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RSS का इतिहास: लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर बनाए ये 3 मास्टर स्ट्रोक

दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के मंथन का आखिरी और तीसरा दिन चल रहा है। इस दौरान आरएसएस के चीफ मोहन भागवत ने 2019 के चुनाव को लेकर दो बड़े संदेश दिए हैं।

RSS का इतिहास: लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर बनाए ये 3 मास्टर स्ट्रोक
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दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के मंथन का आखिरी और तीसरा दिन चल रहा है। इस दौरान आरएसएस के चीफ मोहन भागवत ने 2019 के चुनाव को लेकर दो बड़े संदेश दिए हैं।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का ये मंथन शिविर लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति बनाई जा रही है। संघ हमेशा से अपने को बीजेपी से अलग बताता रहा है। लेकिन अंदर की राजनीति अलग है।

संघ का इतिहास

सबसे पहले बात करते हैं संघ के इतिहास की। संघ जिसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानि आरएसएस कहा जाता है। ये भारत का एक दक्षिणपंथी, हिन्दू राष्ट्रवादी, अर्धसैनिक, स्वयंसेवक संगठन हैं। जो विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संस्थान है।

इसकी स्थापना साल 1925 में हुई। कहा जाता है कि 1947 में भारत आजाद हुआ था लेकिन संघ ने एक दिन भी अंग्रेजों के विरोध में चल रहे स्वतंत्रता अभियान में भाग नहीं लिया। लेकिन आज यह संघ हिंदुत्व को लेकर बाते करता है।

इस संघ के प्रसिद्ध होने का मुख्य कारण है सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी के ज्यादातर लोग संघ से जुड़े रहे हैं। इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य हिंदू अनुशासन के माध्यम से चरित्र प्रशिक्षण प्रदान करना और हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए हिंदू समुदाय को एकजुट करना रहा है। फिलहाल 50 लाख से ज्यादा स्वयंसेवक नियमित रूप से शाखाओं में आते हैं।

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ये हैं तीन मास्टर स्ट्रोक

1. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर पेनी नजर बनाए हुए है। इसको लेकर दिल्ली में मंथन शिविर भी रखा है। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कांग्रेस की खुलकर तारीफ की और वहीं मुसलमान को का पक्ष भी लिया।

2. लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी पार्टी की जीत के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 प्रचारक मैदान में उतारेंगे। जो बीजेपी के 5 साल के कार्यकर्म के बारे में लोगों को बताएंगे। ताकि संघ के सहारे बीजेपी को फायदा हो सके।

3. इस बार संघ ने संगठन को ग्राम पंचायत स्तर तक विस्तार करने का लक्ष्य बनाया है। ताकि संघ शहरों में फैल रहा और वह गांवों की अपेक्षा ज्यादा है। ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण युवा संघ से जुड़े यही इस बार का लक्ष्य रखा गया है।

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