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ये हैं सबरीमाला मंदिर से जुड़ी खास बातें जो आपको बिल्कुल पता नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने के बाद आज शाम को मंदिर तीसरी बार खुलेगा। अब तक कोई भी 10-50 साल की महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई है।

ये हैं सबरीमाला मंदिर से जुड़ी खास बातें जो आपको बिल्कुल पता नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने के बाद आज शाम को मंदिर तीसरी बार खुलेगा। अब तक कोई भी 10-50 साल की महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई है।

ऐसे में इस मामले की मुख्य याचिकाकर्ता तृप्ति देसाई ने मंदिर में प्रवेश करने की बात कही है। आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक का विवाद क्या है।

सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक अयप्पा को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। केरल में शैव और वैष्णवों में बढ़ते वैमनस्य के कारण एक मध्य मार्ग के रूप में सबरीमाला मंदिर की स्थापना की गई थी।
इस मंदिर में सभी पंथ के लोग आ सकते हैं। यह मंदिर लगभग 800 साल पुराना है। अयप्पा स्वामी ब्रह्मचारी माने जाते हैं। मंदिर में इस लिए महिलाओं को प्रवेश वर्जित था जो रजस्वला हो सकती थीं।
मंदिर की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक इस मंदिर को राजा राजसेखरा ने बनवाया था। उन्हें पंपा नदी के किनारे भगवान अयप्पा बच्चे के रूप में मिले थे। इसके बाद राजा उन्हें अपने साथ महल ले आए। रानी ने भी कुछ समय बाद एक बेटे को जन्म दिया। राजा अयप्पा को अपाना राज-काज सौंपना चाहते थे, लेकिन रानी को यह बात पसंद नहीं थी।
रानी ने एक बार अपनी तबीयत खराब होने का बहाना बनाया। रानी ने कहा कि उनकी तबीयत केवल शेरनी के दूध से ही ठीक हो सकती है। अयप्पा जंगल में शेरनी के दूध लेने चले गए। वहां उन्होंने एक राक्षसी को मार दिया। जिससे खुश होकर देवराज इंद्र ने उन्हें एक शेरनी दे दी। जब वह शेरनी को लेकर मंदिर में पहुंचे तो सभी को हैरानी हुई।
इसके बाद पिता ने अयप्पा को राजा बनाने की बात कही लेकिन रानी फिर तैयार नहीं हुईं। इस बार अयप्पा ने भी खुद मना कर दिया। और वो वहां से गायब हो गए। इससे राजा काफी दुखी हो गए और उन्होंने खाना पानी त्याग दिया। इसके बाद अयप्पा ने सपने में अपने पिता को दर्शन दिया और मंदिर बनवाने को कहा जिसके बाद इस मंदिर की स्थापना हुई।
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