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Republic Day Speech : 26 जनवरी पर गणतंत्र दिवस की परेड, जानें आजादी से लेकर अब तक गणतंत्र दिवस पर भारत आए चीफ गेस्ट की लिस्ट

26 जनवरी पर गणतंत्र दिवस 2019 की परेड गणतंत्र दिवस पर भाषण गणतंत्र दिवस पर निबंध और आजादी से लेकर अब तक गणतंत्र दिवस पर भारत आए चीफ गेस्ट की लिस्ट।

Republic Day Speech : 26 जनवरी पर गणतंत्र दिवस की परेड, जानें आजादी से लेकर अब तक गणतंत्र दिवस पर भारत आए चीफ गेस्ट की लिस्ट
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हिंदी में गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 (Republic Day Speech in Hindi 2019) पर लिखने या स्कूल में 26 जनवरी ((26 January) के लिए गणतंत्र दिवस पर निबंध हिंदी में (Republic Day Essay in Hindi 2019) लिखना है तो हरिभूमि गणतंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019) के मौके पर आपके लिए लाया है लेखिका 'नौशाबा परवीन' द्वारा लिखित गणतंत्र दिवस पर सबसे बेस्ट निबंध (Gantantra Diwas Par Nibandh)। 26 जनवरी 2019 (26 January 2019) के मौके पर भारत अपना 70वां गणतंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019 70th) मनाएगा।

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 / 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Speech in Hindi 2019 / 26 January / Republic Day Essay in Hindi 2019


पिछले दो दशकों में गणतंत्र दिवस की परेड देखने वाले दर्शकों की पीढ़ी बदल गई। तकनीक, बाजार, सूचना प्रौद्योगिकी विस्फोट और तमाम दूसरे कारकों ने पूरा परिदृश्य ही नहीं नयी पीढ़ी की नजर और नजरिया भी बदल डाला पर राजपथ पर प्रदर्शित की जाने वाली झंकियों में बमुश्किल कोई बदलाव आया है अब इसका तौर तरीका भी बदलना चाहिए।

समय के साथ आज भले ही मायने भी विस्तार पा गए हों पर कभी गणतंत्र दिवस का मतलब हमारे लिये एक अलस भरी सर्द सुबह ही नहीं छुट्टी के दिन भी जल्द जगने की सांसत का दिन था पर उस सांसत पर कई गुना भारी पड़ता था गणतंत्र दिवस का महत्व और सम्मान के अहसास के साथ स्कूल, कालेज के समारोह में शामिल होने की तैयारी। हम भोर से इसकी तैयारी में जुट जाते या फिर पूरी आस्था और उत्सुकता के साथ पहले रेडियो और जब टीवी घर में आया तब टीवी के सामने जम जाते।

अमर जवान ज्योति पर पुष्पांजलि हो या शौर्य सम्मान वितरण। सबसे जुड़े विवरण बड़े मनोयोग से देखते सुनते। कमेंट्री पर कान दिये रहते थे, रेडियो कमेंट्री तो वाकई जानदार होती थी। पूरे समारोह को समूची श्रद्धा से देखा सुना जाता था बिना शोर शराबे और यहां वहां हिले डुले क्योंकि ऊपर नीचे दोनो पीढियां साथ होती थीं सो मजाल है कि कोई उस दो तीन घंटे के बीच खामखां कहीं खिसक ले। देखते सुनते तो आदि से अंत तक थे पर पसंदगी की अपनी अपनी प्राथमिकतायें थीं, मेरे लिये इस फेहरिस्त में सबसे पहले होती थीं विभिन्न राज्यों और कतिपय मंत्रालयों की खास थीम पर बनी सजी मजेदार झांकियां, फिर सेना की परेड, अबकी बार मुख्य अतिथि कौन है क्यों है और उसका परिचय क्या है सबसे आखिरी बात होती थी।

