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गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 : स्कूल में 26 जनवरी के लिए गणतंत्र दिवस पर निबंध यहां से लिखें

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 (republic day speech 2019) की तयारी और स्कूल में 26 जनवरी (26 January) के लिए गणतंत्र दिवस पर निबंध (Republic Day Essay) बनाने के लिए ये लेख आपके लिए मददगार साबित होगा।

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 : स्कूल में 26 जनवरी के लिए गणतंत्र दिवस पर निबंध यहां से लिखें

गणतंत्र दिवस पर भाषण 2019 (republic day speech 2019) की तयारी और स्कूल में 26 जनवरी (26 January) के लिए गणतंत्र दिवस पर निबंध (Republic Day Essay) बनाने के लिए ये लेख आपके लिए मददगार साबित होगा। गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी के अवसर पर दिल्ली स्थित राजपथ पर सेना, अर्द्ध सैनिक बल और दिल्ली पुलिस के जवानों की परेड बेहद आकर्षक लगती है। साथ ही एनसीसी कैडेट्स और सांस्कृतिक कलाकारों की झाकियां मन मोह लेती हैं। इसके पीछे होती है शीतलहरी और कोहरे-धुंघ के बावजूद इनकी कठोर तैयारी।

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26 जनवरी

देश की राजधानी दिल्ली में ठंड ने इस बार पिछले 45 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। शाम और सुबह तो इस कदर ठंड महसूस होती है मानो आप बर्फीले तूफानों से मुकाबिल हों। लेकिन ठंड कितनी भी पड़ रही हो, फिर भी दिसंबर माह से शुरू होकर जनवरी में 26 जनवरी से पहले तक चलने वाली सेना की रिहर्सल परेड में आज तक कभी कोई जरा सा भी हेर-फेर या बदलाव नहीं हुआ। बारिश हो रही हो, पाला गिर रहा हो, कोहरे की धुंध छाई हो या चमकीली सुबह हो। सैनिकों को इस सबसे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता। हर साल की तरह इस बार भी यही हो रहा है।

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एक महीने होता है 26 जनवरी परेड रिहर्सल

गणतंत्र दिवस की तैयारियां इन दिनों जोरों पर हैं, क्योंकि गणतंत्र दिवस के मौके पर सेना के सभी अंगों के सशस्त्र बलों की टुकड़ियां अपनी जिस आकर्षक परेड से देश ही नहीं दुनिया का दिल जीतती हैं, उसके लिए बहुत अभ्यास की जरूरत पड़ती है ताकि आखिरी मौके पर भरपूर परफेक्शन दिखे। यह परफेक्शन यूं ही नहीं आ जाता इसके लिए बहुत मेहनत करनी होती है। सैनिकों को एक महीने से ज्यादा समय तक लगातार इसके लिए अभ्यास करना होता है। इन दिनों वही अभ्यास युद्ध स्तर पर जारी है। साथ ही पहले से कहीं ज्यादा रिहर्सल और फिनिशिंग टच की जरूरत होती है।

गणतंत्र दिवस 2019 : 26 जनवरी की परेड

26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड की जबर्दस्त तैयारियां

कुछ घंटे चलने वाली रिपब्लिक डे की इस परेड की तैयारियों में बड़ा लंबा समय लगता है। परेड आयोजन की पहली बैठक सितंबर-अक्टूबर के महीने में ही हो जाती है। फिर इसके बाद शुरू होता है सिलसिला विभिन्न विभागों द्वारा परेड में शामिल होने के लिए कार्यक्रम तैयार करने का। वैसे तो पूरी परेड लोगों का मन-मोहती है लेकिन स्कूली बच्चों की टुकड़ियां, दिल्ली पुलिस की परेड, विभिन्न झांकियां, लोक नर्तकों के दल आदि परेड के विशेष आकर्षण होते हैं। इसमें शामिल होने वाला हर दल लगभग दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह से स्थानीय तौर पर तैयारियां शुरू कर देता है। लेकिन सैनिकों की परेड दिल्ली में ही होती है और उसी राजपथ पर होती है, जहां वास्तविक परेड होनी होती है।

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आकर्षक सेना के बैंड

सालों से दिल्ली की शीतलहर और गणतंत्र दिवस एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। इन दिनों जबकि दिल्ली में शीत लहर चल रही है थल सेना, वायु सेना और नौ सेना के बैंड अपने-अपने क्षेत्र में, कोहरे भरे माहौल में सुबह 6:00 बजे से विभिन्न मधुर धुनें बजाते हुए वातावरण को मनोहारी बना देते हैं। स्कूली बच्चों की टुकड़ियां भी 10-15 दिसंबर से पूर्वाभ्यास शुरू कर देती हैं। विभिन्न प्रदेशों के झांकी बनाने वाले दल राजधानी में डेरा डालकर झांकियों को स्वरूप देने में जुट जाते हैं। इसी दौरान 15 जनवरी को थल सेना दिवस पड़ता है। थल सेना दिवस परेड समारोह का पूरा दल-बल गणतंत्र दिवस में शिरकत करता है। सशस्त्र सेनाओं के उपयोग में आने वाले अस्त्र-शस्त्र, आधुनिक उपकरण भी परेड का हिस्सा होते हैं।

