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कश्मीरी युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खोलेगा संघ!

दवा का उत्पादन कश्मीर में ही किया जाएगा।

कश्मीरी युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खोलेगा संघ!
नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर सीमा पर भारत और पाकिस्तान के बीच अनवरत चलने वाली तनातनी और आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से सूबे में पसरे तनाव के बीच केंद्र को लगता है कि रोजगार ही एकमात्र ऐसी दवा है, जिससे लंबे समय से हिंसा व तनाव के शिकार कश्मीरी युवाओं के सुनहरे भविष्य का रास्ता खोला जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विचार को काफी पहले भांपते हुए कश्मीरी युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराने की बात कही थी और अब इस पर गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के आनुषांगिक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने मिलकर गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है।
दो परियोजनाएं होंगी तैयार
बीते कुछ महीनों के दौरान घाटी में जारी पत्थरबाजी की घटनाओं के बीच संघ के आनुषांगिक संगठन एमआरएम के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने जम्मू-कश्मीर का दौरा कर एक व्यापक रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी थी। इसके बाद मंत्रालय ने संगठन को कश्मीर से संबंधित दो अन्य परियोजनाओं पर भी काम करने की जिम्मेदारी सौंपी है। एमआरएम के उच्चपदस्थ सूत्रों ने हरिभूमि को बताया कि इन परियोजनाओं में से एक बेरोजगार कश्मीरी युवाओं को दिल्ली बुलाकर व्यवसायिक प्रशिक्षण देकर देश के अलग-अलग राज्यों में नौकरी दिए जाने को लेकर है। दूसरी परियोजना में सूबे के किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए खेतीबाड़ी के व्यवसायिक उपयोग पर काम किया जाएगा। आगामी दो महीने के अंदर एमआरएम को इन दोनों परियोजनाओं पर रिपोर्ट तैयार कर गृह मंत्रालय को सौंपनी है।
केंद्र में अलगाववादी इलाके
आंकड़ों के हिसाब से राज्य में अभी कुल करीब 50 हजार युवा बेरोजगार हैं। इनमें से 10 हजार युवाओं को राजधानी दिल्ली बुलाकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। लेकिन इनका ग्रेजुएट होना अनिवार्य होगा। करीब छह महीने तक इन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा और उसके बाद देश के अलग-अलग राज्यों में सरकारी विभागों में इनकी नियुक्ति की जाएगी। एमआरएम ने बेरोजगार युवाओं की इस आबादी में तराल, अनंतनाग, शोपियां, बारामूला, हड़वाड़ा, गांदरबल जैसे जम्मू-कश्मीर के अलगाववाद प्रभावित इलाकों को भी शामिल करने की योजना बनाई है। खेती के मुद्दे पर राज्य में जमीन के कुछ हिस्से को पट्टे पर लेकर मच्छरों को मारने के लिए एक ऐसी दवा बनाने की बात एमआरएम ने की है, जिसके कोई साइडइफेक्ट नहीं होंगे। अभी गुडनाइट, कुछवाछाप जैसी दवाओं के कई साइडइफेक्ट देखने को मिलते हैं। लेकिन इस दवा के बनने के बाद ऐसा नहीं होगा। दवा का उत्पादन कश्मीर में ही किया जाएगा।
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