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सज्जन कुमार कभी बेचते थे चाय, जानिए उनकी पत्नी और संपत्ति समेत पूरा प्रोफाइल

सज्जन कुमार को 1984 में हुए सिख दंगे के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने दोषी करार देते हुए सोमवार 17 दिसंबर को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

सज्जन कुमार कभी बेचते थे चाय, जानिए उनकी पत्नी और संपत्ति समेत पूरा प्रोफाइल

कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार 1970 के दशक से राजनीति में सक्रिय हैं। सज्जन कुमार ने सबसे पहले 1977 में चुनाव लड़ा और दिल्ली नगर निगम के पार्षद चुने गए। लोकसभा चुनावों में सज्जन कुमार ने 1980 मैं चौधरी ब्रह्म प्रकाश को शिकस्त दी और पहली बार सांसद बने।

सज्जन कुमार को 1984 में हुए सिख दंगे के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने दोषी करार देते हुए सोमवार 17 दिसंबर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सज्जन कुमार को 34 साल बाद इस मामले में सजा मिलने के बाद जहां लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। वहीं लोग कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार के बारे में जानना भी चाहते हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि कौन है सज्जन कुमार, क्या है 1984 के सिख दंगे और जूता कांड से लेकर सजन्न कुमार के काले कारनामे.....

34 साल के बाद 1984 सिख दंगे से जुड़े दिल्ली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सोमवार को फैसला सुनाया है। ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए सज्जन कुमार को दंगे के लिए दोषी माना करार दिया है।

दोषी पाए जाने के बाद 73 वर्षीय सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। सज्जन कुमार को आपराधिक षडयंत्र रचने, हिंसा कराने और दंगा भड़काने का दोषी पाया गया है। फैसले के बाद सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक सरेंडर भी करने का फरमान है।

कभी चलाते थे चाय की दुकान

सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ है। दिल्ली में पिछले तीन दशकों से कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की शुरुआती जिंदगी साधारण बताई जाती है। कहा जाता है कि पहले सज्जन कुमार एक चाय की दुकान चलाते थे।

सज्जन परिवार

सज्जन कुमार की पत्नी का नाम श्रीमति राम है, सज्जन कुमार के भाई रमेश कुमार हैं जो राजनीति में सक्रिया हैं। सज्जन कुमार का बेटा जगपरवेश भी राजनीति में है।

सज्जन कुमार जाति

सज्जन कुमार जाति से जाट हैं इसलिए बाहरी दिल्ली में वह जाट नेता बनकर उभरे थे। सज्जन कुमार ने चुनावों में मुख्यतौर पर जाटों के लिए हुंकार भरी थी।

सज्जन कुमार राजनीतिक करियर

1970 के समय सज्जन कुमार संजय गांधी के साथ राजनीति से जुड़े गए। फिर सज्जन कुमार ने बाहरी दिल्ली के इलाके मादीपुर से म्युनिसिपल चुनाव लड़ा। इस चुनाव में सज्जन की जीत हुई और वह राजनीति में पैठ बनाने में कामयाब रहे। 1977 में सोशल एक्टिविस्ट गुरु राधा किशन ने के सानिध्य में सज्जन राजनीति में फलने-फूलने लगे। राधा किशन ने उन्हें काउंसलर पद की शपथ दिलवाई। 1980 में लोकसभा चुनाव में 35 साल के सज्जन कुमार ने चौधरी ब्रह्म प्रकाश को हराया।

1991 में सजन्न ने बीजेपी के साहब सिंह वर्मा को बाहरी दिल्ली लोकसभा से हरा दिया। सज्जन 14वीं लोकसभा में कांग्रेस से बाहरी दिल्ली से सांसद चुने गए। जिसके बाद वह जाना-पहचाना नाम हो गए। पर इससे पहले ही वह कई आरोपों में घिर चुके थे। सज्जन कुमार बाहरी दिल्ली से चुनाव लड़ते समय जाट समुदाय के लिए अधिक चर्चा में रहे। वह जाट नेता और प्रतिनिधि बनकर उभरे। साल 2016 में कांग्रेस पार्टी द्वारा सज्जन कुमार को चुनाव न लड़ाए जाने पर जाट समुदाय काफी नाराज हो गया था। जिस कारण दिल्ली के कुछ इलाकों में जमकर हंगामा हुआ था।

