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सबरीमाला मंदिर विवाद क्या है, जानें सबरीमाला मंदिर का रहस्य

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में आखिरकार लंबी जद्दोजहद के बाद आज सुबह तड़के दो महिला भक्त मंदिर में प्रवेश करने में कामयाब हो गई हैं। इसी के साथ ही 800 साल से चली आ रही पुरनी परंपरा टूट गई है और इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमल में लाने में केरल सरकार भी कामयाब हो गई।

सबरीमाला मंदिर विवाद क्या है, जानें सबरीमाला मंदिर का रहस्य

केरल (Kerala) के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में आखिरकार लंबी जद्दोजहद के बाद आज सुबह तड़के दो महिला भक्त मंदिर में प्रवेश करने में कामयाब हो गई हैं। इसी के साथ ही 800 साल से चली आ रही पुरनी परंपरा टूट गई है और इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले को अमल में लाने में केरल सरकार (Kerala Government) भी कामयाब हो गई। सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Mandir) में आज सुबह तड़के करीब 3:45 बजे दो महिलाओं बिन्दु और कनकदुर्गा ने मंदिर में प्रवेश कर भगवान अयप्पा की पूजा (sabarimala temple ayyappa swamy) की है। मंदिर में प्रवेश कर पूजा करने वाली दोनों महिलाओं की उम्र लगभग 40 साल की है। जिसका वीडियो (Sabarimala Temple Video) भी सामने आया है। जिस समय इन महिलाओं ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश(sabarimala temple women's allowed) किया उस दौरान उनके साथ पुलिस भी थी। हालांकि महिलाओं के प्रवेश के बाद मंदिर को शुद्धिकरण की प्रक्रिया के लिए बंद कर दिया गया है।

सबरीमाला मंदिर विवाद क्या है

सबरीमाला मंदिर में 10 साल से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश करने पर सदियों से पाबंदी थी। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के लिए याचिका में इसे चुनौती दी गई।

केरल सरकार भी सभी महिलाओं की उम्र के प्रवेश के पक्ष में थी। बीते वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मंदिर में सभी उम्र की महिलओं के प्रवेश की इजाजत दे दी थी।

यानी सदियों से लगे महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को हटा दिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी भगवान अयप्पा के भक्तों ने 10 से 50 साल के बीच की महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया।

इस दौरान हिंसा भी हुई। कई महिलाएं भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए सबरीमाला पहुंची लेकिन विरोध प्रदर्शन के चलते उन्हें दर्शन किए बगैर ही वापस होने पड़ा।लेकिन आर सुबह तड़के करीब 3:45 बजे साल की दो महिलाओं ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर भगवान अयप्पा के दर्शन किए और पूजा अर्चना की।

हालांकि महिलाओं के प्रवेश के बाद मंदिर को शुद्धिकरण की प्रक्रिया के लिए बंद कर दिया गया है। महिलाओं के मंदिर में प्रवेश का वीडियो भी वायरल हो रहा है। यानी 800 साल से चली आ रही पुरनी परंपरा टूट गई है और इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमल में लाने में केरल सरकार भी कामयाब हो गई।

सबरीमाला मंदिर इतिहास (Sabarimala Temple History)

सबरीमाला मंदिर सुप्रीम कोर्ट (Sabarimala Temple Supreme Court)

मालूम हो की सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एट्री के मामले में की सुनवाई 5 जजों की बेंच बनाई गई थी। मंदिर में एट्री को लेकर फैसला 4-1 से आया था जिसमें कहा गया था।

फैसले में कहा गया था कि मंदिर में प्रवेश के लिए किसी भी उम्र की महिला नहीं रोका जा सकता है। जबकि पीठ में शामिल एकमात्र महिला जज इंदु मल्होत्रा ने इसका विरोध किया था।

सबरीमाला मंदिर केस (Sabarimala Temple Case)

28 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मंदिर में सभी उम्र की महिलओं के प्रवेश की इजाजत दे दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के प्रवेश पर रोक के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि धार्मिक परंपराएं संविधान के अनुसार होनी चाहिए। 5 जजों की बेंच अनुच्छेद-25 और 26 का हवाला देते दिया था।

सबरीमाला मंदिर मुद्दा (Sabarimala Temple Issue)

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के में 10 साल से लेकर 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में एंट्री की इजाजत नहीं थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को एंट्री करने की इजाजत दे दी गई।

जिसके बाद मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर मंदिर परिसर के बाहर विरोध-प्रदर्शन और तनाव बढ़ गया। इसके बाद मंदिर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद भी भगवान अयप्पा के भक्तों ने मंदिर में महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया था।

