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संयुक्त राष्ट्र के साथ भारत ने किया करार, सड़क हादसों पर लगेगी लगाम

अंतर्राष्ट्रीय सड़क महासंघ ने भारत में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है।

संयुक्त राष्ट्र के साथ भारत ने किया करार, सड़क हादसों पर लगेगी लगाम
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नई दिल्ली. देश में बढ़ते सड़क हादसों पर अंकुश लगाने की कवायद में जुटी केंद्र सरकार ने 2020 तक दुर्घटनाओं में हो रही मौतों को 50 फीसदी कम करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के एक दशकीय कार्ययोजना पर हस्ताक्षर भी किये हैं। देश में बढ़ते सड़क हादसों पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। केंद्र सरकार की सड़क सुरक्षा अभियान में भागीदारी कर रहे वैश्विक सड़क सुरक्षा संगठन अंतर्राष्ट्रीय सड़क महासंघ (आईआरएफ) ने भारत में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों पर गहरी चिंता जताई है।
देश में सड़क हादसों और उसमें होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने की दिशा में सड़क सुरक्षा को लेकर आईआरएफ ने संयुक्त राष्ट्र की एक दशकीय कार्य योजना की सिफारिशें लागू करने में हुई नाकामी पर भी चिंता जताई और हाल ही में इस कार्य योजना के तहत 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं से हुई मौतें 50 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के साथ हस्ताक्षर किये हैं। वहीं अंतर्राष्ट्रीय सड़क महासंघ ने भारत सरकार और संसद की स्थायी समिति से संशोधित केंद्रीय मोटर कानून को संसद में पारित कराने का अनुरोध किया है। दरअसल वर्ष 2016 के अंत में भारत,संयुक्त राष्ट्र के दशकीय कार्य योजना के मध्य में है और देश के सामने वर्ष 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी लाने का एक विशाल लक्ष्य सामूहिक राजनैतिक इच्छाशक्ति की बाट जोह रहा है, जिसके लिए सभी राजनीतिक दलों को तमाम मतभेद भुलाकर आगे आना आज के वक्त की जरूरत है।
चुनौतियां से कम नहीं मुहिम
अंतरराष्ट्रीय सड़क महासंघ के चेयरमैन के के कपिला ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर भारत में काफी चुनौतियां और मुश्किलें हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का हवाला देते हुए कपिला ने कहा कि वर्ष 2015 के दौरान देश में सड़क दुर्घटनाओं में 1.46 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई हैं, जो दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौतों का 10 फीसदी है। भारत ने सड़क सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र के एक दशकीय कार्य योजना पर हस्ताक्षर करके वर्ष 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें 50 फीसदी कम करने का लक्ष्य रखा है।
कानून से दूर होगी समस्या
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की तमाम कोशिशों के बावजूद मोटर व्हीकल एक्ट (एमवीए) संशोधन बिल 2016 संसद में कई सालों से लटका है। आईआरएफ ने संसदीय स्थायी समिति के चेयरमैन मुकुल रॉय से आग्रह किया है कि संसद के मौजूदा सत्र में ही सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन पास कराया जाना चाहिए। मोटर व्हीकल एक्ट (एमवीए) में बहुप्रतीक्षित संशोधन, इंजीनियरिंग के नजरिए से सड़कों में सुधार, सड़क निर्माण के सभी चरणों में सुरक्षा आॅडिट, दुर्घटनाओं वाले स्थान यानी ब्लैक स्पॉट की पहचान और मरम्मत जैसे कदम जल्द से जल्द उठाने की जरूरत है। ताकि देश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम से कम किया जा सके। इस विधेयक के बारे में कपिला का कहना है कि यह नया कानून लागू होने से ओवर स्पीडिंग और शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों को मौजूदा जुमार्ने से करीब दस गुना जुमार्ना भरने जैसे प्रावधान इस दिशा में अहम होंगे।
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