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रोहिंग्या शरणार्थियों से किस तरह अलग हैं चमका और हाजोंग शरणार्थी, जानें सब कुछ

इन दिनों रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ चमका और हाजोंग शरणार्थी भी सुर्खियों में हैं। एक नजर इनके अंतर और पृष्ठभूमि पर।

रोहिंग्या शरणार्थियों से किस तरह अलग हैं चमका और हाजोंग शरणार्थी, जानें सब कुछ
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रोहिंग्या शरणार्थियों का मुद्दा इन दिनों दुनियाभर में छाया हुआ है। भारत में भी 40,000 के करीब रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं। अब सरकार ने देश की सुरक्षा के लिए खतरा माना है और इन्हें वापस म्यांमार भेजने की कवायद चल रही है।
भारत में रोहिंग्या की तरह चमका और हाजोंग शरणार्थी लंबे समय से रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चमका और हाजोंग शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दे दी गई है। लेकिन, देश के बहुत से लोगों को रोहिंग्या, चमका और हाजोंग शरणार्थियों के अंतर के बारे में नहीं पता है।
- चकमा और हाजोंग शरणार्थी का ताल्लुक बांग्लादेश से है। यह वहां की चटगांव पहाड़ियों के हैं। लेकिन, 1960 में कपताई बांध परियोजना में अपनी जमीनें गंवाने के बाद ये भारत बस गए।
- चकमा और हाजोंग शरणार्थी ज्यादातर अरुणाचल प्रदेश में ही बसे हुए हैं। 1964 में इनकी संख्या 5,000 के करीब थी, जो अब बढ़कर एक लाख के करीब पहुंच गई है।
- चकमा लोग बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं, जबकि हाजोंग हिंदू धर्मालंबी हैं। वहीं, रोहिंग्या मुसलमान हैं और ये म्यांमार के रहने वाले हैं। म्यांमार में हुए अत्याचार के बाद ये लोग बांग्लादेश और वहां से भारत में जा बसे।
-अरुणाचल में चकमा और हाजोंग शरणार्थियों के नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाली कमेटी की याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भारतीय नागरिकता देने का आदेश दिया और अब इन्हें नागरिक मान लिया गया है।

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