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26 जनवरी पर मदरसों में भी फहराया जाएगा तिरंगा: राष्ट्रीय मुस्लिम मंच

राष्ट्रीय पर्व को पूरे देश में एकजुटता के साथ मनाया जाना चाहिए।

26 जनवरी पर मदरसों में भी फहराया जाएगा तिरंगा: राष्ट्रीय मुस्लिम मंच
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नई दिल्ली. अगले महीने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के आनुषांगिक संगठन राष्ट्रीय मुस्लिम मंच (एमआरएम) ने जोर-शोर से काम करना शुरू कर दिया है। संगठन का कहना है कि इसके लिए उन्होंने एक व्यापक अभियान की योजना बनायी है, जिसकी शुरूआत 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस से होगी। इसके तहत देश में कुल 10 हजार जगहों पर तिरंगा फहराया जाएगा। अभियान में मदरसों के अलावा मुस्लिम मौहल्लों और विद्यालयों को भी शामिल किया जाएगा।
मदरसों में फहराएंगे तिरंगा
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मागदर्शक और संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने हरिभूमि को बताया कि गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व देशभर में जाति, धर्म और प्रांत से ऊपर उठकर मनाया जाना चाहिए। मदरसे इसमें शामिल नहीं होते हैं। इसलिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इन्हें भी इसमें शामिल करने के लिए एक मुहिम चलाने का निर्णय लिया है। हम चाहते हैं कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस जैसे दो राष्ट्रीय पर्व पूरे देश में एकजुटता के साथ मनाए जाने चाहिए। गौरतलब है कि बीते सात वर्षों से एमआरएम मदरसों में तिरंगा फहराने का कार्यक्रम कर रहा है। शुरूआत में इसमें करीब 70 मदरसे शामिल थे। लेकिन अब इनकी तादाद में इजाफा हो रहा है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल ने कहा कि हमारे इस कार्यक्रम के जरिए देश में एकता और मुस्लिम समाज में जागरूकता लाने में मदद मिलेगी।
अन्यों की विफलता के बाद उठाया कदम
इंद्रेश कुमार कहते हैं कि मदरसों और मुस्लिम मौहल्लों में तिरंगा फहराने की कोशिश कांगेस, समाजवादी पार्टी और इनेलो जैसे राजनीतिक दलों ने भी की थी। लेकिन वो इसमें असफल हो गए। अब हमारे संगठन ने इस बात का बीड़ा उठाया है कि मुस्लिम मतावलंबियों को भी गणतंत्र दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व के साथ जोड़कर बाकी हिंदूस्तान के समकक्ष लाकर खड़ा किया जाए। क्योंकि मुस्लिम आबादी भी बाकी आबादी की तरह ही देश का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वोट बैंक बनाए गए मुस्लिम
इतिहास में देखने पर पता चलता है कि अन्य राजनीतिक दलों द्वारा मुसलमानों को केवल वोट बैंक की तरह ही इस्तेमाल किया गया है। इसलिए इस तरह के राष्ट्रीय पर्व में उनकी भागीदारी नहीं हो सकी। एमआरएम का कहना है कि जब हम यह मानते हैं कि हम सब एक धारा के लोग हैं। हमारे पूर्वक एक हैं तो हम एक देश का ही हिस्सा हैं। ऐसे में जब बाकी समुदायों के लोग और स्कूलों में गणतंत्र दिवस से पहले तिरंगा फहराया जाता है तो मदरसों में क्यों नहीं फहराया जा सकता? हमारी इस कवायद के जरिए हम चाहते हैं कि मुसलमानों में भी भारत माता का जज्बात पैदा हो और वो भी देश के लिए की गई कुबार्नियों को साझा तौर पर याद करें।
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