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Republic Day Speech And Essay: दुनियाभर में गण पर भारी है, मुट्ठीभर लोगों का तंत्र

भले दुनिया के कोने कोने से अब, ’ये तख्त उठाये जायेंगे, ये ताज उछाले जायेंगे.. ’जैसी पंक्तियां सुनने को न मिलती हों पर सच्चाई यही है कि अकेले हिन्दुस्तान या हमारे जैसे विकासशील मुल्कों में ही नहीं अपितु अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे विकसित मुल्कों में भी लगातार आम लोग मुट्ठीभर ताकतवर लोगों के खिलाफ गुस्से और क्षोभ से भरते जा रहे हैं। यही वजह है कि वालस्ट्रीट की गलियों में कुछ साल पहले पूंजीवाद के विरुद्ध जो गोलबंदी शुरू हुई थी, वह देखते ही देखते 46 से ज्यादा देशों में पसर गयी थी।

Republic Day Speech And Essay: दुनियाभर में गण पर भारी है, मुट्ठीभर लोगों का तंत्र
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गणतंत्र दिवस (Republic Day) हर साल भारत में 26 जनवरी (26 January) को मनाया जाता है। इस मौके पर स्कूलों में, सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक जगहों पर लोगों द्वारा गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम (Republic Day Program) आयोजित किए जाते हैं। लोग आपस में एक दूसरे को गणतंत्र दिवस पर शायरी (Republic Day Shayari), कविता (Republic Day Poems) भेजकर बधाई देते हैं। स्कूलों में गणतंत्र दिवस पर भाषण (Republic Day Speech in Hindi 2019) देते हैं। जिसमें बच्चे, अध्यापक और वरिष्ठ नागरिक हिस्सा लेते हैं। लेकिन गणतंत्र दिवस 2019 पर भाषण (Republic Day Speech in Hindi 2019) कैसे दें यह नहीं पता। वहीं कई जगह इस मौके पर हिंदी में निबंध (
Republic Day Essay in Hindi 2019
) का आयोजन किया जाता है। इस पर भी लोगों को नहीं पता होता कि गणतंत्र दिवस पर सबसे बेहतरीन निबंध हिंदी में (Republic Day Best Essay in Hindi) कैसे लिखें। अगर आपको भी गणतंत्र दिवस 2019 पर भाषण (Gantantra Diwas 2019 Bhashan) देना है या गणतंत्र दिवस 2019 पर निबंध (Gantantra Diwas Par Nibandh) लिखना है। तो हरिभूमि के गणतंत्र दिवस 2019 पर भाषण और निबंध आपके काम आ सकता है। गणतंत्र दिवस लगातार गूगल ट्रेंड (Republic Day In Google Trend) में बना हुआ है।
भले दुनिया के कोने कोने से अब, ’ये तख्त उठाये जायेंगे, ये ताज उछाले जायेंगे.. ’जैसी पंक्तियां सुनने को न मिलती हों पर सच्चाई यही है कि अकेले हिन्दुस्तान या हमारे जैसे विकासशील मुल्कों में ही नहीं अपितु अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे विकसित मुल्कों में भी लगातार आम लोग मुट्ठीभर ताकतवर लोगों के खिलाफ गुस्से और क्षोभ से भरते जा रहे हैं। यही वजह है कि वालस्ट्रीट की गलियों में कुछ साल पहले पूंजीवाद के विरुद्ध जो गोलबंदी शुरू हुई थी, वह देखते ही देखते 46 से ज्यादा देशों में पसर गयी थी।
वास्तव में दुनियाभर के लोगों में अगर मुट्ठीभर शासक वर्गों या ऐसे ही प्रभु वर्ग के विरुद्ध गुस्से से भरे हुए हैं तो इसकी वजह यह है कि इस वर्ग ने शोषण की अदृश्य तरकीबों के चलते हाल के सालों में इतना धन व सम्पत्ति इकठ्ठा कर ली है कि सचमुच आज इस प्रभु वर्ग और आम दुनिया के बीच जमीन आसमान का फासला पैदा हो गया है। ऑक्सफैम चैरिटी नामक एक गैर सरकारी संगठन के शोध के मुताबिक दुनिया की आबादी में महज एक फीसदी की हैसियत रखने वाले इस वर्ग के कब्जे में दुनिया की 99 फीसदी संपत्ति है। इन एक फीसदी लोगों के पास दुनिया के अन्य 99 फीसदी लोगों से ज्यादा धन भी हो सकता है।
समाज कल्याण के क्षेत्र में काम करने वाली स्विट्जरलैंड की संस्था ऑक्सफैम चैरिटी ने पिछले दिनों दावोस में वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक के दौरान यह झकझोर देनेवाला आंकड़ा और अनुमान पेश किया है। उसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के 80 अमीर लोगों के पास 1.9 खरब डॉलर करीब 120 खरब रुपए, संपत्ति है, जितनी कि शेष विश्व के 3.5 अरब लोगों के पास है। गौरतलब है कि कमरतोड़ महंगाई और डराने वाली मंदी के बावजूद अरबपतियों और खरबपतियों की संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं रुक रही। अभी 5 साल पहले तक दुनिया में कोई 60 के आसपास खरबपति डॉलर के हिसाब से, थे। जबकि साल 2014 में इनकी संख्या बढ़कर 85 हो गयी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2009 में पूरी दुनिया में एक प्रतिशत धनी लोगों के पास महज 44 प्रतिशत धन था जो 2014 में बढ़कर यहां तक पहुंच गया। इससे एक बात बिलकुल साफ हो जाती है कि मंहगाई या मंदी पहले से पैसे वाले लोगों को बिलकुल परेशान नहीं करती न उनकी राह में रोड़ा बनती है उलटे आम लोगों के लिए इस गाड़े वक्त में भी अमीरों की अमीरी सावन में तेजी से बढ़ने वाली दूब की तरह बढ़ती है। दुनिया में एक प्रतिशत अमीर लोगों के परिवारों में प्रति वयस्क व्यक्ति करीब 37 लाख डॉलर की सम्पत्ति है।
दुनिया में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के पास शेष बचे 1 प्रतिशत धन का 90 प्रतिशत है। इसका मतलब यह है कि दुनिया के 19 प्रतिशत लोग इतने गरीब हैं कि उनके पास कुछ भी नहीं है। जबकि इनकी तादाद तकरीबन 1 अरब 32 करोड़ के आसपास है। विनी ब्यानयिमा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, ऑक्सफैम कहती हैं कि अमीर लोगों को डरना चाहिए कि वह दुनिया को किस विस्फोटक मुहाने पर लिए चले आ रहे हैं।
जहां एक तरफ दुनिया के 80 लोगों के पास हर हाल 412.5 करोड़ रूपये जेब खर्च में उड़ा डालने के लिए होते हैं वहीं 1 अरब से ज्यादा लोग हर दिन 70 रूपये से भी कम में जीते हैं। भारत में तो 20 रुपये रोजाना में भी जीने वाले लोगों की तादाद 20 करोड़ से ज्यादा है। यह सिर्फ ऑक्सफैम ही नहीं कह रही दुनिया के तमाम समाजशास्त्री और अर्थशास्त्री भी चेता रहे हैं कि ‘असमानता का यह विस्फोट’ वैश्विक गरीबी के खिलाफ लड़ाई को पीछे धकेल रहा है। अमीर और ज्यादा अमीर होते जा रहे हैं और गरीब पहले से भी कहीं ज्यादा गरीब होते जा रहे हैं।
सवाल है कि क्या लोग ऐसी दुनिया में रहना चाहेंगे जहां एक फीसदी लोग विश्व के बाकी बचे लोगों से अधिक सम्पत्ति के मालिक हों ? नहीं तो जल्द ही कुछ ऐसा करना होगा कि यह सिलसिला रुके। ऐसा नहीं है कि दुनिया में बढ़ रही अमीरी गरीबी की खाई सिर्फ समाजसेवी संस्थाओं को ही दिख रही हो। ऑक्सफैम से भी पहले इस किस्म की चिंता एक बैंकिंग कंपनी, क्रेडिट स्विस भी व्यक्त कर चुकी है अक्टूबर 2013 में उसने कहा था कि सिर्फ एक फीसदी लोगों के पास विश्व की कुल आबादी की आधी सम्पत्ति है।
एक तरफ जहां आम लोगों की आय घटती जा रही है। मुद्राओं के अवमूल्यन और मंदी के चलते जहां उनका जीवन दूभर होता जा रहा है वहीं दूसरी तरफ अमीरों की अमीरी का पैमाना लगातार बढ़ता जा रहा है। फोर्ब्स पत्रिका के मुताबिक साल 2014 की अमीरों की सूची में शीर्ष 20 स्थानों के लिए वही लोग अपनी जगह सुनिश्चित कर पाए जिनकी संपत्ति 31 अरब डॉलर या उससे ज्यादा है। जबकि पिछले साल शीर्ष 20 में शामिल होने के लिए 23 अरब डॉलर की संपत्ति पर्याप्त थी।
यह इस बात का सबूत है कि जहां एक तरफ आम लोग रोजमर्रा की जिन्दगी में गुजर बसर को जूझ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अमीर लोग, अमीरी की बढ़ती प्रतिस्पर्धा से परेशान हैं। वक्त की सडक पर विपरीत ध्रुवों की तरफ बढ़ती ये गाड़ी भला कितनी दूर तक बढ़ पायेगी ?