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एनसीसी कैडेट्स की तैयारी

इन सबसे हटकर परेड की तैयारियां करते हैं एनसीसी के कैडट्स। दिल्ली कैंट के गैरीसन मैदान पर देश के विभिन्न राज्यों के कैडेट इकट्ठे होते हैं और एनसीसी के गणतंत्र दिवस के वार्षिक कैंप में हिस्सा लेते हैं। गैरीसन मैदान पर सुबह पांच बजे से उनकी जो गतिविधियां शुरू होती हैं, वे रात 11:00-11:30 कैंप फायर के साथ समाप्त होती हैं। एक छोटा भारतवर्ष इकट्ठा होता है वहां। दिनभर तरह-तरह के कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। पूरे देश में एनसीसी की 774 यूनिटें हैं, जिन्हें 16 क्षेत्रो में बांटा गया है। एनसीसी के लगभग 13 लाख कैडेटों में 17 प्रतिशत लड़कियां हैं। एनसीसी के वार्षिक गणतंत्र दिवस का सबसे प्रतिष्ठित दिन होता है प्रधानमंत्री की रैली। इस दिन कैंप का समापन होता है और समापन समारोह में खुद प्रधानमंत्री कैडेट्स को संबोधित करते हैं और पुरस्कृत भी। इस रैली में ईनाम पाना एनसीसी कैडेट्स का सपना होता है।

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मन मोहते सांस्कृतिक कार्यक्रम

नई दिल्ली में आयोजित होने वाला गणतंत्र दिवस समारोह सामाजिक सद्भाव का सबसे बड़ा प्रतीक है। लोग दूर-दूर से 26 जनवरी के परेड देखने आते हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर पूरी दिल्ली समारोहों के रंग में रंगी रहती है। रोज शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। कवि सम्मेलन, मुशायरा और कवि दरबार लगते हैं। लोक नृत्य समारोह होते हैं। असम की बीहू, छत्तीसगढ़ का नाचा, बंगाल की जात्रा, पंजाब का गिद्दा और भांगड़ा, गुजरात का गरबा और महाराष्ट्र की लावणी समां बांध देते हैं। दक्षिण भारतीय नृत्य भी लोगों को मोहने में पीछे नहीं रहते।

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26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड में सुरक्षा चाक-चौबंद

  • आयोजकों के लिए पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा की व्यवस्था एक बड़ा काम हो गया है। जब नेहरू जी प्रधानमंत्री थे तब इंडिया गेट के लॉन पर बैठे बच्चे परेड शुरू होने से पहले दौड़कर अपने चाचा नेहरू को छू लेते थे, कुछ उनसे हाथ मिला लेते थे तो कुछ उनके हस्ताक्षर भी ले लेते थे।
  • यह सब होता था परेड के थोड़ी देर पहले। अब सुरक्षा की दृष्टि से अनेक दायरे बनाए जाते हैं। दर्शक अपना अहाता नहीं छोड़ सकते। गणतंत्र दिवस समारोह का समापन होता है विजय पथ पर होने वाले ‘द बीटिंग रिट्रीट’ कार्यक्रम से। एक घंटे चलने वाले इस कार्यक्रम का दूरदर्शन सीधा प्रसारण करता है।
  • थल, वायु और नौ सेना के बैंड इसमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। दिल्ली वासियों के लिए पूरे जनवरी माह में उत्सव का माहौल होता है। इसमें कश्मीर से कन्याकुमारी तक के लोग शामिल होते हैं। इस उत्सव के साथ पूरा भारत सिमट आता है, इस छोटी सी दिल्ली में।
  • इंद्रधनुष के रंगों से रंगी राजधानी शीतलहर की बर्फीली हवाओं पर भारी पड़ती है और कोहरे में से उठती है एक छवि समूचे देश की। हंसता-खिलखिलाता देश सभी को एक साथ लिए हुए अपनी विकास यात्रा पर बढ़ रहा हो जैसे।

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टीवी चैनलों पर 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का प्रसारण

इन दिनों जब दिल्ली अमूमन नींद में होती है, राजपथ में सैनिकों के बूटों की पदचाप गूंज रही होती है। चूंकि अब गणतंत्र दिवस की परेड को दूरदर्शन और प्राइवेट टीवी चैनलों के माध्यम से देश के कोने-कोने में, घर-घर तक देखा जा सकता है। इसलिए इसके परफेक्शन की और भी कहीं ज्यादा जरूरत होती है। एक जमाने में परेड का सिर्फ आंखों देखा हाल आकाशवाणी के जरिए प्रसारित होता था लेकिन अब इस परेड को कवर करने के लिए हजारों की तादाद में कैमरे मौजूद होते हैं, इसलिए कोई कलाकार अपनी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।

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