकर्ती आद्य अभिनेत्री : सुषमा देशपांडे) (अन्य सादरकर्त्या - डॉ. वैशाली झगडे)

* साध्वी सावित्रीबाई फुले (लेखिका : फुलवंता झोडगे)

* सावित्रीबाई फुले (लेखक : अभय सदावर्ते)

* क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले (विद्याविकास) (लेखक : ज्ञानेश्वर धानोरकर)

* त्या होत्या म्हणून (लेखिका : डॉ. विजया वाड)

* सावित्रीबाई फुले (लेखिका : प्रतिमा इंगोले )

* सावित्रीबाई फुले (लेखक : जी.ए. उगले)

* सावित्रीबाई फुले (लेखिका : मंगला गोखले)

* क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले (लेखक : ना.ग. पवार)

* सावित्रीबाई फुले (लेखिका : निशा डंके)

* सावित्रीबाई फुले : अष्टपैलू व्यक्तिमत्त्व (लेखक : ना.ग. पवार)

* 'हाँ मैं सावित्रीबाई फुले' (हिंदी), (प्रकाशक : अझिम प्रेमजी विद्यापीठ)

* ज्ञान ज्योती माई सावित्री फुले (लेखिका : विजया इंगोले)

* सावित्रीबाई फुले (लेखक : डी.बी. पाटील )

* सावित्रीबाई फुले - श्रध्दा (लेखक : मोहम्मद शाकीर)

* ज्ञानज्योती सावित्रीबाई फुले (लेखिका उषा पोळ-खंदारे)

* Savitribai - Journey of a Trailblazer (Publisher : Azim Premji University)

* Shayera - Savitri Bai Phule (in urdu)Author Dr. Nasreen Ramzan Sayyed)

सावित्रीबाई फुले का निधन (Savitribai Phule Death)

सावित्रीबाई फुले का 10 मार्च, 1897 को प्लेग के कारण निधन हो गया था। सावित्रीबाई फुले प्लेग महामारी में प्लेग के मरीजो की सेवा करती थीं इसी दौरान छूत से प्रभावित बच्चे की सेवा करने के कारण इनको भी छूत लग गया था। जिस कारण उनका निधन हो गया।

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