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Happy Republic Day 2019 Speech In Hindi : हिंदी में गणतंत्र दिवस पर भाषण, अभी तक अधूरे हैं डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के सपने!

भारत को स्वाधीन कराने और सशक्त गणतंत्र बनाने वाले डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने जो स्वप्न देखे थे, उनमें से बहुत से आज भी अधूरे हैं। उनको पूरा करने के लिए हर नागरिक को अपने स्तर पर दायित्वों का निर्वहन करना होगा।

Happy Republic Day 2019 Speech In Hindi : हिंदी में गणतंत्र दिवस पर भाषण, अभी तक अधूरे हैं डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के सपने!
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भारत को स्वाधीन कराने और सशक्त गणतंत्र बनाने वाले राष्ट्रनायकों ने जो स्वप्न देखे थे, उनमें से बहुत से आज भी अधूरे हैं। उनको पूरा करने के लिए हर नागरिक को अपने स्तर पर दायित्वों का निर्वहन करना होगा। इस बारे में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कई पुस्तकों में अपने विचार रखे हैं। प्रस्तुत है डॉ. कलाम और वाई.एस. राजन द्वारा लिखित 'भारत 2020 और उसके बाद पुस्तक के संपादित अंश।

वर्ष 2020 और उसके बाद के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है- भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाना, आतंकवाद से मुक्ति और समरसतापूर्ण भारतीय समाज का निर्माण। हम सबको इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में भूमिका निभानी है।

पंचायती नेता: हम जमीनी स्तर से शुरू करेंगे। देश के एकदम प्रारंभ से निर्माण में पंचायती नेताओं को बहुत योगदान करना है। सबसे पहले तो उन्हें अपनी राज्य सरकार से मांग करनी चाहिए कि पचास या लगभग इतने ही नेटवर्क्ड गांवों के झुंड पर फोकस करते हुए उनके गांवों के आस-पास पूरा वातावरण निर्मित किया जाए। उनका लक्ष्य होना चाहिए- भौतिक संपर्क, इलेक्ट्रॉनिक (ब्रॉडबैंड) संपर्क, ज्ञान संपर्क एवं बाजार संपर्क।

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पंचायती नेता जिन अन्य परियोजनाओं को लक्षित कर सकते हैं, वे हैं अपने स्थान के जलस्रोतों का रख-रखाव करना, बढ़ाना और सिंचाई के लिए नहरों एवं ड्रिप सिंचाई सुविधाओं की मांग करना।

विधायक: स्थानीय विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र की समृद्धि पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। उन्हें रोजगार प्रदाता उद्योगों और दक्षता प्रदान करने वाले केंद्रों को लाने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके अलावा वे अपने क्षेत्र में मोबाइल डायग्नोस्टिक क्लीनिक लाने के लिए काम कर सकते हैं।

सांसद: सांसदों के पास काम करने के लिए कहीं ज्यादा बड़ा क्षेत्र होता है। उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में मंजूर की गई परियोजनाओं में तेजी लाने और पंचायतों द्वारा मांगी जाने वाली पूरा परियोजनाओं में मदद करने के लिए जिला प्रशासन के साथ काम करना होगा।

सरकारी योजनाओं को निर्वाचन क्षेत्र के आर्थिक विकास और लोगों के कल्याण के लिए प्रवृत्त करने में मदद करने में भी उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। वास्तव में, प्रत्येक सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद का आकलन कर सकता है और उसे बढ़ाने की दिशा में काम कर सकता है।

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जिला स्तरीय प्रशासनिक अधिकारी: उनका मिशन यथासंभव सर्वश्रेष्ठ प्रशासन प्रदान करने की कोशिश करना है। वे प्रशासन निर्देशिका विकसित कर सकते हैं और उसे बेहतर बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

राज्य मंत्री: उनका लक्ष्य अपने राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 10 से 15 प्रतिशत बढ़ाना और राज्य के प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद पर नजर रखना होना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री: उन्हें उन चारों लक्ष्यों पर काम करना होगा, जिनका हमने ऊपर जिक्र किया है, और उन्हें सारे भारत पर नजर रखनी होगी। उन्हें ऐसी गतिविधियों में मदद करनी होगी जो तेजी पकड़ने में धीमी हों, और विशेष रूप से उनका प्रोत्साहन बढ़ाना चाहिए, जो अच्छा कर रहे हों। उन्हें सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रदर्शनों पर प्रोत्साहन देना चाहिए और अन्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ कार्य दर्शाने चाहिए। स्वयं में और देश में भारतीयों के विश्वास को मजबूत करना दायित्व है।

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राज्यों और केंद्र में विपक्ष: उनकी भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि सरकार विकास के वेग को शिथिल न करे।

नियामक/पर्यवेक्षक निकाय: वे सरकारी क्रिया-कलापों पर निगरानी रखकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें लक्ष्य 1 और 2 को ध्यान रखते हुए ऐसा करना होगा। नियामक निकायों के लिए किसी भी कार्यक्रम में शुरू से शामिल होना और समय-समय पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करते रहना आवश्यक है कि क्या काम सही हो रहा है और कहां गलती हो रही हो सकती है?

