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खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.77 प्रतिशत हुई, तीन माह के निचले स्तर पर औद्योगिक उत्पादन

खनन उत्पादन गिरने से अगस्त महीने में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि गिरकर तीन महीने के निचले स्तर 4.3 प्रतिशत पर आ गयी। दूसरी तरफ ईंधन एवं खाद्य कीमतें बढ़ने से सितंबर महीने की खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.77 प्रतिशत पर पहुंच गयी। इससे निकट भविष्य में रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरें बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। हालांकि, खुदरा मुद्रास्फीति अब भी रिजर्व बैंक के मध्यम अवधि के चार प्रतिशत लक्ष्य के दायरे में बनी हुई है। रिजर्व बैंक की अगली नीतिगत बैठक पांच दिसंबर को होने वाली है।

खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.77 प्रतिशत हुई, तीन माह के निचले स्तर पर औद्योगिक उत्पादन
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खनन उत्पादन गिरने से अगस्त महीने में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि गिरकर तीन महीने के निचले स्तर 4.3 प्रतिशत पर आ गयी। दूसरी तरफ ईंधन एवं खाद्य कीमतें बढ़ने से सितंबर महीने की खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.77 प्रतिशत पर पहुंच गयी। इससे निकट भविष्य में रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरें बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। हालांकि, खुदरा मुद्रास्फीति अब भी रिजर्व बैंक के मध्यम अवधि के चार प्रतिशत लक्ष्य के दायरे में बनी हुई है। रिजर्व बैंक की अगली नीतिगत बैठक पांच दिसंबर को होने वाली है।

इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘‘सितंबर महीने में खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के दायरे में रहने के हमारे अनुमान के अनुकूल है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रुपये में तेज गिरावट तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि से आगामी तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत को पार कर सकती है।' रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा पांच दिसंबर को होनी है।
नायर ने कहा, ‘‘इन जोखिमों के साथ ही रिजर्व बैंक द्वारा अपने रुख को तटस्थ से संतुलित सख्ती में बदलने से दिसंबर की नीतिगत बैठक में दरें बढ़ाने के संकेत मिलते हैं। हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के बचे समय में दरों को 0.25 प्रतिशत से 0.50 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।'
क्रिसिल रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा, ‘‘न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि से खुदरा कीमतों में समानुपातिक तेजी के बाद भी खुदरा मुद्रास्फीति सिर्फ 0.50 प्रतिशत बढ़ सकती है। इससे पता चलता है कि दिसंबर बैठक में भी मौद्रिक नीति समिति दरों को यथावत रख सकती है।' ईंधन, खाद्य पदार्थों के ऊंचे दाम से खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में मामूली रूप से बढ़कर 3.77 प्रतिशत पर पहुंच गई।
सरकारी आंकड़े के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर इससे पिछले महीने 3.69 प्रतिशत थी। यह 10 महीने का न्यूनतम स्तर था। हालांकि, सितंबर महीने में बढ़ने के बाद भी मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के दायरे में ही है। अनाज, मांस और मछली, अंडा, दूध उत्पाद जैसी श्रेणियों में खुदरा मुद्रास्फीति में तेजी का रुख बना हुआ है।
हालांकि, फलों के मामले में मुद्रास्फीति सितंबर में नरम रही। कुल मिलाकर उपभोक्ता खाद्य श्रेणी में महंगाई दर बढ़कर 0.51 प्रतिशत रही जो अगस्त में 0.29 प्रतिशत थी। ईंधन और प्रकाश श्रेणी की बात की जाये तो सितंबर माह में इस वर्ग में मुद्रास्फीति 8.47 प्रतिशत रही।
उद्योग एवं वाणिज्य संगठन एसोचैम ने कहा, ‘‘...अंतत: खुदरा मुद्रास्फीति से ब्याज दरों पर हो सकने वाले किसी भी असर की आशंका अब टल गयी है क्योंकि यह रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के दायरे के लक्ष्य के अंतर्गत है।'
इस बीच केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (सीएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, खनन क्षेत्र के उत्पादन में गिरावट तथा पूंजीगत वस्तुओं के कमजोर प्रदर्शन से अगस्त महीने में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि धीमी पड़कर 4.3 प्रतिशत रह गयी। तीन महीने में आईआईपी में यह सबसे कम वृद्धि रही है।
सीएसओ के मुताबिक पिछले साल इसी महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 4.8 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई थी। खनन क्षेत्र का उत्पादन पिछले साल अगस्त में 9.3 प्रतिशत बढ़ा था जो इस साल अगस्त में 0.4 प्रतिशत गिर गया। इसी तरह आलोच्य अवधि के दौरान पूंजीगत वस्तुओं की उत्पादन वृद्धि 7.3 प्रतिशत से कम होकर पांच प्रतिशत रह गई। अगस्त महीने में आईआईपी की वृद्धि मई के बाद सबसे कम रही है।
मई में यह 3.9 प्रतिशत रही थी उसके बाद जून में 6.8 प्रतिशत और जुलाई में 6.5 प्रतिशत दर्ज की गई। आलोच्य माह के दौरान विद्युत उत्पादन पिछले साल के 8.3 प्रतिशत की तुलना में 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।
उपयोग आधारित वर्गीकरण के हिसाब से अगस्त 2018 में वृद्धि दर प्राथमिक वस्तुओं में 2.6 प्रतिशत, माध्यमिक वस्तुओं में 2.4 प्रतिशत और संरचनात्मक या निर्माण संबंधी वस्तुओं में 7.8 प्रतिशत रही है। टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और गैर-टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद में वृद्धि दर इस दौरान क्रमश: 5.2 प्रतिशत और 6.3 प्रतिशत रही है।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त के दौरान आईआईपी में औसत वृद्धि 5.2 प्रतिशत रही है। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 2.3 प्रतिशत अधिक रही है।

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