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#SaafNiyatSahiVikas पीएम मोदी ने चार साल में आर्थिक क्षेत्र में किया ये काम, भविष्य में मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के आज चार साल पूरे हो गए हैं। पीएम मोदी ने ''देश का बढ़ता जाता विश्वास साफ़ नीयत, सही विकास'' जैसा नया देश को दिया है। बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए सरकार सरकारी बैंकों को 2.11 लाख करोड़ रुपये देने के संबंध में कार्रवाई कर रही है।

#SaafNiyatSahiVikas पीएम मोदी ने चार साल में आर्थिक क्षेत्र में किया ये काम, भविष्य में मिलेगा लाभ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के आज चार साल पूरे हो गए हैं। इस पर पीएम मोदी ने 'देश का बढ़ता जाता विश्वास साफ़ नीयत, सही विकास' जैसा नया देश को दिया है। देखा जाए तो मोदी सरकार द्वारा किए गए सुधारात्मक कार्यों की एक लंबी फेहरिस्त है, लेकिन सभी को एक लेख में समाहित करना संभव नहीं है। लिहाजा, पिछले चार सालों में मोदी सरकार द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण कार्यों पर चर्चा करना चाहूंगा।

मौजूदा समय में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारी बैंकों में आमूलचूल परिवर्तन लाने की दरकार है। बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए सरकार उन्हें 2.11 लाख करोड़ रुपये देने के संबंध में कार्रवाई कर रही है।

माना जा रहा है इससे वित्त वर्ष 2019 में जीडीपी वृद्धि दर में बेहतरी आएगी और फंसे हुए कर्ज और अनुत्पादक परिसंपत्तियों की समस्या से निपटने में बैंकों को आसानी होगी। पुनर्पूंजीकरण की व्यवस्था को तीन हिस्सों में बांटा गया है।

कुल राशि में 18,000 करोड़ रुपये बजट से दिये जायेंगे, 58,000 करोड़ रुपये बाजार से इक्विटी के रूप में जुटाए जाएंगे और 1.35 लाख करोड़ रुपये सरकार द्वारा पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड के रूप में उपलब्ध करवाए जाएंगे।

सरकारी खजाने पर 9,000 करोड़ रुपये ब्याज का बोझ

सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के अनुसार पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड से सरकारी खजाने पर 9,000 करोड़ रुपये ब्याज का बोझ पड़ेगा, जिससे मुद्रास्फीति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

नवंबर 2016 में विमुद्रीकरण का निर्णय लेना मोदी सरकार द्वारा उठाया गया एक साहसिक कदम था। इस निर्णय से नकसलवाद, आतंकवाद, कालेधन एवं कर चोरी पर रोक तो लगी ही साथ ही डिजिटलीकरण को भी बढ़ावा मिला।

भारत की अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिये विमुद्रीकरण के तुरंत बाद जीएसटी को लागू किया गया। यह एक सशक्त अप्रत्यक्ष कर प्रणाली है। जीएसटी के तहत अलग-अलग की बजाय एक कर का प्रावधान किया गया।

इससे विनिर्माण लागत में कमी आई। उपभोक्ताओं को आज देश भर में किसी भी सामान या सेवा का एक शुल्क अदा करना पड़ रहा है। इससे कर चोरी की वारदातें एवं कर विवाद के मामले कम हो रहे हैं।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस

टैक्स वसूली की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। रोजगार सृजन में वृद्धि, चाइनीज उत्पादों की बिक्री में कमी, जरूरी चीजों पर कर कम होने एवं विलासिता की वस्तुएं महंगी होने से सरकार व आम लोगों दोनों को फायदा हो रहा है।

केंद्र सरकार ने देश में निवेश को प्रोत्साहन देने और कारोबारी सुगमता को बढ़ाने के लिए तरह-तरह के सुधार किए हैं, जिसे तकनीकी भाषा में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कहते हैं।

वित्त वर्ष 2019-20

पिछले वर्ष ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत ने रिकॉर्ड 30 पायदान सुधार कर 100वां स्थान हासिल किया था। इस साल भारत 50वें स्थान को पाना चाहता है।

विश्व बैंक ने अपने द्विवार्षिक प्रकाशन इंडिया डेवलपमेंट अपडेट्स्ा इंडियाज ग्रोथ स्टोरी नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की जीडीपी की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018-19 में 7.3 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2019-20 में बढ़कर 7.5 प्रतिशत रह सकती है।

