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कच्चे तेल के दाम बढ़ने से RBI अगस्त में दरें बढ़ाने को हो सकता है मजबूर

कच्चे तेल के दाम बढ़ने का देश में मुद्रास्फीति पर असर पड़ सकता है और इससे रिजर्व बैंक अगस्त में होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

कच्चे तेल के दाम बढ़ने से RBI अगस्त में दरें बढ़ाने को हो सकता है मजबूर
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कच्चे तेल के दाम बढ़ने का देश में मुद्रास्फीति पर असर पड़ सकता है और इससे रिजर्व बैंक अगस्त में होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करने पर मजबूर होना पड़ सकता है। एक विदेशी ब्रोकरेज एजेंसी ने कहा है कि हालांकि शीर्ष बैंक जून में होने वाली आगामी समीक्षा में यथास्थिति बनाये रख सकता है।

ऑस्ट्रेलिया की ब्रोकरेज एजेंसी मेक्वेयरी ने कहा कि हम अब रिजर्व बैंक की ओर से अनुमानित समय से पहले ही दर में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि 0.25 प्रतिशत की पहली वृद्धि अब अगस्त में ही होगी जबकि पहले हम 2019 की पहली तिमाही में इस तरह की वृद्धि का अनुमान लगाये हुये थे।

मौद्रिक समीक्षा बैठक 4 जून को

एजेंसी ने यह भी कहा कि शीर्ष बैंक (आरबीआई) आगामी मौद्रिक समीक्षा जो कि 4 जून को होनी है में नीतिगत दरों में यथास्थिति को बरकरार रख सकता है। गौरतलब है कि आगामी मौद्रिक समीक्षा नीति एक दिन पहले हो रही है और इस बार यह बैठक तीन दिन की होगी।

अनुमान था 2019 में बढ़ोत्तरी का

ऑस्ट्रेलियन ब्रोकरेज मैक्वैरी ने कहा कि अब हम उम्मीद करते हैं कि आरबीआई हाईक साइकिल की शुरुआत अनुमान से पहले शुरू करेगा और उम्मीद है कि पहली बढ़ोतरी अगस्त महीने में 0.25 फीसद की होगी, जबकि हमने इससे पहले अनुमान लगाया था कि ऐसा साल 2019 की पहली तिमाही में देखने को मिलेगा।”

दरों में इजाफे के ये हैं कारण

यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में जारी उछाल, बढ़ता चालू खाता घाटा और रुपये की कीमत में भारी गिरावट बड़ी मुश्किलें हैं। जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भी अनुमान लगाया है कि अगस्त की मौद्रिक समीति नीति की बैठक में आरबीआई नीतिगत दरों में 0.25 फीसद का इजाफा कर सकता है।

परिस्थिति देख अनुमान में बदलाव

ब्रोकरेज एजेंसी ने बाह्य परिस्थितियों में होते बदलाव को देखते हुये अपने अनुमान में बदलाव किया है। उसने कहा है कि अंतर्निहित आर्थिक कारक कमजोर नहीं है। हालांकि, उसके नोट में बाह्य परिस्थितियों के बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा गया।

रुपए में आई भारी गिरावट

एजेंसी ने कहा कि इस बात पर गौर किया जा सकता है कि हाल के समय में कच्चे तेल के मूल्यों में तेजी आई है।. चालू खाते का घाटा बढ़ा है और रुपये में भारी गिरावट आई है। अगस्त और अक्टूबर दोनों बैठकों में प्रत्येक में 0.25 फीसद का इजाफा देखने को मिल सकता है।

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