यह ठीक है सबसे रोमांचक फ्लाईपास्ट लगता था। वह चाहे हेलीकॉप्टरों द्वारा फूलों की वर्षा वाला हो, फ्लाईपास्ट हो या सेना के जवानों द्वारा मोटर साइकल पर दिखाया जाने वाला हैरतअंगेज करतब वाला फ्लाईपास्ट, दोनों बेहद रोचक और रोमांचक लगते पर राज्यों और मंत्रालयों की झांकियों की परेड़ का क्या कहना, वे हमें चलते फिरते मेले का सा अहसास देते थे और बेहद बेसब्री से हम उनका इंतजार करते थे। वे हमें गजब भाते थे। इंफोटेनमेंट का फुल पैकेज होते थे।

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 / 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Speech in Hindi 2019 / 26 January / Republic Day Essay in Hindi 2019

ये झांकियां आज भी बदस्तूर जारी हैं। तकनीकी तौरपर सबल और अपेक्षाकृत आकर्षक भी। आज हर बार मैं झांकियां देख सकूं, संभव नहीं हो पाता, प्राथमिकताएं भी बदल गयी हैं पर अब के किशोर और बच्चों को उसे देखने की, झांकियों की महिमा बखानने की कोशिश करता हूं तो वे सुन तो लेते हैं देखते भी हैं पर मुझे लगता है मेरी जैसी उत्कंठा उनमें नहीं। कई कारण हो सकते हैं। हो सकता है उनको यह ज्ञान दर्शन न किताबी लगता हो, प्राथमिकताएं कुछ और हों या एक यह भी कि पीढ़ी बदल गयी पर झांकियां उस मुकाबले नहीं बदलीं। झांकियों से जो भारत झांकता है वह निस्संदेह समय के साथ बदला तो है पर उतना नहीं जितनी तस्वीर बदल गयी है।

गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान विभिन्न राज्यों से आई झांकियों के रूप में विजय चैक से ऐतिहासिक लालकिले तक दोनों ओर उत्साही जनता के विशाल हुजूम के बीच भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया जाता है, करोडांे लोग इसे टीवी पर देश विदेश में देखते हैं। ये झांकियां प्राचीनकाल से चली आ रही भारत की अनूठी एकता में पिरोई विविधताओं वाली विरासत, विविधतापूर्ण ऐतिहासिक, वास्तुशिल्प और सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक युग की विभिन्न क्षेत्रों में देश की उपलब्धियां, विभिन्न क्षेत्रों में देश की प्रगति और केंद्रीय मंत्रालयों तथा विभागों के उल्लेखनीय कार्यों को भी दिखाती है।

इनके जरिये प्रत्येक राज्य से अपने अनोखे त्यौहारों, ऐतिहासिक स्थलों और कला का प्रदर्शन करते हैं, इनमें संस्कृति की विविधता और समृद्धि का यह अनूठा रंग होता है। हर बार यह कुछ न कुछ बदलता है, नयी थीम आती है, कुछ अलग करने की कोशिश होती है पर इस कोशिश के बावजूद तकरीबन दो दशक से झांकियों का ढर्रा वहीं का वहीं है। किसी बडे़ से ट्रकनुमा चीज पर मंचीय व्यवस्था के तहत कुछ स्थिर तो कुछ गतिमान दृश्य। पारंपरिक वाद्ययंत्र या खेती किसानी के औजारों के साथ काम करते लोग या फिर आधुनिकता प्रदर्शित करने की बात हुयी तो चिर परिचित प्रदर्शन। सब कुछ खासा नाटकीय और कृत्रिम। परंपरागत और इंटरनेट के जमाने के हिसाब से बासी जानकारी और डिजिटल युग के थ्रीडी वाले माहौल में बाबा आदम के जमाने की प्रस्तुति के साथ।

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 / 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Speech in Hindi 2019 / 26 January / Republic Day Essay in Hindi 2019

कुछ बरस अगर ऐसा ही चला तो जो झांकियां तीन दशक पहले बच्चों, किशोरों से लेकर बडे़ बूढ़ों तक के लिये चाक्षुष, चर्चा का विषय और उत्सुकता भरी प्रतीक्षा होते थे ऊबाऊ प्रहसन में बदल जाने वाली हैं। निस्संदेह झांकिंयो की मूल अवधारणा में कहीं कोई खराबी नहीं, यह जरूरी भी है पर उसकी मूल आत्मा और विषय भी अपनी जगह दुरुस्त है।

