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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन तेज, 37979 लोगों पर केस दर्ज

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ केरल में हिंसक प्रदर्शन तेज हो गया है। राज्य में हिंसक आंदोलने के दौरान अब तक पुलिस ने 3178 लोगों को गिरफ्तार किया है। 37979 लोगों पर 1286 केस दर्ज किए जा चुके हैं।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन तेज, 37979 लोगों पर केस दर्ज
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ केरल में हिंसक प्रदर्शन तेज हो गया है। राज्य में हिंसक आंदोलने के दौरान अब तक पुलिस ने 3178 लोगों को गिरफ्तार किया है। 37979 लोगों पर 1286 केस दर्ज किए जा चुके हैं। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध वहां के हिंदूवादी संगठन,भाजपा और परंपरा का समर्थन करने वाले लोग कर रहे हैं।

सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश कर पूजा अर्चना करने के बाद हिंसक आंदोलन और तेज हो गया है। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि माकपा और भाजपा नेताओं के घरों पर बम से हमले किए गए। माकपा के थालासेरी विधायक एएन शमसीर के घर पर बम से हमला किया गया।

इससे पहले भाजपा सांसद वी मुरलीधरन, माकपा के कन्नूर जिला सचिव पी शशि और पार्टी कार्यकर्ता विशक के घरों पर भी बम फेंके गए। हमले में विशक घायल हो गए। सुप्रीम कोर्ट ने करीब तीन महीने पहले मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी।

भाजपा और हिंदू संगठन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। वहीं, राज्य की माकपा सरकार कोर्ट के फैसले को लागू कराने के पक्ष में है। माकपा ने अपने नेताओं के घरों पर हुए हमलों के लिए आरएसएस के स्वयंसेवकों को, जबकि भाजपा ने माकपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है।

पीएम का केरल दौरा टला

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राज्य में रविवार को होने वाला दौरा टाल दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में भाजपा के एक स्थानीय वरिष्ठ नेता के हवाले से यह जानकारी दी गई। भाजपा नेता ने कहा, पीएम की पठानमथिट्टा यात्रा 6 जनवरी को कुछ अन्य व्यस्तताओं के कारण स्थगित कर दी गई है। इसका मौजूदा स्थिति से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हम इस स्थिति को और बढ़ाना नहीं चाहते।

दो को 2 महिलाओं ने मंदिर में किया था प्रवेश

केरल के सबरीमाला मंदिर में 2 जनवरी को 50 साल से कम उम्र की दो महिलाओं- बिंदु और कनकदुर्गा ने प्रवेश किया था। इसके बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया गया। मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने महिला श्रद्धालुओं को पूरी सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से हिंसक प्रदर्शनों में तेजी आई। हमले में मंदिर समिति के एक कार्यकर्ता की मौत भी हो चुकी है।

800 साल से चली आ रही प्रथा

28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में हर उम्र की महिला को प्रवेश देने की इजाजत दी थी। इस फैसले के खिलाफ केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। इससे पहले यहां 10 से 50 साल उम्र की महिला के प्रवेश पर रोक थी। यह प्रथा 800 साल पुरानी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरे राज्यभर में विरोध हुआ।

आदेश के बाद 3 बार खुला मंदिर

आदेश के बाद 16 नवंबर को तीसरी बार मंदिर खोला गया। मंदिर 62 दिनों की पूजा के लिए खुला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी विरोध के चलते 1 जनवरी तक कोई महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई थी। जब जब मंदिर खुला तब तब महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश कर पूजा करने की कोशिश की लेकिन विरोध प्रदर्शन के कारण महिलाएं मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई।

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