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उर्जित पटेल ने रचा ऐसा इतिहास, राजन से भी था संबंध- जानें उनके जीवन से जुडी रोचक बातें

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने 10 दिसंबर सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सितंबर 2016 में उर्जित पटेल ने आरबीआई के गर्वनर का पद संभाला था, उन्होंने रघुराम राजन की जगह ली थी।

उर्जित पटेल ने रचा ऐसा इतिहास, राजन से भी था संबंध- जानें उनके जीवन से जुडी रोचक बातें

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने 10 दिसंबर सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 1990 के बाद पटेल पहले गवर्नर हैं जिन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया है।

उर्जित पटेल का 3 साल का कार्यकाल सितंबर 2019 में पूरा होना वाला था। काफी समय से रिजर्व बैंक और सरकार के बीच चल रहे मतभेद के कारण उर्जित पटेल के इस्तीफे पर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि गवर्नर ने अपने स्टेटमेंट में इस्तीफा देने की वजह अपने निजी कारणों को बताया है। इस तरह उर्जित पटेल के अचानक इस्तीफे से हलचल मच गई है। इसलिए हम आपको उर्जित पटेल से जुड़े कुछ पुराने विवाद और जरूरी बातों बता रहे हैं.....

साल 2016 में उर्जित पटेल गर्वनर के पद संभाला था। आपको बता दें कि सितंबर 2016 में उर्जित पटेल ने आरबीआई के गर्वनर का पद संभाला था, उन्होंने रघुराम राजन की जगह ली थी, रघुराम राजन तीन साल तक इस पद पर रहे थे। उस समय उर्जित पटेल का नाम काफी चर्चा में रहा था।

गवर्नर बनने से पहले उर्जित पटेल मॉनेटरी पॉलिसी डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उसके बाद जब भारतीय रिजर्व बैंक के नए गवर्नर के तौर पर उनका नाम सामने आया था तो माहौल गर्म हो गया। पटेल रघुराम राजन के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।

उर्जित पटेल का जन्म 28 अक्टूबर 1963 को केन्या के नैरोबी में हुआ। उर्जित पटेल का पूरा नाम उर्जित रविंद्र पटेल है। वह एक हाई प्रोफाइल गुजराती फैमिली से हैं। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से बीए किया है इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एम. फिल और येल यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पीएचडी की थी। उर्जित पटेल के काम उर्जित पटेल ने वर्ष 1998 से 2001 तक भारत सरकार के ऊर्जा, आर्थिक मामलों से जुड़े विभागों में बतौर सलाहकार अपनी सेवाएं दी थी।

इंटरनेशनल मोनेट्री फंड यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में वह भारत, अमरीका, म्यांमार और बहामास आदि डेस्क पर 1990 से 1995 तक काम कर चुके हैं। आर्थिक मामलों के विभाग में सलाहकार गवर्नर बनने से पहले उर्जित पटेल अमरीकन थिंक टैंक माने जाने वाले बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के सलाहकार थे।

उर्जित पटेल रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ भी काम कर चुके हैं। उन्होंने भारत की मुद्रास्फीति दर तय करने वाले पैनल में प्रमुख सलाहकार की भी भू​मिका निभाई है। 1998 से 2001 के बीच वह वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग में सलाहकार के तौर पर भी रहे थे।

सितंबर 2016 में उर्जित पटेल ने आरबीआई के गर्वनर का पद संभाला था। तब कुछ समय बाद ही उर्जित और केंद्र सरकार के बीच जमकर तनातनी रही। तब सरकार रिजर्व बैंक का सेक्शन 7 लागू करने की बात पर उर्जित पटेल के इस्तीफा की आशंकाएं लगातार बनी हुई थीं। सरकार लगातार आरोप लगा रही थी कि इकोनॉमिस्ट के तौर पर रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल भारत के लिए ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।

इसके अलावा उर्जित पटेल ने साल 2016 में केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले पर भी सहमति नहीं जताई थी। जिसके कारण उर्जित पटेल और सरकार के बीच खींचातानी लगातार बढ़ती गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान किया था और 500-1000 रुपये के नोटों को बंद कर नये 500 और 2000 के नोट जारी करने की घोषणा की थी। संसद की एक समिति ने आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल को सरकार के नोटबंदी के कदम के बारे में जानकारी लेने के लिये तीसरी बार तलब किया था।

वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली वित्त मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने उर्जित पटेल से नोटबंदी के असर की रिपोर्ट मांगी थी, समिति में 31 सदस्य थे। समिति के सदस्य नोटबंदी और खास तौर पर इसके प्रभावों को लेकर कुछ और जानकारी और विवरण चाहते थे, इसलिए आरबीआई गवर्नर को एक ही मुद्दे पर समिति द्वारा तीन बार बुलाया गया था। उस दौरान यह मामला काफी गर्म रहा था जिस कारण लगातार उर्जित पटेल के इस्तीफे की खबरें उठती रही थीं।

वित्त मामलों को लेकर उर्जित पटेल और केंद्र सरकार के बीच तनातनी का माहौल काफी समय तक ठंडा नहीं हुआ था।

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