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दुश्मनों की अब खैर नहीं, सीमा पर सैटेलाइट द्वारा निगरानी

आतंकियों के साथ ही पाक व चीन के सैनिकों के गतिविधियों की मिलेगी जानकारी।

दुश्मनों की अब खैर नहीं, सीमा पर सैटेलाइट द्वारा निगरानी
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देश की सीमाओं पर हाल के सालों में बढ़ते तनाव के मद्देनजर सरकार अब बॉर्डर सिक्यॉरिटी फोर्स (बीएसएफ), इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को अलग-अलग पूरी तरह समर्पित सैटेलाइट बैंडविथ की व्यवस्था देने पर विचार कर रही है।

2016 में पाकिस्तान से आए आतंकवादियों का उड़ी के आर्मी कैंप पर हमला और फिर हाल ही में डोकलाम में चीन के साथ तनातनी के हालात के मद्देनजर निगरानी व्यवस्था को दुरुस्त करने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

इलाके को समझने में मिलेगी मदद

इसका मकसद सीमा की पहरेदारी करनेवाले बलों को पाकिस्तानी और चीनी सैनिकों की पल-पल की गतिविधियों और आतंकी घुसपैठ पर नजर रखने में सक्षम बनाना है। इससे पूरे इलाके को समझने और दूर-दराज के इलाकों में प्रभावी संचार स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।

इतना ही नहीं, अलग से सैटेलाइट बैंडविड्थ से संकट के वक्त पड़ोसी देशों की ओर से सीमा पर तैनात किए जा रहे सैनिकों एवं जंग के साजोसामान से जुड़ी क्षमताओं का आकलन भी किया जा सकेगा।

गृहमंत्रालय में हुई बैठक

कुछ सरकारी सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय के शीर्ष नौकरशाहों ने हाल ही में बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और इसरो के अधिकारियों के साथ मीटिंग की थी।

इस दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि क्या सीमा पर पड़ोसियों की हलचल पर नजर रखने के लिए एक सैटेलाइट काफी है या हरेक फोर्स को एक-एक अलग से सैटेलाइट की जरूरत होगी।

मीटिंग में सीमा पर पहली लाइन में तैनात सुरक्षाबलों को आदेश व नियंत्रण, संचार, निगरानी, खुफिया और जासूसी क्षमताओं को अभेद्य बनाने की दरकार महसूस की गई। अभी प्रस्ताव तो प्राथमिक चरण में है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार इसे लेकर काफी गंभीर है।

भारत के पास है सर्वोत्तम सैटेलाइट्स

एक अधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा, 'बॉर्डर मैनेजमेंट में सैटलाइट अहम भूमिका निभा सकते हैं और एशिया में भारत के पास कुछ सर्वोत्तम सैटेलाइट्स हैं।

डिफेंस फोर्सेज हमेशा स्पेस टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बॉर्डर फोर्सेज को आईबी, रॉ और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन जैसी केंद्रीय एजेंसियों की खुफिया सूचनाओं पर निर्भर रहना पड़ता है।

उन्हें लद्दाख, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर घाटी जैसे इलाकों में कमजोर कम्युनिकेशन सिस्टम का भी सामना करना पड़ता है। रियल टाइम इन्फर्मेशन वाली सैटलाइट टेक्नॉलजी से भविष्य में होनेवाली घटनाओं से आसानी से निपटा जा सकता है।'

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