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Republic Day 2019 : पहले गणतंत्र दिवस पर जवाहर लाल नेहरू ने दुनिया को दिया था ये संदेश

दिल्ली में गणतंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019) परेड की तैयारियां चल रही हैं। भारत (India) 26 जनवरी 2019 (26 January 2019) को अपना 70वां गणतंत्र दिवस (70th Republic Day) मनाने जा रहा है।

Republic Day 2019 : पहले गणतंत्र दिवस पर जवाहर लाल नेहरू ने दुनिया को दिया था ये संदेश

Republic Day 2019 (गणतंत्र दिवस 2019) 26 जनवरी 2019

दिल्ली में गणतंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019) परेड की तैयारियां चल रही हैं। भारत (India) 26 जनवरी 2019 (26 January 2019) को अपना 70वां गणतंत्र दिवस (70th Republic Day) मनाने जा रहा है।26 जनवरी 1950 (26 January 1950) को भारतीय इतिहास (India History) में इस दिन भारत का संविधान (Constitution of India) लागू हुआ था। जब 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ तो देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू (Pt. Jawaharlal Nehru) ने रेडियो के जरिए देशवासियों को संबोधित किया था। पंडित जवाहरलाल नेहरू (Pt. Jawaharlal Nehru) ने अपने भाषण में देश ही नहीं बल्कि दुनिया को खासकर पश्चिमी दोशों के लिए एक संदेश था। जिस समय भारत आजाद हुआ था उस रात में जो पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भाषण दिया था वे भाषण तो बहुत लोगों ने सुना होगा। लेकिन गणतंत्र दिवस पर दिया गया उनका भाषण बहुत कम ही लोगों ने सुना होगा। उन्होंने गणतंत्र दिवस के मौके पर अंग्रेजी के भाषण में खास संदेश दिया था।

गणतंत्र दिवस पर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दिया था खास संदेश

पं. जवाहरलाल नेहरू ने गणतंत्र दिवस के मौके पर रेडियो पर अंग्रेजी में भाषण दिया था। इस भाषण में पं. जवाहरलाल नेहरू ने विश्व के सभी देशों से चैन और अमन की अपील की गई थी।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि युद्ध (War) और शांति (Peace) मुहिम एक साथ चलने से उपजे असंतुलन को सुधारना होगा। दुनिया के लोग शांति चाहते हैं इसे देशों को समझना होगा। पश्चिमी देशों के उनके दौरे से यह साफ है कि दुनिया को अब शांति चाहिए।

बता दें कि गणतंत्र दिवस के मौके पर दिए जाने वाले भाषणों में भारत की शांति और विकास के मुद्दों पर बात होती है। लेकिन हमारे देश की शातिं को भंग करने वाला कोई और देश नहीं बल्कि भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान है।

भारत की शांति को भंग करने वाला सबसे बड़ा खतरा पाकिस्तान से है। आज भी शांति के महत्व को समझना उतना ही जरूरी है, जितना कि पहले गणतंत्र दिवस के समय था।

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