सिख दंगों में 6 लोगों की हत्या का आरोप

सन 1984 में इंदिरा गांधी की मौत की हत्या के बाद देश भर में दंगे हुए। इन्ही दंगों में 1 और 2 नवंबर को दिल्ली कैंट में 6 सिखों की भीड़ ने हत्या कर दी गई। शिकायतकर्ता जगदीश कौर ने सज्जन कुमार का नाम सामने लाया था। मौका-ए-वारदात पर मौजूद लोगों ने कहा कि सज्जन कुमार ने भीड़ को उकसाया था जिसके बाद हत्याएं हुईं यह सब हमने अपनी आंखों से उसे देखा था।

दो लोगों ने मुखर होकर दी गवाही

दो गवाहों, चम कौर और फोटा सिंह ने इस मामले में गवाही दी। उन्होंने साक्षी होकर कहा कि, सज्जन कुमार ने सुल्तानपुरी में ब्लॉक ए -4 गुरुद्वारा के सामने एक रैली को संबोधित किया और सिखों को मारने के निर्देश दिए। जांच आयोग ने सज्जन के खिलाफ सबूत पाए लेकिन उस समय भारत सरकार ने ठोस सबूतों की कमी के कारण सज्जन कुमार पर मुकदमा नहीं चलाया था।

गवाह चम कौर ने कोर्ट में कहा कि, वह सज्जन कुमार को हचानती है इससे पहले वह उनसे राशन कार्ड बनवाने आदि कार्य के कारण पहले मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि, सुल्तानपुरी एरिया में एक दंगा हुआ था 1 नवंबर 1984 को जब वह अपनी बकरी को ढूंढ़ रहीं थीं, तब सज्जन भीड़ से कह रहे थे कि हमारी मां मार दी, सरदारों को मार दो। कौर ने कहा कि, भीड़ ने उनके बेटे कपूर सिंह, पिता सरदार जी सिंह को भी काफी मारा और छत से नीचे फेंक दिया था। साथ ही शिकायतकर्ता जगदीश कौर कोर्टरूम के अंदर ही धरने पर बैठ गईं थीं।

इसके बाद सज्जन कुमार पर मर्डर, डकैती, आपराधिक साजिश का आरोप लगाए गए। बाद में नानावटी कमीशन की सिफारिश के बाद 2005 में सज्जन के खिलाफ केस दर्ज हुआ। सीबीआई ने सज्जन के खिलाफ दो चार्जशीट फ़ाइल कीं। सज्जन सहित कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर और दूसरे कई नेताओं पर दंगे भड़काने के गंभीर आरोप लगे। मामले की नजाकत देख 2009 में कांग्रेस ने सज्जन कुमार को लोक सभा चुनाव लड़ने से रोक दिया।

सज्जन कुमार जूता कांड

जिसके बाद सिख दंगे मामले की कई बार सुनवाई हुई। 30 अप्रैल 2013 के दिन दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार पर हमले भी हुए। उस दिन 1984 के सिख दंगों में कैंट दंगा केस का फैसला आने वाला था। छह आरोपियों सहित बड़ा नाम था कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार का ही था। कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था, बाकी के पांच लोगों को दोषी पाया गया।

सज्जन कुमार के बरी किए जाने से सिख संगठनों में आक्रोश फैल गया जनता ने जमकर हंगामा किया। फैसले के ठीक बाद डिस्‍ट्रिक्‍ट जज जेआर आर्यन पर जूता फेंका गया। सज्जन कुमार पर भी सिख लोगों ने हमले किए। इस मामले को जूता कांड के नाम से जाना जाता है।

साल 2017 में मोदी सरकार ने 1984 के दंगों की फिर से जांच के लिए एसआईटी (SIT) बनाई थी। एसआईटी ने इसी साल नवंबर में सज्जन कुमार से इन दंगों पर पूछताछ की थी। जिसपर सुनवाई टलते-टलते अब 17 दिसंबर 2018 को फैसला आया है जिसमें सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

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