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समाजवादी पार्टी मेरी, अपने दम पर लड़ूंगा चुनाव: अखिलेश

अखिलेश यादव ने कहा कि पिताजी के आस-पास के लोगों ने उन्हें गुमराह किया है।

समाजवादी पार्टी मेरी, अपने दम पर लड़ूंगा चुनाव: अखिलेश
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लखनऊ. यूपी में चुनाव से ऐन पहले समाजवादी पार्टी बिखर चुकी है। समाजवादी पार्टी के भीतर पिछले काफी वक्‍त से चल रहे विवाद ने तब बड़ा रूप ले लिया, जब मुलायम सिंह यादव ने अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों की खातिर बुधवार को पार्टी के 325 उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट जारी की थी। इस लिस्‍ट के जरिए मुलायम ने साफ-साफ अखिलेश यादव को किनारे कर शिवपाल यादव को तरजीह दी थी। मुलायम के इस कदम से नाखुश अखिलेश ने बगावत कर दी थी। गुरुवार देर शाम उन्होंने 235 उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट जारी कर दी थी। इसे साफ तौर पर समाजवादी पार्टी में दो-फाड़ के तौर पर देखा गया था।
एसपी मुखिया मुलायम सिंह यादव ने शुक्रवार को अनुशासनहीनता के आरोप में बेटे अखिलेश और चचेरे भाई रामगोपाल यादव को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। सीएम अखिलेश और रामगोपाल के खिलाफ कार्रवाई का यह ऐलान प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दिया। मुलायम ने कहा कि रामगोपाल अखिलेश का भविष्य खराब कर रहे हैं, उन्होंने बिना हक पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने का ऐलान किया है। एसपी मुखिया ने कहा कि इन सबमें अखिलेश भी रामगोपाल के साथ हैं, लिहाजा दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
पिताजी को गुमराह कर रहे आस-पास के लोग
अपने निष्कासन के ठीक बाद अखिलेश यादव ने कहा कि असली समाजवादी पार्टी उनकी है, पिताजी के आस-पास के लोगों ने उन्हें गुमराह किया है। वहीं, रामगोपाल यादव ने निष्कासन को असंवैधानिक बताया है। एक निजी न्यूज चैनल से बातचीत में अखिलेश ने कहा कि वह अपने काम के दम पर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि आसपास के लोग पिताजी को गुमराह कर रहे हैं। असली समाजवादी पार्टी उनकी है। रामगोपाल यादव ने भी अपने और अखिलेश के निष्कासन को असंवैधानकि बताया है। उन्होंने कहा कि नोटिस देने के आधे घंटे के भीतर दोनों को पार्टी से निकाल दिया गया, जवाब का भी इंतजार नहीं किया गया।

रामगोपाल पर कार्रवाई इसलिए हुई
निष्कासन पर रामगोपाल ने कहा, 'यह असंवैधानिक है। नोटिस मिला, जवाब मिला नहीं तब तक कार्रवाई हो गई। यह प्राकृतिक न्याय के भी खिलाफ है। कार्रवाई असंवैधानिक के साथ-साथ गलत तथ्यों पर आधारित है।' दरअसल रामगोपाल पर कार्रवाई इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने 1 जनवरी को पार्टी का आपातकालीन राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने का ऐलान किया था। मुलायम ने इस अधिवेशन को असंवैधानिक बताते हुए रामगोपाल और अखिलेश को पार्टी से बाहर निकाल दिया।
मुलायम सिंह यादव पर असंवैधानिक काम करने का आरोप
रामगोपाल ने खुद मुलायम सिंह यादव पर असंवैधानिक काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'शीर्ष स्तर पर पार्टी में गलत काम हो रहे थे। अगर पार्टी अध्यक्ष ही असंवैधानिक काम करे तो सम्मेलन कौन बुलाएगा। बिना बैठक के सूची कैसे जारी हुई, उम्मीदवार कैसे घोषित हुए। सारे असंवैधानिक कार्य हो रहे थे, उन्हीं कामों को रोकने के लिए सम्मेलन बुलाया।'
नेताजी को पार्टी के संविधान की पूरी जानकारी नहीं
रामगोपाल ने कहा, 'नेताजी को पार्टी के संविधान की पूरी जानकारी नहीं है। यूपी से बाहर कहीं भी पार्टी का वैधानिक संगठन नहीं है। यूपी के डेलिगेट्स की मांग पर ही बैठक बुलाई गई। सौ परसेंट हारने वाले, जमानत नहीं बचा पाने वाले लोगों को टिकट दिया गया है। मैनपुरी में भी 4 जीतने वाले विधायकों में से 3 के टिकट काट दिए गए। फिरोजाबाद में जीतने वाली विधायक का टिकट काट दिया गया।'
पार्टी को बचाने के लिए अधिवेशन
रामगोपाल ने कहा कि गैर-यादवों के बीच वोट मांगने जाने की जब बात आती थी तो रामगोपाल को ही याद किया जाता था। उन्होंने कहा कि चुनाव में पता चल जाएगा कि कौन कितना स्वीकार्य है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि सोमवार को लखनऊ में राष्ट्रीय अधिवेशन में हिस्सा लेने आएं। रामगोपाल ने कहा कि हमने पार्टी को बचाने के लिए अधिवेशन बुलाया है। आपातकालीन अधिवेशन के लिए कोई वक्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि मैं खुद को अब भी पार्टी का जनरल सेक्रटरी मानता हूं, कल भी मानता था और आगे भी मानता रहूंगा। अगला कदम एक जनवरी के बाद बताएंगे। अभी 235 की लिस्ट जारी हुई है, आगे और लिस्ट जारी होगी।
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