देश की संस्कृति, विरासत और प्रगति इस अवसर पर प्रदर्शित होनी ही चाहिये पर यदि समय के साथ उसकी प्रस्तुति के तौर तरीके और नहीं बदले तो यह अपनी संप्रेषणीयता, प्रभावोत्पादकता और मायने खो देंगें। अभी वक्त है कि यह घोर घिसे पिटे ढर्रे और बेहद सरकारी काम निबटाऊ कामकाज की तरह खानापूरी वाली प्रकृति से निकालकर इसे नया रंग रूप नया कलेवर देने की कोशिश की जाये। इसमें नव्यतम विषयों का समावेश किया जाये, नयी तकनीक न सिर्फ इसे दर्शनीय बनाये बल्कि इसमें वाइ फैक्टर जोड़े, इसे चैंकाऊ बनाये।

इन झांकियों को देखने के बाद उसके तमाम अवयवों पर चर्चा हो वह बस एक कौतुक की तरह महज कुछ सैंकडों के लिये आखों के सामने से गुजर जाने और मिनटों में जेहन से उतर जाने वाली न हो। लोग अगली बार आने वाली इसी राज्य की झांकी की तुलना पिछली बार वाली से करने तक की याद रख सकें। यह अहसास कर सकें कि हां, हमारी विरासत और संस्कृति न सिर्फ महान है बल्कि विस्तृत और महाकाय भी है।

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 / 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Speech in Hindi 2019 / 26 January / Republic Day Essay in Hindi 2019

सबसे बड़ी बात कि बदले शैक्षिक माहौल, टीवी और उस पर लगातार उगली जा रही जानकारियां और विजुअल के अंबार तथा नये समय के किशोरों के दिखने, समझने के तौर तरीके इस कदर बदल गये हैं कि झाकियां बाइस्कोप भर बनकर रह गयी हैं। उनका कथन बहुत भोथरा हो गया है। फिर राज्यों की पहचान भी बदल रहे है।

कर्नाटक की पहचान अब वह नहीं है जो चार दशक पहले वह था या फिर जरूरी नहीं कि बिहार के उसी हस्त कौशल को जो सब जानते हैं या उत्तराखंड के लिये चूंकि केदारनाथ खबरों में रहा तो बस उसी को दर्शाया जाये। पंजाब हो या हरियाणा, असम हो या पश्चिम बंगाल विगत बरसों में इनकी पहचान और उसके प्रतीक तथा प्रतिमान बदले हैं, जहां तक बात संस्कृति और त्योहारों की है उसमें भी समय और बदलते माहौल बाजार तथा तकनीक के समावेश की झलक दिखती है और यह झांकियों से भी झलकना चाहिये पर ऐसा होता नहीं है।

नए परिदृश्य में ये झांकियां बनावटी और अवास्तविक सी लगती हैं, वर्तमान के किशोर बच्चों से कनेक्ट नहीं होती, कॉमिक सी लगती हैं। असल में इनके विषय वस्तु थीम निर्धारण में शोधार्थियों, बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों, प्रबुद्ध कलाकारों की बजाय कुछ ऐसे लोग शामिल होते हैं जिनका तात्कालिकता, व्यावहारिकता, सूचना संवाद और विशद सोच तथा कलात्मकता, रचनात्मकता से ज्यादा वास्ता नहीं होता। इसलिये झांकियां कौंध तो पहले भी नहीं पैदा करती थीं अब उत्सुकता और बहुत प्रेरणास्पद भी नहीं लगतीं।

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 / 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Speech in Hindi 2019 / 26 January / Republic Day Essay in Hindi 2019

हमारा गौरवशाली इतिहास हो या प्राचीन वैज्ञानिक दार्शनिक विरासत इनको आमजन में तार्किक और सैद्धंतिक तौरपर स्थापित करने की बात हो या फिर समाज में महिलाओं के प्रति व्यवहार, सामाजिक समरसता को बेहतर बनाने की बात अथवा स्वच्छता अभियान या पारसियों की घटती आबादी की चिंता इन जैसे मुद्दों को इस अतिशय व्यापक मंच पर बेहद प्रेरक तरीके से रखा जा सकता है।

