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सड़क हादसों की मुहिम को लग रहा है पलीता, ट्रैक-ट्रेनर गायब

केंद्र सरकार ने ड्राईविंग लाइसेंस मुहैया कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया है।

सड़क हादसों की मुहिम को लग रहा है पलीता, ट्रैक-ट्रेनर गायब
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नई दिल्ली. देश में सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार की जहां सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं स्पीड गवर्नर मीटर अनिवार्य करके खासकर कॉमर्शियल और भारी वाहनो की गति सीमा तय करने का फरमान जारी कर दिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वाहनों के चालकों की कौशल क्षमता बढ़ाकर उन्हें सक्षम बनाने की मुहिम भी चला रखी है, लेकिन देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित किये गये चालक प्रशिक्षण केंद्रों के पास न तो ट्रैक है और इन केंद्रों से विशेषज्ञ भी गायब हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में बड़ी संख्या में पहुंच रही ऐसी शिकायतों पर गौर किया जाए तो चालकों को ड्राईविंग सिखाने वाले प्रशिक्षण केंद्रों व स्कूलों का देशभर के अधिकांश जिलों में बुरा हाल है। मसलन ड्राइविंग सिखाने वाले ऐसे प्रशिक्षण केंद्र और स्कूल केंद्र द्वारा जारी की गई मोटी धनराशि वाले परिवहन के नॉर्म नहीं पूरे करते नजर नहीं आ रहे हैं।
प्रशिक्षण का निरीक्षण नहीं
मंत्रालय में पहुंची शिकायतों और सूचनाओं को सही माने तो किसी भी प्रशिक्षण केंद्र व ड्राइविंग स्कूल में न तो ट्रैक हैं और न चालकों को प्रशिक्षण देने वाले विशेषज्ञ ही नहीं हैं। ऐसे केंद्रों व स्कूलों में ड्राइविंग सीखने वाले लोगों को वाहन के साथ आवागमन वाली या भीड़भाड़ वाली सड़कों पर ही उतार दिया जाता है। वहीं शिकायतों में यह भी पाया जा रहा है कि जिला स्तर पर संभागीय परिवहन अधिकारी भी निर्धारित की गई छह माह के निरीक्षण करने की मियाद को भी पूरा नहीं करते और इस प्रावधान के बावजूद एक साल में भी कोई परिवहन अधिकारी चालकों के प्रशिक्षण का निरीक्षण नहीं करते, बल्कि मंत्रालय में ऐसी शिकायतों की भी भरमार है कि ऐसे प्रशिक्षण केंद्रों व निजी ड्राईविंग स्कूलों के संचालकों द्वारा बिना प्रशिक्षण दिये ही अपना प्रमाण पत्र दे रहे हैं, जिनके आधार पर संभागी परिवहन कार्यालय से ऐसे लोग अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में कामयाब हो जाते हैं।
हर पांच साल में होगा नवीकरण
मंत्रालय के अनुसार कॉमर्शियल वाहनों या भारी वाहनों को चलाने के लिए जिला स्तर पर क्षेत्रीय परिवहन विभाग द्वारा स्कूलों से प्रक्षिण प्रमाणपत्र के आधार पर ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी करता है जिसका हर पांच साल में नवीकरण कराना जरूरी है। पहली बार ड्राइविंग लाइसेंस के लिए परिवहन विभाग में सरकार ने परीक्षा का प्रावधान भी लागू किया है, जिसमें परिवहन विभाग अपने ट्रेक पर गाडी चलाने की और यातायात नियमावली की परीक्षा लेता है। सूत्रों के अनुसार लाइसेंस फीस पांच हजार रुपए के साथ कॉमर्शियल वाहनों को चलाने के लिए लाइसेंस आवेदन के साथ ड्राइविंग स्कूल का प्रमाण पत्र अनिवार्य है। लेकिन एक भी ड्राइविंग स्कूल स्तरीय न होने से केंद्र सरकार की हादसों पर अंकुश लगाने की मुहिम को पलीता लगता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय जल्द ही नए दिशा निर्देश जारी करने की तैयारी में है जिसमें ऐसे ड्राईविंग स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान होगा, जो इन स्कूलों के संचालन या खोलने संबन्धी नियमों का उल्लंघन करते आ रहे हैं।
कया हैं ड्राइविंग स्कूल के नियम
सूत्रों के अनुसार परिवहन विभाग से लाइसेंस, प्रशिक्षण देने के लिए मोटर इंजीनियरिंग कर चुका प्रशिक्षक, वाहन सिखाने के लिए पांच साल कॉमर्शियल वाहन चला चुके अनुभवी चालक, खुद का एक वाहन होना जरूरी है। वहीं वाहन में दोहरे नियंत्रण की सुविधा अनिवार्य है और प्रशिक्षण के लिए आवश्यक मॉडल संकेत, यातायात चिन्ह, वाहन के सभी पार्ट्स के ब्योरे वाला चार्ट प्रशिक्षण स्कूलों में होना भी जरूरी है। इसी प्रकार मोटरयान का इंजन, गियर बॉक्स, टायर लिवर, पंक्चर किट, व्हील ब्रेस, जैक, स्पैनर, परिसर में आपातस्थिति के लिए उपचार पेटिका, परिसर में ट्रैफिक संकेतकों युक्त ट्रैक होना जरूरी है। मंत्रालय के अनुसार देशभर में अधिकांश ऐसे ड्राईविंग स्कूलों में कराए गये एक निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया गया है।
लाइसेंस प्रक्रिया होगी आसान
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार जहां सड़क हादसों में कमी लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने नए मोटर वाहन विधेयक में सख्त प्रावधान किये है, वहीं हरेक वाहन चलाने वाले चालकों को ड्राईविंग लाइसेंस मुहैया कराने की दिशा में ड्राईविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत लाइसेंस बनवाने वालों को स्वयं का घोषणा पत्र दाखिल करने का प्रावधान किया गया है। सभी दस्तावेज नोटरी से प्रमाणित कराना जरूरी होगा। निवास प्रणामपत्र के तौर पर वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट, बिजली बिल, पानी बिल, बैंक की पासबुक जिस पर पता लिखा हो के अलावा टेलीफोन बिल, का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। आयु के लिए दसवीं क्लास का सर्टिफिकेट, बर्थ सर्टिफिकेट, पैन कार्ड और आधार कार्ड मान्य किया जाएगा। आवेदन जमा करने के बाद संबन्धित व्यक्ति का यातायात नियमों से संबन्धित एक टेस्ट लिया जाएगा। इसके बाद ही छह माह की अवधि के लिए लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाएगा। छह माह बाद लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस को आरटीओ कार्यालय में जमा करवाने के बाद एक और ड्राइविंग टेस्ट लिया जाएगा इस टेस्ट को पास करने के बाद आपका ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा।
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