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गणतंत्र दिवस 2019: बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का ऐतिहासिक भाषण

महात्मा गांधी ने एक बार इच्छा जाहिर की थी कि वो एक अछूत जाति की महिला को भारत के पहले राष्ट्रपति के तौर पर देखना चाहते हैं। लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई। लेकिन इसकी कुछ भरपाई तब हुई जब डॉ भीमराव आंबेडकर को संविधान सभा की ड्रॉफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष चुना गया। 26 जनवरी 1950 को भारत एक गणराज्य बन गया था।

गणतंत्र दिवस 2019: बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का ऐतिहासिक भाषण
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Republic Day 2019

महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने एक बार इच्छा जाहिर की थी कि वो एक अछूत जाति की महिला को भारत के पहले राष्ट्रपति के तौर पर देखना चाहते हैं। लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई। लेकिन इसकी कुछ भरपाई तब हुई जब डॉ भीमराव आंबेडकर (Bhimrao Ambedkar) को संविधान सभा की ड्रॉफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष चुना गया। 26 जनवरी 1950 को भारत एक गणराज्य बन गया था। इसी लिए हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है (Republic Day 2019)।

इसी दिन पूरे भारत में संविधान लागू हो गया था। संविधान (Constitution Of India) सभा की अंतिम बैठक 25 नवंबर 1949 को हुई थी। जिसमें संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष डॉ भीमराव आंबेडकर ने संविधान सभा का आखिरी भाषण दिया। उनका यह भाषण आज भी बेहद मशहूर है। क्योंकि उनका यह भाषण बेहद संयमित था। न ही यह बहुत जोशीला था। और न ही बहुता निराशा से भरा हुआ।

यह देश के लिए एक नई उम्मीद की तरह था। इस सभा में उन्होंने ड्रॉफ्टिंग कमेटी के अन्य सदस्यों, अपने सहयोगी कर्मचारियों और उस पार्टी (कांग्रेस) जिसका वह आजीवन विरोध करते रहे का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के अनुशासन की वजह से ही ड्रॉफ्टिंग कमेटी, संविधान सभा में संविधान बनाने का काम यह जानते हुए भी कर पाई कि हरेक संशोधन और हरेक धारा का क्या भविष्य होने वाला है। जाति प्रथा पर चोट करते हुए अंबेडकर ने कहा कि मैं इस मत का हूं कि यह विश्वास करना कि हम एक राष्ट्र हैं।

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हम एक महान भ्रम पालने जा रहे हैं। कई हजार जातियों में विभाजित एक राष्ट्र भला एक कैसे हो सकता है। जितना जल्दी हम यह अहसास कर लें कि दुनिया के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक भावना के रूप में हम अभी तक एक राषट्र नहीं हैं यही हमारे लिए बेहतर होगा। उसके बाद हम गंभीरता से भारत को एक राष्ट्र बनाने की आवश्यक्ता महसूस करेंगे।

और इस लक्ष्य को साकार करने के तरीकों और साधन के बारे में सोचेंगे। इस लक्ष्य को प्राप्त करना बेहद कठिन काम है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन है। संयुक्त राज्य अमेरिका में जाति की कोई समस्या नहीं थी। भारत में जातियां हैं। जातियां राष्ट्रविरोधी हैं। प्रथमता यह सामाजिक जीवन में अलगाव लाती हैं।

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यह राष्ट्रविरोधी इस लिए भी हैं क्योंकि ये जाति और जातियों के बीच ईर्ष्या और घृणा उत्पन्न करती हैं। इसलिए यदि हम एक राष्ट्र बनना चाहते हैं तो हमें जातियों को खत्म करना होगा। बंधुत्व भाव के बिना समानता और स्वतंत्रता रंग के एक कोट (परत) से ज्यादा गहरी नहीं होगी। अंबेडकर ने भविष्य के प्रति तीन चेतावनी देकर अपना भाषण खत्म किया।

पहला कि लोकतंत्र में रक्तरंजित क्रांति की कोई जगह नहीं बचा है। लेकिन गांधीवादी तरीकों की भी कोई जगह नहीं हा। उन्होंने कहा कि गांधीवादी आंदोलन एक अधिनायकवादी सत्ता के अधीन एक उपाय हो सकता था। क्योंकि अब संवैधानिक उपाय लागू हो गए हैं और इन तरीकों की जरूरत नहीं है।

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सत्याग्रह और इस तरह के दूसरे उपाय अराजकता के व्याकरण के सिवाय कुछ भी नहीं हैं। जितनी जल्दी हम उन्हें त्याग दें उतना ही हमारे लिए अच्छा होगा। आंबेडकर की दूसरी चेतावनी किसी करिश्माई सत्ता के सामने बिना सोचे समझे अपने आपको समर्पित कर देना था। अंत में आंबेडकर ने चेतावनी दी है कि महज राजनीतिक लोकतंत्र से संतुष्ट न हों बल्कि सामाजिक लोकतंत्र लाएं।

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