इस बार भारतीय सेना के तीनो अंगों में कार्यरत महिलायें भी हिस्सा लेंगी यह एक बेहतर पहल है, पर जवान के साथ साथ किसानों की भी परेड क्यों नहीं, सैन्य क्षमता और उसके हर हथियारों की ताकत का प्रदर्शन तो ठीक पर कृषि के क्षेत्र में क्या हम कोई कीरत नहीं लिखते या कि दिखाने के लायक कुछ नहीं रहता।

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 / 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Speech in Hindi 2019 / 26 January / Republic Day Essay in Hindi 2019

फिर गण के तंत्र में जवान और किसान के साथ वे लोग भी महत्वपूर्ण है जो निर्माण या उद्यम अथवा विज्ञान या इन्नोवेशन से जुड़े है या फिर सही अर्थों में देश की कीर्ति पताका फहरायी है। उनका परेड क्यों नहीं। बाघ से निहत्थे भिड़ जाने वाले, डूबने से जान बचाने वाले वीर बालको का हाथी पर बिठा जुलूस तो ठीक लेकिन खेल, कौशल या मेधा में राष्ट्रीय, अंतररष्ट्रीय स्तर पर चकित कर देने वाले श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रेरणास्पद बच्चों की भी तो झांकी हो सकती है।

गुजरात में एक कारोबारी ने कॉरपोरेट कल्चर को जिस खूबी के साथ मानवीय पहलू के साथ जोड़ा वह चर्चा का सबब रहा। उक्त कारोबारी के हिसाब से यह ठेठ भारतीय कारोबारी संस्कृति है क्या इस संस्कृति की भी झलक दिखाती कोई झांकी दिख सकती है। इसरो के कमाल को कुछ चैंका देने वाले अंदाज में प्रस्तुत किया जा सकता है क्या? यह ठीक है कि इस बार अत्याधुनिक स्कूल की झांकी दिखाई जायेगी और बुलेट ट्रेन की झांकी के जरिये रेल में आ रही तेज रफ्तारी की झलक दिखाये जाने की बात हो रही है। यह और ऐसे की कुछ और पहल स्वागत योग्य हैं लेकिन अब देखना यह होगा कि इनकी प्रस्तुति भी नव्यतम और रुचिकर तथा प्रभावोत्पादक हो।

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 / 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Speech in Hindi 2019 / 26 January / Republic Day Essay in Hindi 2019

झांकी अभी बाकी है

गणतंत्र दिवस के समारोह का मतलब केवल राजपथ की झांकी और सेना की परेड ही नहीं है। 26 जनवरी से पहले ही कई कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। लाल किले का मुशायरा, कवि सम्मेलन, पंजाबी कवि दरबार और सिंधी कवि सम्मेलन का आयोजन इत्यादि इसमें प्रमुख हैं। आधिकारिक तौरपर गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह 24 से 29 जनवरी तक का है। 24 जनवरी को सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों के साथ मिलकर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार लोकतरंग नामक लोकनृत्य समारोह आयोजित करता है जो 29 तारीख तक चलता है।

26 जनवरी को इंडिया गेट पर परेड के आयोजन के बाद सभी महत्वपूर्ण सरकारी भवनों को उस शाम से लेकर 29 की रात को रोशन किया जाता है। 27 जनवरी को प्रधानमंत्री की रैली में एनसीसी कैडेट्स द्वारा चैंका देने वाले करतब दिखाये जाते हैं और ड्रिल होता है। 28 जनवरी को विभिन्न सांस्कृतिक समारोह होते हैं तो 29 जनवरी की शाम को बीटिंग द रिट्रीट के आयोजन के साथ गणतंत्र दिवस का समापन समारोह सम्पन्न होता है।

