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100 साल समाधी: जानें शिरडी के साईं बाबा के जीवन से जुड़ी 10 रोचक बातें

शिरडी में साईं बाबा की समाधि के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 17 से 19 अक्टूबर तक साईं दरबार सजेगा।

100 साल समाधी: जानें शिरडी के साईं बाबा के जीवन से जुड़ी 10 रोचक बातें
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शिरडी में साईं बाबा की समाधि के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 17 से 19 अक्टूबर तक साईं दरबार सजेगा। इस दरबार में देश के अलग- अलग राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं शामिल होंगे।

साईं बाबा ने 15 अक्टूबर 1918 को शिरडी में समाधि ली थी। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी भी 19 अक्टूबर को साईं दरबार शिरडी पहुंचेंगे। बता दें कि वैसे तो देश में सभी धर्म के लोग मौजूद हैं, हर धर्म अपनी- अपनी मान्यताओं के हिसाब से त्योहार मनाते हैं।

लेकिन साईं बाबा किसी धर्म और किसी जाति को नहीं मानते थे। उनका सबसे कहना था कि ‘सबका मालिक एक है'। साईं बाबा को उनके भक्त सिरडी के साईं बाबा के नाम से पुकारते हैं। इनकी समाधि के 100 साल पूरे होने पर जानिए उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें।

साईं बाबा से जुड़ी रोचक बातें..

* 19वीं सदी में महाराष्ट्र के शिरडी कस्बे में साईं बाबा का जन्म हुआ था। वे 16 साल की उम्र में ही अहमदनगर जिले के शिरडी गांव में पहुचे गए थे। यहां पर उन्होंने नीम के पेड़ के नीचे तपस्वी जीवन बिताना शुरू कर दिया।

* साईं बाबा के असली नाम और उनके माता पिता या उनके जन्म संबंधित कोई जानकी नहीं मिली है। साईं बाबा भारतीय गुरु, योगी फकीर थे लेकिन उनके भक्त उन्हें संत कहकर पुकारते थे।

* साईं बाबा जिस समय गांव में तपस्या कर रहे थे तो उस समय गांव के लोग यह देखकर चौंक गए कि इतनी कम उम्र में किसी इतनी कठोर तपस्या करते हुए पहले कभी नहीं देखा। साईं बाबा को सर्दी, गर्मी और बरसात का कोई एहसास नही होता था।

* साईं बाबा की तपस्या ने गांव वालों का ध्यान उनकी ओर खींचा और कई धर्म के लोग रोज उनको देखने के लिए आने लगे थे।

* साईं बाबा को कुछ लोग पागल कहकर पत्थर मारे थे। एक दिन वे वहां से अचानक चले गए और एक साल बाद वापस लौटकर शिरडी में ही बस गए।

* जिस समय वापस शिरडी लौटे थे तो उनकी वेशभूषा में वदलाब था। साईं बाबा ने घुटनों तक एक कफनी बागा और एक कपड़े की टोपी पहन रखी थी।

* साईं बाबा किस जाति और किस धर्म से इसका किसी को नहीं मालूम था जिस कारण उन्हें सामाजिक तौर अधिक लोगों सत्कार नहीं मिल पाया था।

* साईं बाबा को जब रहने के लिए कोई स्थान नहीं मिल पाया तो उन्होंने जर्जर मस्जिद को अपान बसेरा बना लिया था। वे वहां पर बैठे रहते थे। वहां बैठने से लोग उन्हें भीख भी देने लगे थे।

* जिस मस्जिद में बाबा का बसेरा था वहां पर वे एक लौ जलाकर रखते थे। जो लोग बिमार होते थे तो बाबा उन्हें लौ की राख देते थे जिससे उनकी बीमारी ठीक हो जाती थी।

* साईं बाबा ने 'सबका मालिक एक है' का नारा दिया था जिससे हिन्दू- मुस्लिम सद्भाव बना रहे। साईं बाबा का निधन 15 अक्टूबर 1918 (दशहरे के दिन) हुआ था।

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