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गणतंत्र दिवस 2019: लोकतंत्र के चार नहीं सिर्फ तीन ही स्तंभ हैं, क्या कहता है संविधान

देश में आने वाला राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस (Republic Day 2019) है। इस साल भारत में 70वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर परेड का आयोजन किया जाता है। जहां देश की तीनों सेनाएं राष्ट्रपति को सलामी देती हैं। गणतंत्र दिवस (Republic Day 2019) इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भारत में संविधान (Indian Constitution) की स्थापना हुई थी। इसी दिन दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान भारत ने अंगीकृत किया था। इसी के अनुसार देश में शासन चलता है। तीन स्तंभ हैं जिस पर देश टिका हुआ है। पहला विधायिका, दूसरा कार्यपालिका और तीसरा न्यायपालिका। आज हम आपको बता रहे हैं इन तीनों स्तंभों के बारे में जो आप नहीं जानते होंगे।

गणतंत्र दिवस 2019: लोकतंत्र के चार नहीं सिर्फ तीन ही स्तंभ हैं, क्या कहता है संविधान

Republic Day 2019

देश में आने वाला राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस (Republic Day 2019) है। इस साल भारत में 70वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर परेड का आयोजन किया जाता है। जहां देश की तीनों सेनाएं राष्ट्रपति को सलामी देती हैं। गणतंत्र दिवस (Republic Day 2019) इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भारत में संविधान (Indian Constitution) की स्थापना हुई थी। इसी दिन दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान भारत ने अंगीकृत किया था। इसी के अनुसार देश में शासन चलता है। तीन स्तंभ हैं जिस पर देश टिका हुआ है। पहला विधायिका, दूसरा कार्यपालिका और तीसरा न्यायपालिका। आज हम आपको बता रहे हैं इन तीनों स्तंभों के बारे में जो आप नहीं जानते होंगे।


विधायिका

भारत के संविधान में सबसे पहली जो बात कही गई है। वह है- भारत, अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा। संविधान में जहां भी भारत या देश के संबंध में बात कही गई है। वहां-वहां 'संघ' शब्द का इस्तेमाल किया गया है। राज्य के लिए राज्य शब्द का इस्तेमाल किया गया है। विधायिका (Legislature) यानी जहां विधि बनती हो।

विधि यानी नियम। विधायिका (Legislature) या विधानमंडल किसी राजनैतिक व्यवस्था के उस संबंध को कहा जाता है जिसे नियम कानून व जन नीतियां बनाने, बदलने व हटाने का अधिकार हो। किसी विधायिका के सदस्यों को विधायक (Legislators) कहते हैं। भारत में राष्ट्रीय स्तर पर दो-सदनीय विधायिका है जो संसद कहलाती है।

मतदान की प्रक्रिया के द्वारा संसद के सद्स्यों को चुना जाता है। राज्यों के स्तर पर भारत के हर राज्य में विधायिका है। जिसे विधानसभा कहते हैं। विधानसभा के सदस्यों को भी मतदान के द्वारा जनता चुनती है। अपने राज्य के संबंध में विधानसभा नियम बना सकती है।

कार्यपालिका

कार्यपालिका (Executive) का काम होता है कि विधायिका जो नियम बनाए वह उसे लागू करवाए। संघीय कार्यपालिका में राष्‍ट्रप‍ति, उप राष्‍ट्रपति और राष्‍ट्रपति को सहायता करने एवं सलाह देने के लिए अध्‍यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री के साथ मंत्रिपरिषद एवं महान्यायवादी शामिल होते हैं।

भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राष्ट्रपति के नाम से की हुई कही जाती है। संविधान के अनुच्छेद 53 में राष्ट्रपति के लिए कहा गया है कि संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका प्रयोग संविधान के अनुसार स्वंय या अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा करेगा।

न्यायपालिका

न्यायपालिका (Judiciary) भारतीय लोकतंत्र का एक प्रमुख अंग है। न्यायपालिका कानून के अनुसार न चलने वालों को दणडित करती है। न्यायपालिका विवादों को सुलझाने का काम करती है। न्यायपालिका स्वयं कोई नियम नहीं बना सकती। सभी को समान न्याय सुनिश्चित करवाना न्यायपालिका का असली काम है। संविधान में न्यायपालिका को भी कई स्तर पर बांटा गया है।

संघ की न्यायपालिका

संघ की न्यायपालिका सुप्रीम कोर्ट को कहते हैं। संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत कहा गया है कि भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा। जिसमें एक प्रधान न्यायधीश होता है। इसी के अतर्गत देश के अन्य राज्यों के हाई कोर्ट आते हैं। शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट में 7 जज होते थे।

उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 (2009 का 11) की धारा 2 के अनुसार यह संख्या अब तीस है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 से 147 तक में संघ की न्यायपालिका का वर्णन है।

ये थे भारतीय संविधान के तीन स्तंभ। कई बार यह भी कहा जाता है कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता है। लेकिन संविधान में चौथे स्तंभ का कहीं कोई वर्णन नहीं है।

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