सबरीमाला मंदिर का रहस्य (Sabarimala Temple Mystery)

* सबरीमाला मंदिर मलयालम कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक महीने 5 दिन के लिए खुलता है। मकर संक्रांति के दिन भगवान अयप्पा के भक्त भारी संख्या में मंदिर पहुंचे हैं और भगवान अयप्पा की पूजा करते हैं। यह दिन भक्तों के लिए काफी खास माना जाता है। सबरीमाला मंदिर वार्षिक उत्सव मंडलम और मकाराविलक्कु के दौरान 15 नवंबर से 15 जनवरी के लिए खुलता है।

* पौराणिक कथाओं के मुताबिक अयप्पा को भगवान शिव और मोहिनी का पुत्र माना जाता है। अयप्पा का एक नाम हरिहरपुत्र भी है।

* भगवान शिव और मोहिनी के पुत्र भगवान अयप्पा को अयप्पन, शास्ता, मणिकांता नाम से भी जाना जाता है।

* सबरीमाला मंदिर को दक्षिण का पाप हर लेने वाला तीर्थस्थल भी कहा जाता है।

* अयप्पा मस्जिद में रहकर मंदिर की सेवा करते थे और

* अयप्पा पांडुलम नामक ग्राम प्रमुख के यहां अनेक चमत्कार भी दिखाते थे।

* अयप्पा को मुस्लिम संत वेवर ने गोद ले लिया था।

* अयप्पा पूजा की एक अलग पद्धति है जिसमें हिंदुओं के साथ मुस्लिम भी आते हैं।

* सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने के लिए भगवान अयप्पा के भक्तों सिर पर पोटली रखकर 18 पावन सीढ़ियों को पार करना होता है।

* मंदिर में प्रवेश करने वाले तीर्थयात्री काले या नीले रंग के कपड़े पहनते हैं। जब तक यात्रा पूरी न हो जाए, तब तक उन्हें शेविंग की अनुमति नहीं होती है।

क्या है 800 साल पुरानी परंपरा (Sabarimala Mandir ka Itihas)

800 साल पुरानी परंपरा के मुताबिक केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 उम्र तक की महिलाओं के प्रवेश करने पर पाबंदी है। क्योंकि यही वह आयुवर्ग है जिसमें महिलाओं को पीरियड्स (Periods) आते हैं। केवल इस मंदिर में 10 साल से कम और 50 साल से अधिक की उम्र की महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं। मंदिर में भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं, लेकिन इनमें मुख्य रूप से पुरुष होते हैं।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित (Sabarimala Temple Women)

सबरीमाला मंदिर में उन महिलाओं का प्रवेश वर्जित जिन्हें पीरियड्स आते हैं। क्योंकि भगवान अयप्पा को ब्रह्मचारी और तपस्वी माना जाता है। इसलिए मंदिर में 10 से कम और 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति है।

सबरीमाला मंदिर - कौन थे भगवान अयप्पा? (sabarimala temple ayyappa swamy)

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान अयप्पा के पिता शिव और माता मोहिनी हैं। शिव और विष्णु से उत्पन होने के कारण भगवान अयप्पा को 'हरिहरपुत्र' के नाम से भी जाना जाता है। हरिहरपुत्र के अलावा भगवान अयप्पा को अयप्पन, शास्ता, मणिकांता नाम से भी जाना जाता है।

सबरीमाला मंदिर कहां स्थित है (sabarimala temple kerala)

सबरीमाला मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किमी दूरी पर पंपा है और यहां से पांच किमी की दूरी पर पश्चिम घाट से सह्यपर्वत शृंखलाओं के घने वनों के बीच, समुद्रतल से लगभग एक हजार मीटर की ऊंचाई पर सबरीमला मंदिर स्थित है।

सबरीमला शैव और वैष्णवों के बीच की अद्भुत कड़ी है। मलयालम में 'शबरीमला' का अर्थ होता है, पर्वत होता है। पंपा से सबरीमला तक पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यह रास्ता पांच किमी लंवा है।

मंदिर में प्रवेश के लिए 18 पावन सीढ़ियां

भगवान अयप्पा के भक्तों को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने के लिए 18 पावन सीढ़ियों को चढ़ना होता है। इन 18 सीढ़ियों के अलग- अलग अर्थ हैं। पहली 5 सीढ़ियों को इंसान की 5 इन्द्रियों से जोड़ा जाता है। 5 के बाद 8 सीढ़ियों को इंसान की भावनाओं से जोड़ा जाता है। आखिरी 5 सीढ़ियों में से 3 सीढ़ियों को इंसान के गुण और 2 सीढ़ियों को ज्ञान और अज्ञान के प्रतीक से जोड़ा जाता है।

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