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RBI ने तय की ब्याज दरें

एसएलआर यानी की लिक्विडिटी रेशियो को 20.5 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है।

RBI ने तय की ब्याज दरें
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने आज रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, एसएलआर की दरें तय कर ली हैं। आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है इसे 6.25 प्रतिशत रखा है, वहीं रिवर्स रेपो रेट में भी कोई बदलाव नहीं किए गए हैं और इसे 6 प्रतिशत रखा गया है।

वहीं एस एल आर यानी की लिक्विडिटी रेशियो को 20.5 प्रिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे ब्याज पर असर पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की दो दिवसीय बैठक मंगलवार को शुरू हुई और आज बुधवार को ब्याज दरें तय की गईं।
क्या होता है एसएलआर-
एस एल आर ( SLR ) का मतलब सांविधिक चलनिधि अनुपात ( Statutory liquidity ratio )होता है । एसएलआर का उपयोग विकास में वृद्धि तथा मंदी को नियंत्रित करने हेतु किया जाता है ।

एस एल आर अर्थात सांविधिक चलनिधि अनुपात दर से अर्थव्यवस्था में धन की संचार को अच्छे से नियंत्रित किया जा सकता है ।

क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट-

रेपो रेट कम होने से बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और इसलिए बैंक ब्याज दरों में कमी करते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा रकम कर्ज के तौर पर दी जा सके। रीपो दर में बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह होता है कि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से रात भर के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। साफ है कि बैंक दूसरों को कर्ज देने के लिए जो ब्याज दर तय करते हैं, वह भी उन्हें बढ़ाना होगा।

नाम के ही मुताबिक रिवर्स रेपो दर ऊपर बताए गए रेपो दर से उलटा होता है। बैंकों के पास दिन भर के कामकाज के बाद बहुत बार एक बड़ी रकम शेष बच जाती है। बैंक वह रकम अपने पास रखने के बजाय रिजर्व बैंक में रख सकते हैं, जिस पर उन्हें रिजर्व बैंक से ब्याज भी मिलता है। जिस दर पर यह ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं।

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