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कुपोषण से हुई मौतों पर बोले मंत्री, मर गए तो मर गए

आदिवासी क्षेत्र में अब तक करीब 600 से ज्यादा लोग कुपोषण और भूख के कारण मर गए हैं।

कुपोषण से हुई मौतों पर बोले मंत्री, मर गए तो मर गए
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महाराष्ट्र. पलघर में कुपोषण से होने वाली मौतों पर जनजातीय विकास मंत्री विष्णु सवारा ने बड़ा ही अमानवीय बयान दिया है। आदिवासी मंत्री ने भूख से मरे इन लोगों को लेकर एक तल्ख़ टिपण्णी करते हुए कहा कि 'मर गए तो मर गए अब क्या करें।'
जनजातीय विकास मंत्री विष्णु सवारा के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणनवीस पर उनकी बख्रास्तगी को लेकर दबाब बनाया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में कुपोषण से करीब सैकड़ों आदिवासी बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना पर मंत्री से सवाल पूछे जाने पर आदिवासी मंत्री भड़क गए और बोले कि, 'अब मर गए तो क्या करें, जो आगे हैं उनके बारे में बात की जाए, मैं इस बारे में मुख्यमंत्री जी से बात करूंगा बस। '
सवारा ने अपना यह बयान उस समय दिया है जब वह गुरुवार को कलंबावडी गांव में एक दौरे पर गए थे जहां बीते दिनों एक साल के एक बच्चे सागर वाघ की कुपोषण से मौत हो गई थी। बता दें कि आदिवासी लोगों ने मंत्री के मामले की इतनी देर से सुध लेने पर नाराज थे। तो वहीं श्रमजीवी संघटन के कार्यकर्ताओं ने मंत्री के इतनी देर से की गई यात्रा का दृढ़ता से विरोध किया था। जबकि संगठन ने पालघर में कुपोषण के कारण हुई 600 बच्चों की मौतों के बारे में बहुत पहले ही सूचित कर दिया था।
30 अगस्त को सागर के निधन के बाद पलघर में तीन और लोगों की मौत दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि आदिवासी क्षेत्र में अब तक करीब 600 से ज्यादा लोग कुपोषण और भूख के कारण मर गए हैं ,जिस पर जनजातीय विकास मंत्री का यह बयान काफी चौंकाने वाला है। मंत्री के इस बयान की चौतरफा निंदा की जा रही है। वहीं लोगों सवारा के इस बयान को अमानवीय बताते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मंत्री की बर्खास्तगी की मांग करने लगे हैं।
हालांकि मंत्री अपने बयान से पलट गएं हैं। शुक्रवार को सफाई पेश करते हुए टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कहा कि, "मैं जन्म का आदिवासी हूं, मैं उनकी शिकायतों के बारे में पता कर रहा हूं। मैंने ऐसा कुछ नहीं कि उन्हें मरने दो, मेरे बयान का गलत मतलब निकाला गया है।'
विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल, राज्य के राकांपा अध्यक्ष सुनील तटकरे और श्रमजीवी संघठन के संस्थापक विवेक पंडित ने सवारा की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है। उन्होंने कहा है कि, "अगर मुख्यमंत्री संवेदनशील है तो उन्हें सवारा को तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए। विखे पाटिल ने कहा कि, "पालघर सवारा के अंतर्गत आता है। 1990 के बाद से वह विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं लेकिन कुपोषण से निपटने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। चूंकि फडणवीस सरकार कुपोषण को रोकने में नाकाम रही है।"
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