न्यायपालिका: न्यायिक प्रणाली को अहम भूमिका निभानी है विशेषकर लक्ष्य 3 एवं 4 के संदर्भ में। न्यायपालिका को आज के भारतीयों के सपनों और महत्वाकांक्षाओं के साथ तालमेल रखते हुए भारत की अर्थव्यवस्था को संबल देने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहिए।

मीडिया: मीडिया सभी रूपों में भारत को जीवंत रूप से प्रजातांत्रिक रखने में मदद करता हैं। यह मीडिया का दायित्व है कि किसी भी गलत काम के खिलाफ लगातार निगरानी रखे, लेकिन जब रिपोर्ट करने के लिए कोई अच्छी बात हो तो इसे सकारात्मक संदेश भी फैलाना चाहिए।

कॉरपोरेट क्षेत्र: हमारे कॉरपोरेट सेक्टर्स, अर्थव्यवस्था के चालक हैं। उन्हें न केवल घरेलू एवं वैश्विक बाजारों में लाभदायक और प्रतिस्पर्धात्मक होना होगा, बल्कि उनके पास सशक्त प्रौद्योगिकीय शक्तियां भी होनी होंगी। भारतीय उद्योगों (छोटे से मंझोले आकार के उद्यमों समेत) को भारत में डिजाइन किए, भारत में खोजे, भारत में निर्मित उत्पादों और सेवाओं को सारे विश्व में पहुंचाने का लक्ष्य रखना चाहिए।

शैक्षिक-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान: हालांकि अभी कुछ साल भारत एक अनुगामी अर्थव्यवस्था रहेगा, लेकिन 2022 तक सकल घरेलू उत्पाद के संदर्भ में विश्व में तीसरा स्थान पाने के लिए इसे मौलिक सोच और नए विचारों की आवश्यकता होगी। इन्हें हमारे शैक्षिक और बैज्ञानिक संस्थानों से आना होगा। इन्हें सामने मौजूद कार्य के अनुसार तेजी से बदलना और अनुकूल बनना होगा। और खुद को लक्ष्य 1 एवं 2 के अनुरूप लाना होगा।

विद्यार्थी एवं युवा: सारे युवाओं को किसी न किसी रूप में विद्यार्थी बनना चाहिए। उनका लक्ष्य स्वयं को भविष्य के भारत के लिए तैयार करना होना चाहिए। अगर युवा दक्ष होंगे, अगर वे अनुशासित होंगे, अगर वे रचनात्मक होंगे, अगर वे स्वस्थ और शारीरिक रूप से चुस्त होंगे तो भारत सभी लक्ष्यों को प्राप्त कर लेगा। युवाओं के लिए मंत्र होना चाहिए- ठीक से सीखो, अनेक दक्षताएं सीखो, सीखना जारी रखो, सीखना सीखो।

हमारे सारे युवाओं के लिए, लड़कियों समेत, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वे कार्यबल में सम्मिलित हों और राष्ट्र की उत्पादकता में योगदान करें।

किसान:उन्हें एक महान भविष्य का निर्माण करना है। उन्हें गरीबी के विचार को त्यागना, रियायतें मांगना बंद करना और इसके बजाय नियंत्रणों की प्रचुरता से मुक्ति मांगना सीखना चाहिए। उन्हें कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकियों के आधुनिकीकरण और संपत्ति सृजन की मांग करनी चाहिए।

राय निर्माता कार्यकर्ता एवं बुद्धिजीवी: ये प्रमुख प्रभावोत्पादक अकसर महसूस करते हैं कि उनकी आवाज सुनी नहीं जा रही है। लेकिन यह सुनिश्चित करना उनका दायित्व है कि देश अगले दो दशकों में स्वयं को बदलने की दिशा में सही कदम उठाए।

वरिष्ठ नागरिक: उनकी संख्या बहुत अधिक है, कुल मिलाकर लगभग दस करोड़, जो कि अनेक देशों की जनसंख्या से ज्यादा है। उनमें से अनेक शिक्षित और दक्ष हैं, उन्हें उस बेहतर भारत के निर्माण के लिए जो वे स्वयं नहीं देख सके, युवाओं की मदद और उनका मार्गदर्शन करने में संलग्न होना चाहिए।

डॉक्टर एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी: सभी भारतीयों तक उत्तम एवं वहनीय स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रत्येक को यथासंभव उत्कृष्ट तरीके से मदद करने का अपना रास्ता तलाशना होगा। महत्वपूर्ण बात यह याद रखना है कि जब हम 2020 के बाद एक भारत के निर्माण के बारे में सोचते हैं तो प्रत्येक भारतीय का, हममें से प्रत्येक को, एक भूमिका निभानी होगी।

इक्कीसवीं सदी भारत की होगी बशर्तें हम स्वयं को बेहतर बनाने और भारत को अपने सपनों के देश में बदलने की एक सतत प्रतिबद्धता और कोशिश के साथ कड़ी मेहनत करें।

क्या हम ऐसा कर सकते हैं? जैसा कि भिक्षु समर्पण कहते हैं, ‘आप उससे कहीं अधिक हैं जितना आप सोचते हैं कि आप हैं, और आप उससे कहीं अधिक प्राप्त कर सकते हैं, जितना आप अभी प्राप्त कर रहे हैं।’

जी हां, हम यह कर सकते हैं!

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