दुनिया के 10 अरबपति

जेफ बेजोफ, अमेजन के फाउंडर (संपत्ति- 112 बिलियन डॉलर)
बिल गेट्स, माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर (संपत्ति- 90 बिलियन डॉलर)
वॉरेन बफे, बर्कशायर हाथवे के चेयरमैन (संपत्ति- 84 बिलियन डॉलर)
बर्नार्ड अर्नाल्ट, LVMH के सीईओ (संपत्ति- 72 बिलियन डॉलर)
मार्क जुकरबर्ग, फेसबुक के सीईओ (संपत्ति- 71 बिलियन डॉलर)
अमेंसियो ऑर्टेगा, फैशन ब्रांड ज़ारा के चेयरमैन (संपत्ति- 70 बिलियन डॉलर)
कारलोस स्लिम हेलू, अमेरिका मोविल के मालिक (संपत्ति- 67.1 बिलियन डॉलर)
चार्ल्स कोच, कोच इंडस्ट्री के सीईओ (संपत्ति- 60 बिलियन डॉलर)
डेविड कोच, कोच इंडस्ट्री के कंट्रोलर (संपत्ति- 60 बिलियन डॉलर)
लैरी एलीसन, ऑरेकल सॉफ्टवेयर के को-फाउंडर (संपत्ति-58.5 बिलियन डॉलर)

टॉप 5 अमीर भारतीय

मुकेश अंबानी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटिड के मालिक (संपत्ति-40.1 अरब डॉलर)
अजीम प्रेमजी, विप्रो लिमिटिड के मालिक (संपत्ति- 18.8 अरब डॉलर)
लक्ष्मी निवास मित्तल, एरकेरोल मित्तल के चेयरमैन और सीईओ (संपत्ति- 18.5 अरब डॉलर)
शिव नडार, HCL के चेयरमैन (संपत्ति- 14.6 अरब डॉलर)
दिलीप सांघवी, Sun Pharmaceuticals के फाउंडर (संपत्ति- 12.8 अरब डॉलर)

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