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#SaafNiyatSahiVikas 26 मई 2014 से लेकर 26 मई 2018 तक पीएम मोदी ने विदेशों में किया भारत का परचम बुलंद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार के आज चार साल पूरे हो गए हैं, पीएम मोदी ने इस पर देश को नया नारा दिया है ''देश का बढ़ता जाता विश्वास साफ़ नीयत, सही विकास'', 1991 में जो आर्थिक सुधार लागू किये गये थे, उन्हें मोदी सरकार ने सही मायने में तेज गति से आगे बढ़ाते हुएे उस दिशा की ओर उन्मुख किया है।

#SaafNiyatSahiVikas 26 मई 2014 से लेकर 26 मई 2018 तक पीएम मोदी ने विदेशों में किया भारत का परचम बुलंद
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केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने चार साल पूरे कर लिए हैं। इस बीच ऐसे अनेक नीतिगत फैसले लिए गये हैं, जिनसे न केवल देश में बल्कि दूसरे देशों में भी बहुत बड़े प्रभाव डाले हैं।

बताने की जरूरत नहीं है कि 1991 में जो आर्थिक सुधार लागू किये गये थे, उन्हें मोदी सरकार ने सही मायने में तेज गति से आगे बढ़ाते हुएे उस दिशा की ओर उन्मुख किया है, जहां से वास्तव में सुखद परिणाम आने वाले हैं।

अब तक आधे-अधूरे मन से ही सुधार किये जा रहे थे परंतु चाहे विमुद्रीकरण हो या जीएसटी को लागू करने का साहसिक फैसला, उन्हें अमलीजामा पहनाने का निर्णय इसी सरकार ने लिया है।

इतना ही नहीं, गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वाले उन आठ करोड़ परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन देने का फैसला भी इसी सरकार ने इन चार सालों में लिया है, जो उपलों, लकड़ियों और ऐसे ही ईंधन से चूल्हा जलाने और अपना स्वास्थ्य खराब करने के लिए अभिशप्त थे।

आजादी के सत्तर साल बाद भी अठारह हजार गांवों तक बिजली नहीं पहुंची थी। प्रधानमंत्री मोदी ने एक हजार दिनों के भीतर उनमें बिजली पहुंचाने का संकल्प पूरा कर दिखाया।

इसी तरह गरीबी की रेखा से नीचे के चार करोड़ परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन देने और पचास करोड़ आबादी को पांच लाख रुपये तक का हेल्थ कवर देने का फैसला भी इस सरकार ने लिया है।

पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन देने का निर्णय तो शुरुआती दो साल के भीतर ले लिया गया था। इसके अलावा जिस नियोजित तरीके से यातायात के संसाधनों का विकास इस दौर में हुआ है।

संभवतः इससे पहले कभी नहीं हुआ। करीब सौ नये हवाई अड्डों का निर्माण, पश्चिमी देशों से मुकाबले करते हुए हाइवे और जल मार्ग का विकास कुछ ऐसे कदम हैं, जो अंततः भारत को विकास के नये आकाश की तरफ लेकर जायेंगे।

26 मई 2014 को जब नरेन्द्र मोदी और उनके मंत्रीमंडल ने राष्ट्रपति भवन के खुले प्रांगण में शपथ ली थी, तब उसमें पाकिस्तान सहित सार्क देशों के सभी राष्ट्रप्रमुखों ने भी भाग लिया था।

सार्क देशों का ही नहीं, दुनिया भर के उन देशों का भी भारत के प्रति इस दौरान नजरिया बदला है, जो कुछ मसलों को लेकर दूरी बनाये रखते थे। चाहे अमेरिका हो, रूस, चीन, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, फलीस्तीन, इजरायल, अफ्रीकी देश अथवा खाड़ी के मुल्क।

इन सबके रुख में बदलाव देखा जा रहा है। जिन लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की समझ और क्षमताओं पर यह कहते हुए सवाल खड़े किये थे कि वह अब तक गुजरात से बाहर नहीं निकले हैं, उन्हें निश्चित रूप से अपनी गलतबयानी पर अफसोस हो रहा होगा।

इन चार वर्षों में न केवल भारत की विश्व भर में साख और पूछ बढ़ी है, बल्कि हर छोटा-बड़ा देश प्रधानमंत्री मोदी की समझ का कायल दिखाई देता है। मेक इन इंडिया, डिजीटल इंडिया, स्टार्ट-अप सहित ऐसी कई मुहिम इस दौरान सिरे चढ़ती देखी गयी हैं, जो इसी सरकार की देन हैं।

मुद्रा योजना का लाभ दस करोड़ से भी अधिक बेरोजगारों ने उठाया है, जिनमें सत्तर प्रतिशत से अधिक महिला शक्ति है। दो और चीजों का जिक्र करना जरूरी है। कश्मीर घाटी में सेना और सुरक्षाबलों की निरंतर कार्रवाई ने जहां आतंकवाद की कमर तोड़ दी है, वहीं नक्सलवाद भी दम तोड़ने के कगार पर पहुंच चुका है।

पाकिस्तान को मोदी सरकार ने पूरी दुनिया में अलग-थलग करके रख दिया है। जहां तक राजनीतिक मोर्चे का प्रश्न है। विमुद्रीकरण से लेकर जीएसटी तक के बारे में मीडिया और विपक्षी दलों द्वारा गलत प्रचार करने के बावजूद इन चार वर्षों में भाजपा ने अधिकांश प्रदेशों में हुए चुनावों में जीत दर्ज की है और सरकारें बनायी हैं।

अभी इस सरकार के पास एक साल का समय है और हाल फिलहाल में जो भी सर्वे हुए हैं, उनकी मानें तो 2019 में होने वाले अगले चुनाव में भी मोदी के नेतृत्व को चुनौती देने वाला कोई उनके आस-पास भी नहीं है।

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