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गणतंत्र दिवस 2019: देश में राजभाषा को लेकर क्या कहता है ''संविधान''

भारत एक विविधताओं से भरा देश है। यहां अलग-अलग धर्मों, संस्कृति, मान्यताओं को मानने वाले लोग रहते हैं। इसी देश में कई भाषाओं (Languages) को बोलने वाले भी निवास करते हैं। भारत गणतंत्र दिवस (Republic Day 2019) हर साल 26 जनवरी को मनाता है। भारत ने इसी दिन संविधान को अंगीकृत किया था। संविधान बनाने में जो सबसे बड़ी समस्या आ रही थी वह भाषा की थी। सदस्यों के सामने समस्या यह थी कि देश में इतनी सारी भाषाएं हैं। तो कामकाज की कौन सी भाषा बनाई जाए। ज्यादातर हिंदी को राजभाषा के रूप में चाहते थे। लेकिन अन्य भाषाओं के सदस्य इस पर सहमत नहीं थे। तो आखिर भारत में राजभाषा है क्या। आज हम आपको बता रहे हैं कि देश में राजभाषा क्या है? और इस विषय पर क्या कहता है संविधान (Constitution Of india)।

गणतंत्र दिवस 2019: देश में राजभाषा को लेकर क्या कहता है
भारत एक विविधताओं से भरा देश है। यहां अलग-अलग धर्मों, संस्कृति, मान्यताओं को मानने वाले लोग रहते हैं। इसी देश में कई भाषाओं (Languages) को बोलने वाले भी निवास करते हैं। भारत गणतंत्र दिवस (Republic Day 2019) हर साल 26 जनवरी को मनाता है। भारत ने इसी दिन संविधान को अंगीकृत किया था। 395 अनुच्छेद वाले दुनिया के सबसे लंबे संविधान को डा. भीमराव आंबेडकर ने लिखा था। डा भीमराव आंबेडकर संविधान प्रारुप समिति के अध्यक्ष थे। डा. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में संविधान समिति बनी थी। संविधान बनाने में जो सबसे बड़ी समस्या आ रही थी वह भाषा की थी। सदस्यों के सामने समस्या यह थी कि देश में इतनी सारी भाषाएं हैं। तो कामकाज की कौन सी भाषा बनाई जाए। ज्यादातर हिंदी को राजभाषा के रूप में चाहते थे। लेकिन अन्य भाषाओं के सदस्य इस पर सहमत नहीं थे। तो आखिर भारत में राजभाषा है क्या। आज हम आपको बता रहे हैं कि देश में राजभाषा क्या है? और इस विषय पर क्या कहता है संविधान (
Constitution Of india
)।

संघ की राजभाषा

संविधान की शुरुआत में भारत के बारे में बताते हुए कहा गया है। भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ है। इसी लिए संविधान में जहां देश और भारत की बात आई है वहां संघ शब्द का इस्तेमाल किया गया है। संविधान (Constitution of India) में अनुच्छेद 343 से 351 में सिर्फ भाषाओं के बारे में बताया गया है।

संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी होगी और लिपि नागरी होगी। आगे इसी बात को साफ करते हुए कहा गया है। कि शुरुआत के पंद्रह साल तक जिन शासकीय कार्यों के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल होता था उसमें अंग्रेजी ही रहेगी।

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राज्य की राजभाषा

भारत यानी संघ 29 राज्यों से मिलकर बना है। संघ की राजाभाषा के संबंध में तो हमने जान लिया। लेकिन विभिन्न राज्यों की राजभाषाएं हिंदी कैसे हो सकती हैं। क्योंकि अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग भाषाएं हैं। उस संबंध में अनुच्छेद 345 में कहा गया है कि किसी राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा उस राज्य में प्रयोग होने वाली भाषाओं में से एक या अधिक भाषाओं को या हिंदी को उस राज्य की राजभाषा के रूप में अंगीकार कर सकेगा।

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लेकिन जबतक राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा एक भाषा को राजभाषा न बनाए तब तक अंग्रेजी का ही इस्तेमाल किया जाता रहेगा। जैसा संविधान के पूर्व किया जाता रहा है। अब इसमें भी एक समस्या थी। कि कैसे दो अलग-अलग भाषाओं वाले राज्य पत्राचार कर सकेंगे। इस पर भी कहा गया है कि राज्य अगर केंद्र सरकार से पत्राचार करना चाहे तो राज्य की तत्समय प्राधिकृत राजभाषा का इस्तेमाल कर सकता है।

राज्यों से पत्राचार का भी यही नियम है। लेकिन अगर दो राज्य यह करार कर लेते हैं कि वह पत्राचार हिंदी में करेंगे तो हिंदी का इस्तेमाल किया जाएगा। राज्य की राजभाषा के संबंध में अनुच्छेद 347 के मुताबिक अगर राज्य की अधिकतम जनसंख्या अपनी भाषा को ही राजभाषा बनाने की मांग करे तो राष्ट्रपति इस संबंध में राज्य को निर्देश दे सकते हैं।

अदालत की भाषा

उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की प्रयोग में आने वाली भाषा के रूप में कहा गया है कि जब तक संसद निर्णय न ले तब तक न्यायालयों में पूर्व की तरह अंग्रेजी का ही इस्तेमाल किया जाता रहेगा। लेकिन आज 2019 में भी कोर्ट अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल कर रहा है। कोर्ट की भाषा हिंदी हो, इसे लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी।

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जिस पर विचार करते हुए पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने स्पष्ट कहा था कि सुप्रीम कोर्ट की भाषा अंग्रेजी है। इसकी जगह वह हिंदी भाषा के लिए केंद्र सरकार या संसद से कानून बनाने को नहीं कह सकता। क्योंकि ऐसा करना विधायिका और कार्यपालिका के अधिकारक्षेत्र में दखल देना होगा।

लोगों की भाषा

अनुच्छेद 350 में कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति किसी व्यथा के निवारण के लिए संघ या राज्य के किसी अधिकारी को संघ या राज्य में प्रयोग होने वाली किसी भाषा में अभ्यावेदन दे सकेगा। संविधान के अनुसार प्राथमिक स्तर पर राज्य के भीतर राजभाषा में शिक्षा की सुविधा होगी।

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