गणतंत्र दिवस समारोह-एक झांकी

सन 1950 में आजाद भारत के अंतिम गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राज गोपालाचारी ने 26 जनवरी बृहस्पतिवार को सुबह दस बजकर अठारह मिनट बाद भारत को संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया और दस बजकर चैबीस मिनट के ठीक बाद बाबू राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले राष्ट्रपति के बतौर शपथ ली। दस बजकर 30 मिनट पर उन्हें तोपों की सलामी दी गई। शाम को समारोह हुआ।

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 / 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Speech in Hindi 2019 / 26 January / Republic Day Essay in Hindi 2019

पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को राजपथ की बजाय इर्विन स्टेडियम (वर्तमान नेशनल स्टेडियम) में हुआ था। परेड को देखने के लिए 15 हजार दर्शक जुटे। मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो थे।

1951 से गणतंत्र दिवस का समारोह किंग्स-वे यानी राजपथ पर होना तय हुआ। उस साल परेड गोल डाकखाना पर खत्म हुई थी।

1952 से बीटिंगरिट्रीट का कार्यक्रम आरंभ हुआ।

1953 में पहली बार लोक नृत्य और आतिशबाजी भी इसमें शामिल हुई

1954 में एनसीसी की लड़कियों के दल ने पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लिया।

1950 से 1954 के बीच गणतंत्र दिवस समारोह कभी इर्विन स्टेडियम, किंग्सवे, लाल किला और रामलीला मैदान में हुआ न कि राजपथ पर।

सन् 1955 से ही राजपथ पर नियमित रूप से गणतंत्र दिवस परेड की शुरूआत हुई और विधिवत झांकियों की भी।

सभी झांकियां 8 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करती हैं रायसीना हिल से शुरू होकर राजपथ, इंडिया गेट से गुजरती हुई लाल किला तक जाती है।

1955 में लाल किले के दीवान-ए-आम में गणतंत्र दिवस पर मुशायरे की परंपरा शुरू हुई।

सन् 1958 से राजधानी में सरकारी भवनों पर रोशनी करने की शुरूआत हुई तो सन् 1959 से गणतंत्र दिवस समारोह में दर्शकों पर वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से फूल बरसाना और सन् 1960 में पहली बार बहादुरी के लिये सम्मानित बच्चों को हाथी पर बिठाया गया।

गणतंत्र दिवस परेड और बीटींग रिट्रीट समारोह पहले बिना टिकट होते थे, टिकटों की बिक्री 1962 में शुरू हुई।

अमर जवान ज्योति पर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने की परंपरा सन् 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शुरू की।

ओबामा से पहले अब तक अतिथि

गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बुलाने की परंपरा पहले गणतंत्र दिवस के समारोह से ही है। महामहिम राष्ट्रपति के साथ एक उल्लेेखनीय विदेशी राष्ट्रो के प्रमुख आते हैं, जिन्हें आयोजन के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। यह अलग बात है कि कुछ एक वर्षों में इस परिपाटी का पालन न हो सका पर विगत एक डेढ दशक से यह बदस्तूर जारी है। मुख्य अतिथि का चयन राजनीतिक, आर्थिक, सामजिक और वैदेशिक संबंधों को ध्यान में रखकर किया जाता है। फिलहाल गणतंत्र दिवस पर पहली बार विश्व के सबसे ताकतवर नेता यानी अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा पधार रहे हैं और इसलिए इस बार का समारोह कई मायने में खास बन गया है।

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 / 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Speech in Hindi 2019 / 26 January / Republic Day Essay in Hindi 2019

ओबामा के आने की गहमा गहमी के बहाने इस परंपरा पर एक विहंगम-गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि-

साल अतिथि

1950 इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो

1954 भूटान के राजा जिग्मे दोरजी वांगचुक

1955 पाकिस्तानी गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मुहम्मद

1958 चीनी मार्शल ये जिंगयिंग

1960 सोवियत संघ के राष्ट्रपति क्लिमेंट वोरोशिलोफ

1961 ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय

1963 कंबोडिया के राजा नरोदोम सिंहानुक

1965 राना अब्दुल हमीद, पाकिस्तान

1968 सोवियत संघ के प्रधानमंत्री एलेक्सी कोस्यागिन तथा युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसेफ ब्रॉज टीटो

