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विक्रम कोठारी कभी साइकिल पर बेचा करता था पान मसाला, आज है करोड़ों का कारोबारी

पीएनबी समेत 7 बैंको के साथ की गई धोखाधड़ी विवाद मामले में बैंक ऑफ बड़ोदा की शिकायत पर सीबीआई ने रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमेटेड, उसके डायरेक्टर्स विक्रम कोठारी, साधना कोठारी और राहुल कोठारी और अज्ञात बैंक अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

विक्रम कोठारी कभी साइकिल पर बेचा करता था पान मसाला, आज है करोड़ों का कारोबारी
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बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर सीबीआई ने रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमेटेड और उसके डायरेक्टर विक्रम कोठारी, साधना कोठारी और राहुल कोठारी और अज्ञात बैंक अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमेटेड पर ब्याज समेत कुल 3695 करोड़ रुपये बकाया है।

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रोटोमैक ग्रुप ने धोखाधड़ी कर सात बैंकों से 2919 करोड़ रुपये का लोन लिया, जिसे अदा नहीं किया गया। ब्याज मिलाकर यह रकम 3695 करोड़ रुपये है। रकम बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की है।

साइकिल पर बेचता था पान मसाला

कानपुर का रहने वाला विक्रम कोठारी पेशे से एक कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखता है। उनके पिता मनसुख कोठारी ने सन् 1973 में पान पराग ब्रांड की शुरुआत की थी। विक्रम कोठारी ने 1980 के दशक में कोठारी नाम से अपने स्टेशनरी बिजनेस की शुरूआत की।

शुरुआती समय में साइकिल पर पान मसाला बेचने वाला विक्रम कोठारी देखते ही देखते 1992 में एक ब्रांड बन गया। उनके भाई दीपक कोठारी मशहूर पान मसाला कंपनी पान पराग के मालिक हैं।

पहले दोनों भाई पिता के कारोबार में साझेदार थे लेकिन 1990 के दशक में दोनों भाइयों के बीच कारोबार का बंटवारा हो गया। एक ओर विक्रम कोठारी को रोटोमेक का मालिकाना हक मिला और वहीं दूसरी ओर उसके भाई दीपक कोठारी को पान मसाला का कारोबार मिला।

पहले पहल दोनों भाई पिता के कारोबार में साझेदार थे किन्तु 1990 के दशक में दोनों भाइयों के बीच कारोबार का बंटवारा हो गया। एक ओर विक्रम कोठारी को रोटोमेक का मालिकाना हक मिला और वहीं दूसरी ओर उसके भाई दीपक कोठारी को पान मसाला का कारोबार मिला।

बैंक से लिया करोड़ों का लोन

रोटोमैक कंपनी को 7 बैंकों ने लोन दिया था। विक्रम कोठारी पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया मुंबई शाखा की 485 करोड़, इलाहाबाद बैंक कोलकाता शाखा की 352 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा (लीड बैंक) की 600 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया की 1365 करोड़ और इंडियन ओवरसीज बैंक की 1000 करोड़ रुपए की बकाएदारी है। बैंकों का आरोप है कि विक्रम कोठारी ने कथित तौर पर न लोन की रकम लौटाई और न ही ब्याज दिया।

इस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दिशानिर्देशों पर ऑथराइज्ड जांच कमेटी गठित की गई। कमेटी ने 27 फरवरी 2017 को रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लि. को विलफुल डिफाल्टर (जानबूझकर कर्ज नहीं चुकानेवाला) घोषित कर दिया। कमेटी ने लीड बैंक की पहल पर यह आदेश पारित किया था।

इन कंपनियों के भी डारेक्टर हैं कोठारी

  • मोहन स्टील्स लिमिटेड (1 मार्च, 2005)
  • कोठारी फूड्स एंड फ्रेगरेंस (25 फरवरी, 2014)
  • वेस्ट कोस्ट एक्सट्रूजन (30 सितम्बर, 2011)
  • रोटोमैक पॉलीमर्स प्रा. लि. (2 सितम्बर, 1998)
  • क्राउन एल्बा राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स (1 फरवरी, 2005)
  • आनंदेश्वर निर्माण प्रा. लि. (24 जनवरी, 2011)
  • सनराइज ग्लोबल (3 मार्च 2009)
  • रोटोमैक स्पोर्ट्स (5 फरवरी, 2002)
  • आरएफएल इंफ्रास्ट्रक्चर्स (25 मई, 1995)
  • रोटोमैक एक्जिम प्रा. लिमिटेड (24 सितम्बर, 2008)
  • रेव मोती इंटरटेनमेंट (12 मई 2012)

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