भारत की आर्थिक वृद्धि दर

रिपोर्ट में कहा गया है कि 8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने के लिए भारत को ऋण और निवेश से संबंधित मुद्दों को सुलझाने और निर्यात को प्रतिस्पर्धात्मकता बनाने की पहल करनी होगी। इन मोर्चों पर सरकार बेहतरी लाने की लगातार कोशिश भी कर रही है।

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने भी भारत की आर्थिक वृद्धि दर के वित्त वर्ष 2018-19 में 7.3 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2019-20 में बढ़कर 7.5 प्रतिशत पहुंचने का अनुमान लगाया है।

विश्व बैंक रिपोर्ट

फिच के मुताबिक नीति संबंधी निर्णय तेजी से लिये जाने के कारण देश में वृद्धि की संभावना बढ़ी है। विश्व बैंक ने 19 अप्रैल को जारी अपनी रिपोर्ट ग्लोबल फिन्डेक्स में भारत में वित्तीय समावेशन की दिशा में उठाए गए प्रयासों की सराहना की है।

विश्व बैंक के अनुसार व्यापक पैमाने पर जनधन खाते खोलने और आधार को बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया में शामिल करने से ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक एवं सामाजिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इससे वित्तीय समावेशन के लैंगिक अंतर को कम करने में मदद मिली है।

डिजिटल भुगतान

महिलाएं खुद से अब डिजिटल लेनदेन करने लगी हैं। विश्व बैंक की यह रिपोर्ट बैंक के माध्यम से बचत, उधारी, डिजिटल लेनदेन और वित्तीय तौर-तरीकों के बारे में दुनिया भर से जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 में भारत की केवल 53 प्रतिशत आबादी के पास ही बैंक खाते थे, लेकिन 2017 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई। यह रिपोर्ट डिजिटल भुगतान में आ रही तेजी की भी पुष्टि करती है।

मोबाइल बैंकिंग

यह रिपोर्ट बताती है कि बैंक खाता रखने वाले 36 प्रतिशत से अधिक भारतीयों ने अपनी जीवन में कभी न कभी डिजिटल लेनदेन जरूर किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में पेंशन का डिजिटल भुगतान किया जा रहा है और हाल के दिनों में इसकी रफ्तार में तेज बढ़ोतरी हुई है।

लोग डेबिट कार्ड के जरिए भी अपना पेंशन ले रहे हैं। मोबाइल बैंकिंग के लोकप्रिय होने से भारत के दूर-दराज इलाकों में भी बैंक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार भारत द्वारा किए जा रहे आर्थिक सुधारों का सकारात्मक परिणाम दिखने लगा है।

आईएमएफ रिपोर्ट

आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक डेविड लिप्टन के अनुसार बैंकों की समस्याओं से निपटने के लिये उठाये गये कदम समीचीन एवं महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल पहचान तकनीक और अन्य ढांचागत सुधारों से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आयेगी।

आईएमएफ और विश्व बैंक की ग्रीष्मकालीन बैठक में लिप्टन ने कहा कि इसमें दो राय नहीं है कि अभी भी भारत को बहुत सारे कार्य करने हैं, लेकिन उसने अब तक जो कदम उठाये हैं उनका फायदा दिखने लगा है।

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया

भारत की वृद्धि दर पिछले साल 6.7 प्रतिशत थी, लेकिन वित्त वर्ष में इसके 7.4 और आगामी साल में 7.8 रहने का अनुमान है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने एक बयान में कहा है कि भारत में आ रहे डिजिटल बदलावों से जीडीपी में 2021 तक 154 अरब डॉलर जुड़ जायेंगे।

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के अनुसार वर्ष 2017 में भारत में जीडीपी में बढ़ोतरी डिजिटल उत्पादों और सेवाओं में सकारात्मक बदलावों के कारण मुमकिन हुआ। ये उत्पाद एवं सेवाएं डिजिटल प्रौद्योगिकियों की मदद से संभव हो सका।

माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि आगामी 4 सालों में देश के तकरीबन 60 जीडीपी में वृद्धि के कारक डिजिटल बदलाव होंगे। कहा जा सकता है मोदी सरकार ने अपने चार सालों के कार्यकाल में बैंकिंग और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिये अनेक काम किए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम परिलक्षित भी होने लगे हैं। इनका और ज्यादा लाभ्स आने वाले दिनों में दिखाई देगा।

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