1969 बुल्गारिया के प्रधानमंत्री तोदोर झिवकोव

1971 तंजानिया के राष्ट्रपति जूलियस न्येरेरे

1972 मारीशस के प्रधानमंत्री सीव सागर रामगूलाम

1973 जेरे के राष्ट्रपति मोबोतु सेसे सेको

1974 युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसेफ ब्रॉज टीटो एवं श्रीलंका के प्रधानमंत्री सिरीमाओ रत्वाते दियास बंडारनायके

1975 जाम्बिया के राष्ट्रपति केनेथ कोंडा

1976 फ्रांसीसी प्रधानमंत्री जॉक शिराक

1977 पोलैंड के प्रथम सचिव एडवर्ड गाइकरेक

1978 आयरलैंड के राष्ट्रपति पैट्रिक हिलेरी

1979 ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम फ्रेसर

1980 फ्रांस के राष्ट्रपति वैली गिस्कार्ड द एस्तिंग

1981 मैक्सिको के राष्ट्रपति होये लोपेज पोर्तिलो

1982 स्पेन के राजा जुआन कार्लोस

1983 नाइजीरिया के राष्ट्रप्रमुख शेहू शगारी

1984 भूटान के राजा जिग्मे सिंग्ये वांग्च्युक

1985 अर्जेंटीना के राष्ट्रपति राउल अलफॉंसिन

1986 ग्रीस के प्रधानमंत्री आंद्रीई पपेंद्रू

1987 पेरू के राष्ट्रपति अलन गार्सिया

1988 श्रीलंका के राष्ट्रपति ज्यूलियस जयवर्धने

1989 वियतनाम के जनरल सेकेट्री न्ग्युएन वान लिन्ह

1990 मारीशस के प्रधानमंत्री अनीरुद्द जगन्नाथ

1991 मालदीव के राष्ट्रपति ममून अब्दुल गयूम

1992 पुर्तगाल के राष्ट्रपति मारियो सुआरेस

1993 ब्रिटेन के प्रधानमंत्री जाॅन मेजर

1994 सिंगापुर के प्रधानमंत्री गोह तोंग

1995 दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला

1996 ब्राजील के राष्ट्रपति डा. फर्नांडो हेनरिक कार्दो

1997 त्रिनिदाद और टोबैगो के प्रधानमंत्री बसदेवपाण्डे

1998 फ्रांस के राष्ट्रपति जाक शिराक

1999 नेपाल के राजा बीरेंद्र बीर बिक्रम शाह देव

2000 नाइजीरिया के राष्ट्रपति ऑलेसगन ओब्सांजे

2001 अलजीरिया के राष्ट्रपति अब्देलजीज बुत्फिल्का

2002 मॉरीशस के राष्ट्रपति कासेम उत्तम

2003 ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी

2004 ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा

2005 भूटान के राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक

2006 सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुलअजीज अल सऊद

2007 रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

2008 फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी

2009 कजाखस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव

2010 कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली म्युंगबाक

2011 इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुसीलो युधोयोनो बमबांग

2012 थाईलैंड के प्रधानमंत्री यिंगलक चिनावाट

2013 भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक

2014 जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे

2015 अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा

2016 फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद

2017 संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान

2018 आसियान देशों के प्रतिनिधि

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 / 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Speech in Hindi 2019 / 26 January / Republic Day Essay in Hindi 2019

26 जनवरी का दिन आस्ट्रेलिया का है राष्ट्रीय दिवस

26 जनवरी का दिन हमारे ही साथ ऑस्ट्रेलिया के लिए खास है। 26 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया में सरकार द्वारा घोषित आधिकारिक राष्ट्रीय दिवस होता है। इसे ऑस्ट्रेलियाडे भी कहा जाता है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री इस मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं। 26 जनवरी को ही ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश उपनिवेश की शुरुआत मानी जाती है।

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